हैदराबाद : विश्वरंग फाऊँडेशन (भारतीय संस्कृति, वैश्विक मंच), रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र एवं वनमाली सृजन पीठ, भोपाल और विवेक वर्धिनी महाविद्यालय, कोठी, हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय सभागार में 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस कार्यक्रम एवं विश्वरंग के लिए हिंदी ओलंपियाड पोस्टर-2025 का भव्य आयोजन किया गया।

इस शुभ अवसर पर रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे के समग्र पर्यवेक्षण में विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक डॉ जवाहर कर्णावट और टीम के सहयोग से चलायी जाने वाली अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव वैश्विक मंच विश्वरंग के लिए हिंदी ओलंपियाड पोस्टर-2025 का लोकार्पण विवेक वर्धिनी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ डी विद्याधर ने किया है।

पोस्टर के लोकार्पण के पश्चात, विश्वरंग-तेलंगाना राज्य के हिन्दी ओलंपियाड-2025 के समन्वयक डॉ वी वेंकटेश्वर राव ने विश्वभर में हिन्दी एवं भारतीय कला व संस्कृति को फैलाने में विश्वरंग फाऊंडेशन, भोपाल द्वारा किए जा रहे कार्यकलापों से अवगत कराया और आगामी सितंबर माह के दौरान 14 सितम्बर यानी हिंदी दिवस से और 30 सितंबर से अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस तक भाषाविदों, शोधार्थियों के लिए प्रस्तावित विभिन्न गतिविधियों, पुस्तक, यात्राओं, पुरस्कार व सम्मानों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उन्होने बांग्लादेश के प्रस्ताव पर यूनेस्को द्वारा लिए गए निर्णय के आधार पर, वर्ष 2000 से प्रतिवर्ष 21 फरवरी को विश्व भर में मनाए जाने वाले मातृभाषा दिवस का इतिहास, आयोजन का अवसर, मातृभाषा को प्राथमिकता दी जाने की आवश्यकता पर व्यापक प्रकाश डाला।

इस समारोह के विशिष्ट वक्ता पंजाब नेशनल बैंक, अंचल कार्यालय, हैदराबाद के मुख्य प्रबंधक डॉ साकेत सहाय और केनरा बैंक, क्षेत्रीय कार्यालय, रंगारेड्डी जिले के वरिष्ठ प्रबंधक मेकला बापु ने अपनी संस्कृति और परंपराओं का वाहक मानी जाने वाली मातृभाषा के महत्व पर रोचक उदाहरणों के साथ अपने विचार व्यक्त किए और नियमित रूप से मातृभाषा में अपने विचारों का आदान प्रदान करने की सलाह दी।

इसके पश्चात अध्यक्षीय भाषण देते हुए विवेक वर्धिनी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ डी विद्याधर ने अपनी भाषा के प्रति भारतेन्दु हरिश्चंद्र की “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटता न हिय को सूल” का संदर्भ देते हुए कहा कि जब तक मातृभाषा का महत्व नहीं समझेंगे, मातृभाषा में ज्ञान प्राप्त नहीं करेंगे, तब तक अपनी भाषा को संरक्षित करने में विफल ही रहेंगे। इस स्थिति से बाहर आने की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने उपस्थितों से अपील किया कि घर में और अपनी भाषा से परिचित व्यक्तियों के साथ अपनी ही भाषा में संपर्क करना न भूलें।

महाविद्यालय की प्राध्यापिका सुश्री सिन्धूजा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न इस कार्यक्रम में एक सौ से अधिक स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने भाग लिया है। कार्यक्रम का संचालन कुमारी नंदिनी ने किया। इस कार्यक्रम में डॉ. रजनी चौधरी, डॉ. जगदेवी मूले, जयंती, शालिनी, प्रतिभा, इन्दु कुमारी, हिमजा, माधवी, संदीप, आशा, रूही, नूरेन, श्रीसौम्या, शिरीषा आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे हैं।







