हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान की ओर से महाराष्ट्र राज्य के वाशिम जिले के हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए 16 से 28 मार्च तक 494वाँ नवीकरण पाठ्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसका उद्घाटन समारोह16 मार्च को संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. सुनील बाबुराव कुळकर्णी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
इस कार्यक्रम के संयोजक केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक, डॉ. दीपेश व्यास, अतिथि प्रवक्ता, डॉ. एस. राधा, के. इंद्रा एवं शेख मस्तान वली उपस्थित थे। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया तथा सजग तिवारी द्वारा ऑनलाइन संस्थान गीत, अतिथियों का स्वागत गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की शुरूआत की गई।
अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. सुनील बाबुराव कुळकर्णी ने कहा कि हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में महाराष्ट्र के साहित्यकारों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। हिंदी एवं मराठी दोनों ही भाषाओं की लिपि देवनागरी है। इस समानता के कारण दोनों का साहित्य एक जैसा प्रतीत होता है। खास तौर पर नाटकों का मंचन एक जैसा ही देखने को मिलता है। इस पाठ्यक्रम से आपकी जो अपेक्षाएँ हैं उनको प्रशिक्षक शिक्षकों द्वारा पूर्ण करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। जब आप इस प्रशिक्षण को प्राप्त कर अपने छात्रों के बीच जाएँगे, तो उन्हें भी आपके अंदर एक नई ऊर्जा दिखाई देनी चाहिए।
यह भी पढ़ें-
पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक ने कहा कि इस प्रशिक्षण में आए हुए सभी अध्यापक इन बारह दिनों में अपने छात्र जीवन का पुनः अनुभव कर पाएँगे तथा पाठ्यक्रम के दौरान निरंतरता से कक्षा में उपस्थित होकर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का लाभ ले सकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि यह दौर ए. आई. (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का है। कृतिम बुद्धिमत्ता के दौर में ए. आई. के माध्यम से कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए आपको सभी प्रकार के माध्यमों से पढ़ना-पढ़ाना चाहिए। इस वैश्विक दौर में हिंदी के क्षेत्र में रोजगार की बहुत सारी संभावनाएँ हमारे सामने आईं हैं जिनके माध्यम से ज्ञानार्जन के साथ हम रोजगार भी प्राप्त कर सकते हैं।
डॉ. दीपेश व्यास ने कहा कि इन बारह दिनों के प्रशिक्षण में आपके अंदर के सभी कौशल विकसित होंगे तथा हिंदी साहित्य, व्याकरण, भाषा विज्ञान आदि पढ़ाने में जो भी समस्याएँ आप लोगों को आती हैं। वह सभी दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
इस कार्यक्रम का सफल संचालन शेख मस्तान वली ने किया। इस पाठ्यक्रम में वाशिम जिले के हिंदी अध्यापक मनीष दीक्षित, पुजा दत्तात्रय भोयर एवं अन्य हिंदी अध्यापकों ने पाठ्यक्रम से संबंधित अपेक्षाएँ व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में डॉ. एस. राधा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस पाठ्यक्रम में तकनीकी सहयोग सजग तिवारी और के. इंद्र ने दिया। अंत में राष्ट्रगान के साथ उद्घाटन समारोह संपन्न हुआ।
