ईडर (साबरकांठा) गुजरात : साबरकांठा जनपद की ईडर तहसील के मुडेटी गांव, जिसे “छोटी काशी” के नाम से जाना जाता है, में आज शनिवार को उस समय आध्यात्मिक और वैदिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला जब भगवान याज्ञवल्क्य वेद संस्कृत महाविद्यालय के नूतन संस्कुल का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ। त्रिदिवसीय आयोजन के अंतिम दिन यहां उपस्थित विद्वानों और संतों के बीच काशी की ज्ञान परंपरा का सजीव आभास हुआ।
यह समारोह अनंत श्री विभूषित पश्चिमाम्नाय द्वारिकापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज की दिव्य उपस्थिति में आयोजित हुआ, जबकि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और उद्घाटन किया।
संस्कृत के बिना इतिहास की समझ अधूरी: मुख्यमंत्री
अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, “संस्कृत भाषा को जाने बिना अपने इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों को समझना संभव नहीं है।” उन्होंने विश्वास जताया कि यह आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया संस्कुल विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान कर देश को उसके गौरवशाली अतीत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गुजरात सरकार संस्कृत भाषा के उत्थान और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
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गुरुकुल परंपरा ही संस्कारों की आधार शिला: शंकराचार्य
अध्यक्षीय वक्तव्य में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि गुरुकुल और पारंपरिक पाठशालाएं इसलिए आवश्यक हैं क्योंकि हमारे मूल ग्रंथ संस्कृत में हैं। उन्होंने आगे कहा, “जब तक भाषा का बोध नहीं होगा, तब तक उसके अर्थ और ज्ञान की गहराई को समझना संभव नहीं है।” उन्होंने इस क्षेत्र में लगभग 250 वर्ष पूर्व शुक्ल बंधुओं द्वारा बोए गए शिक्षा के बीज को आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में विकसित होते देखने पर संतोष व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य को स्मरण करते हुए “शिवोहम” का श्लोक भी प्रस्तुत किया और गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को रेखांकित किया।
काशी से जुड़ी ऐतिहासिक परंपरा
यहाँ पर यह उल्लेख करना आवश्यक है कि लगभग ढाई सौ वर्ष पूर्व काशी से आए ब्राह्मणों ने इस क्षेत्र में गांव बसाए और गुरुकुल परंपरा की नींव रखी। मुडेटी में बसे शुक्ल परिवार ने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा का जो दीप जलाया, वह आज एक विशाल संस्थान के रूप में विकसित हो चुका है।
विशिष्ट जनों की उपस्थिति
इस दौरान गुजरात की कई गणमान्य हस्तियों ने कार्यक्रम को संबोधित किया, इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष निरंजन अनंदतदेव शुक्ल, ट्रस्टी उदय माहुरकर, प्रवीण चन्द्र आचार्य,देवेन्द्र अनंदतदेव शुक्ल, राजेश अनंदतदेव शुक्ल, अश्वनि अनिरूद्ध शुक्ल, शैशव भाई पी देसाई, भरत भाई शुक्ल, उत्तम भाई दवे और विभिन्न राज्यों से आए हजारों लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया और आभार व्यक्त किया।
आध्यात्मिक ऊर्जा, वैदिक परंपरा और आधुनिक शिक्षा के संगम के साथ यह आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास और गरिमा के साथ संपन्न हुआ, जिसने मुडेटी को एक बार फिर “छोटी काशी” की पहचान के रुप में सशक्त किया।
