पाका हनमंतु एनकाउंटर के बाद एक बार फिर देवजी की चर्चा, जानें वजह और भी हैं बहुत कुछ…

माओवादी पार्टी सेंट्रल कमेटी के मेंबर उइके गणेश उर्फ पाका हनमंतू का ओडिशा के कंधमाल ज़िले में हुए एक एनकाउंटर में मौत हो गई। गणेश की मौत के बाद सेंट्रल कमेटी में माओवादी पार्टी का नेतृत्व करने वाले अब सिर्फ़ पाँच नेता बचे हैं। गणपति उर्फ मुप्पला लक्ष्मण राव, संग्राम उर्फ मल्ला राजिरेड्डी, देवजी उर्फ तिप्पिरी तिरुपति तेलंगाना से हैं, जबकि सागर उर्फ मिसिर बेस्रा, अनल दा उर्फ पतिराम मांझी बिहार और झारखंड से हैं।

जनवरी 2024 में ऑपरेशन कगार शुरू होने के बाद सचिव बसवराजू उर्फ नंबल्ला केशव राव और मिलिट्री चीफ़ हिडमा समेत कई सीसी मेंबर एनकाउंटर में मारे गए। जबकि सोनू उर्फ मल्लोजुला वेणु, आशन्ना उर्फ तक्केल्लपल्ली वासुदेव राव अपने साथियों को लेकर अपने हथियारों के साथ सरेंडर कर दिया। कुछ और माओवादी स्वयं ही सरेंडर कर दिया। कभी 20 से ज़्यादा सेंट्रल कमेटी के मेंबर और पांच पोलित ब्यूरो मेंबर के साथ एक ताकतवर माओवादी का नेतृत्व अब सिर्फ़ पांच मेंबर की एक कमजोर कमेटी रह गई है।

इन पांच सीसी मेंबर्स में से गणपति इंटरनेशनल मामले देख रहा है अर्थात वह भारत के नेतृत्व के फील्ड में नहीं है। गुप्तचर विभाग को शक है कि वह देश के किसी शहरी इलाके या विदेश में छिपा है। उनका कहना है कि अपनी उम्र की वजह से संग्राम भी बाहर ही रह सकता है। अब बिहार और झारखंड के मिसिर बेस्रा और अनल दा 50 साल के हैं। वे अपने राज्यों के आंदोलन तक ही सीमित हैं। पुलिस का यह भी मानना ​​है कि भविष्य में उनके वहां से बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि वहां पर भी कड़ी पाबंदियां जारी हैं और एनकाउंटर हो रहे हैं।

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इन हालात में दंडकारण्यम, एओबी (आंध्र-ओडिशा बॉर्डर), सीओबी (छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर), एमसी (महाराष्ट्र – मध्य प्रदेश – छत्तीसगढ़), तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों के क्रांतिकारी मूवमेंट को लीड करने के लिए इस समय सेंट्रल कमेटी के मेंबर और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के चीफ सिर्फ देवजी बचे हैं बचे हैं। सोनू और आशन्ना की सरेंडर पॉलिसी का विरोध करने वाले माओवादी पार्टी का देवजी नेता है। इसीलिए उस पर सेंट्रल और स्टेट फोर्स उस पर फोकस कर रही हैं। विजयवाड़ा में गिरफ्तार माओवादियों में देवजी के गार्ड भी शामिल थे। इसलिए इस बात का ज़ोरदार प्रचार हुआ कि पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार किया है। नागरिक अधिकार संघों ने नेता हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। हालांकि, बाद में माओवादी पार्टी के बयानों से पता चला कि वह सुरक्षित हैं और दंडकारण्य में हैं।

देवजी को पता चल गया है कि हाई-लेवल पर उसकी तलाश जारी है। इसलिए वह पुलिस को अपनी भनक भी नहीं लगने दे रहा है। अपनी गिरफ्तारी को लेकर इतना प्रचार होने पर भी तथा सोनू और आशन्ना की ओर से पार्टी की लाइन (सिंद्धांत) की अनेक प्रकार की आलोचना करने के बावजूद देवजी ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। माना जा रहा है कि सिक्योरिटी फोर्स को उम्मीद है कि यदि देवजी कोई प्रतिक्रिया देते है तो उसे तुरंत ढूंढ लिया जाएगा। अब ताजा पाका हनमंतु एनकाउंटर के बाद एक बार फिर हर क्षेत्रों में देवजी की चर्चा हो रही है।

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