सूत्रधार साहित्यिक संस्था का फाल्गुन महोत्सव में आपकी रचनाओं ने मचाई धूम, आप भी पढ़ें एक बार

हैदराबाद (सरिता सुराणा की रिपोर्ट) : सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, हैदराबाद, भारत द्वारा फाल्गुन महोत्सव का ऑनलाइन आयोजन किया गया। संस्थापिका सरिता सुराणा ने कहा कि यह हमारे लिए बहुत ही गर्व और प्रसन्नता की बात है कि इस समय हम अपनी 75 वीं मासिक गोष्ठी आयोजित कर रहे हैं। संस्था अपने प्रगति पथ पर अग्रसर है और आप सभी सदस्य गण इसके सहभागी और साक्षी रहे हैं। उन्होंने उपस्थित सभी सदस्यों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया और वरिष्ठ लेखिका भावना पुरोहित को काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता करने हेतु वर्चुअल मंच पर सादर आमंत्रित किया।

सस्मिता नायक ने बहुत ही मधुर स्वर में सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की। तत्पश्चात् सरिता सुराणा ने संस्था द्वारा आयोजित अब तक के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि हमने अब तक 10 बड़े ऑफलाइन और 400 से अधिक ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किए हैं। जिनमें संस्था का उद्घाटन समारोह, पुस्तक लोकार्पण समारोह, सम्मान समारोह, वार्षिकोत्सव समारोह, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष कार्यक्रम ‘गार्गी सम्मान समारोह’, हिन्दी दिवस पर परिचर्चा कार्यक्रम, विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में कविता प्रतियोगिता और निबन्ध प्रतियोगिताओं का आयोजन, सरकारी विद्यालयों में निःशुल्क हिन्दी सुलेख माला पुस्तकों का वितरण, जरूरतमंद बच्चों को शैक्षिक सहायता आदि शामिल हैं।

काव्य गोष्ठी का आरम्भ श्रीया धपोला की कविता- तुम्हें खुद ही संभलना होगा से हुआ। तत्पश्चात् कटक, उड़ीसा से रिमझिम झा, बिहार से पिंकी मिश्रा, कोलकाता से सुशीला चनानी ने होली खेल रहे नंदलाल जैसी रचनाएं प्रस्तुत करके होली गीतों का समां बांध दिया। हैदराबाद से सादर अमिता श्रीवास्तव ने आध्यात्मिक भावों से परिपूर्ण रचना प्रस्तुत की तो अशोक दोशी ने होली पर बहुत ही शानदार गीत प्रस्तुत किया। मुम्बई से नवल किशोर अग्रवाल ने – बुरी लत त्यागें/अपने अंदर झांकें जैसी सशक्त रचना का पाठ किया।

यह भी पढ़ें-

सस्मिता नायक ने ओड़िया भाषा में- आसीची-आसीची होली जैसे शानदार गीत की प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। दर्शन सिंह ने पंजाबी भाषा में अपनी रचना प्रस्तुत की। हर्षलता दुधोड़िया ने मनमोहक लांगुरिया गीत इस अंदाज में प्रस्तुत किया कि सब वाह-वाह कह उठे। सरिता सुराणा ने मीराबाई के भजन- होली खेलत है गिरधारी की सस्वर प्रस्तुति दी। तृप्ति मिश्रा ने बहुत ही कुशलतापूर्वक गोष्ठी का संचालन किया और अपनी रचना की शानदार प्रस्तुति दी।

अध्यक्षीय उद्बोधन में भावना पुरोहित ने सभी सहभागियों की रचनाओं की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और अपनी रचना- होली पर बरसात/नीले आसमान में/इंद्रधनुषी रंगों की पिचकारी/हरि और हर का खेल का पाठ किया। गोष्ठी में किरन सिंह ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बहुत ही उल्लासपूर्ण वातावरण में गोष्ठी सम्पन्न हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

Recent Comments

    Archives

    Categories

    Meta

    'तेलंगाना समाचार' में आपके विज्ञापन के लिए संपर्क करें

    X