हैदराबाद : काव्य-धारा साहित्यिक समूह व काव्य-धारा प्रकाशन का आठवां वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन श्री मध्य भारत हिंदी सेवा समिति, इंदौर के सभागार में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्र की अध्यक्षता डॉ राजीव शर्मा ने की। मुख्य अतिथि अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर और चित्रकार विज्ञान व्रत रहे। विशेष अतिथि के पद पर मध्य प्रदेश के सुप्रतिष्ठित साहित्यकार हरे राम बाजपेई एवं विजय बागरी और गीत ऋषि श्याम मनोहर सीरोठीया सम्माननित अतिथि के रूप में भाग लिया।
कार्यक्रम का आरम्भ राजस्थान से पधारी कवित्री पायल शर्मा एवं रश्मि शर्मा के मधुर कंठ से हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन हैदराबाद की लेखिका कवित्री गीता अग्रवाल (संयोजिका) और रचना चतुर्वेदी ने किया। काव्य-धारा की अध्यक्षा सुनीता लुल्ला ने सभी मंचस्थ अतिथियों एवं अनेक राज्यों से आए हुए कवियों एवं स्थानीय प्रबुद्ध जनों का स्वागत किया। सभी अतिथियों को शॉल,माला और स्मृति चिह्न भेंट करके सम्मान किया गया। इसी कड़ी में काव्य धारा के संपादक मंडल सत्य प्रसन्न, ब्रजेश शर्मा, डॉ भागिया ख़ामोश और सुनीता लुल्ला का भी यथावत् स्वागत व सम्मान किया गया। सभी आए हुए अतिथियों का का परिचय काव्यधारा के साथियों द्वारा कराया गया।
स्वागत समापन के सम्पन्न होते ही काव्यधारा प्रकाशन के वार्षिक साझा संकलन ‘किसलय’ एवं ‘मनीषा’ के साथ आठ और पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। जिसमें विज्ञान व्रत (नोएडा) ‘सामने है आइना’, डॉ. रागिनी शर्मा की ‘नित्यश्री’, तत्पश्चात गीता अग्रवाल( हैदराबाद) की ‘काव्य तरणि’ पायल शर्मा (डूंगरपुर, राजस्थान) की ‘तर्पण’, रश्मि शर्मा (उदयपुर, राजस्थान) की ‘निशिगंधा’, डॉ. संजीव धानुका (कोलकाता) की ‘छोटे-छोटे डग’, मंजू राठी ‘मनन का कथन’, मनोरमा शर्मा ‘मनु'( हैदराबाद) ‘दरख्तों के साए में’ एकल संग्रह का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण करतल ध्वनि के मध्य हुआ।
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साझा संकलन के विषय में अपने विचार व्यक्त करते हुए सत्य प्रसन्न, ब्रजेश शर्मा, डॉ ख़ामोश और सुनीता लुल्ला ने संपादन के विभिन्न प्रकल्पों के बारे में जानकारी भी दी। इस दौरान साझा-संकलन में सम्मिलित सभी कवियों को शॉल, माला और स्मृति चिह्न भेंट किए गए। काव्य का प्रथम सत्र शुभारंभ हुआ। जिसका सफल संचालन युवा कवि अभिजीत पाठक (दिल्ली) एवं बृजेश शर्मा द्वारा किया गया। प्रथम सत्र का धन्यवाद ज्ञापन साझा संकलन के सह संपादक ब्रजेश शर्मा द्वारा प्रेषित किया गया।
द्वितीय सत्र में स्थानीय एवं विभिन्न प्रांतो से आए हुए कवियों ने अपनी रचनाओं से सभागार मधुर स्वर से गूँज उठा। इसमें विकास जोशी ‘वाहिद’, अंकित शुक्ला, डॉ. ऋता शुक्ला, डॉ रवि बंसल, रचना चतुर्वेदी, जय कृष्ण चांडक, गीता अग्रवाल, के पी अग्रवाल, अभिजीत पाठक, मनोरमा शर्मा, ‘मनु’, डॉ. रागिनी शर्मा, विनीता श्रीवास्तव, अनिल कुमार मिश्र ‘उमरिया’, दर्शन लीलानी, भारतीय आशुदानी, ताराचंद लालवानी, लखन डेहरिया, प्रदीप भट्ट (मेरठ), कैलाश सोनी ‘सार्थक’, पायल शर्मा, हेमंत बोर्डिया, विज्ञान व्रत, बृजेश त्रिवेदी, विजय बागरी, ब्रजेश शर्मा, सुनीता लुल्ला, सत्य प्रसन्न, डॉ भागिया ख़ामोश,इत्यादि ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियाँ दी। काव्य पाठ का अंत सुदीर्घ काव्य पाठ सुनीता लुल्ला, तालियों की गड़गड़ाहट के साथ संपन्न हुआ ।
डॉ राजीव शर्मा ने अध्यक्षीय वक्तव्य में साझा संकलनों की उपयोगिता और इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन की गरिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन साहित्य चेतना के लिए समृद्ध धारक हैं। विशेष अतिथि हरे राम बाजपेई ने सभी कवियों के उत्साह का अभिनंदन करते हुए प्रकाशित पुस्तकों और कवियों के साहित्य समर्पण की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रागिनी शर्मा व सुनीता लुल्ला ने अत्यंत भावुक मन से अभ्यर्थना भाव से प्रस्तुत किया। विजय बागरी ‘ विजय’ विज्ञान व्रत की गरिमामय उपस्थिति को असंख्य धन्यवाद दिया गया। यह दायरा अनेक प्रांतों से आये कवियों के बीच ही समाप्त नहीं हुआ, बल्कि काव्यधारा टीम अनेकानेक कवियों के योगदान, प्रकाशन में सहयोग कर्मियों को धन्यवाद दिया।
