बाल उपन्यास ‘जादूगर’ लोकार्पित, वक्ताओं ने बताई गुदगुदी करने वाली यह बात

हैदराबाद : उपन्यासकार, कथाकार एवं कवि रवि वैद के बाल-उपन्यास ‘जादूगर’ का लोकार्पण कार्यक्रम पायनियर इंस्टीट्यूट ऑफ़ होटल मैनेजमेंट में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के पूर्व आचार्य डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने की। विवेकवर्धिनी महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य डॉ. रेखा शर्मा मुख्य अतिथि रहीं और मुख्य वक्तव्य अलीना खल्गाथ्यान (आर्मेनिय्या) ने दिया।

कवि और साहित्यकार प्रवीण प्रणव ने ‘जादूगर’ की सांगोपांग समीक्षा कर इसे ‘रामचरित मानस’ के कई प्रसंगों के साथ जोड़ा। डॉ. आशा मिश्रा मुक्ता, एफ. एम. सलीम और उड़ीसा स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी (संबलपुर, उड़ीसा) से पधारे डॉ. जितेंद्र मौर्य ने लोकार्पित पुस्तक के कथ्य और शिल्प पर विचार व्यक्त किए। डॉ. मंजु शर्मा और डॉ. रक्षा मेहता ने अपनी टिप्पणी सहित रोचक अंशों का वाचन किया। चिरेक इंटरनेशनल स्कूल के कक्षा 11 के छात्रों अनिका दुग्गर और देव अग्रवाल की सधी पाठकीय समीक्षा और जिज्ञासाओं ने सबका दिल जीत लिया।

सभी वक्ताओं का यही मत था कि इस बाल उपन्यास को पढ़ते हुए वे अपने बचपन में लौट गए थे। उन्हें अपने बचपन में पढ़ी बाल पुस्तकें और चंदा मामा, नंदन जैसी बाल पत्रिकाएँ याद आ गईं। ‘जादूगर’ की कहानी हर आयु के पाठक को आकर्षित करती है, ऐसा सब का विचार था। इस कहानी में नैतिक मूल्यों और भारतीय परंपराओं के अनेक उदाहरण हैं। यह बाल उपन्यास मनोरंजन के साथ-साथ आज की पीढ़ी – जो मोबाइल और इंटरनेट में खो चुकी है – को पुन: अपने दायित्व और जीवन मूल्यों का बोध कराती है।

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अवसर पर मोहिनी गुप्ता, मोनिका भट्ट, रोशनी वैद, अरविंद शर्मा, डॉ. राजश्री दुगड़, डॉ. बी. बालाजी, प्रियंका पांडे, सुभाष पाठक और डॉ. पूर्णिमा शर्मा ने लेखक को शुभकामनाएँ दीं। रवि वैद ने अपनी भावी योजनाओं और भारत-पाकिस्तान पर आने वाले उपन्यास के बारे में अपने विचारों से अवगत कराते हुए सबका धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन कवयित्री शिल्पी भटनागर ने बहुत रोचक ढंग से किया।

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