बिहार समाज सेवा संघ ने डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी की जयंती पर किया माल्यार्पण और ऐसे किया याद

हैदराबाद: बिहार समाज सेवा संघ ने भारत रत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी की 139वीं जयंती मनाई। संघ के पदाधिकारियों ने इस संदर्भ में चादरघाट चौराहे पर डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी का प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित की। इस अवसर पर बिहार समाज सेवा संघ राष्ट्रीय चेयरमैन राजू ओझा, अध्यक्ष मनीष तिवारी, सचिव विकास सिंह, कोषाध्यक्ष राधेश्याम प्रजापति, सांस्कृतिक संयोजक दीपक तिवारी, पूर्व अध्यक्ष एवम वरिष्ठ सदस्य पप्पू सिन्हा और अन्य संगठनों के लोग भी उपस्थित थे।

इस दौरान संघ के राष्ट्रीय चेयरमैन राजू ओझा ने कहा कि राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सीवान जिला के जिरादेई गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम महादेव सहाय श्रीवास्तव और माता का नाम कमलेश्वरी देवी थे। राजेंद्र प्रसाद भारत के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए हैं। 1962 में राजेंद्र प्रसाद को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। बिहार समाज सेवा संघ हैदराबाद के अध्यक्ष मनीष तिवारी ने कहा कि डॉ राजेंद्र प्रसाद जी की भाषा-शैली सरल, सहज और सुबोध खड़ीबोली थी। इनकी भाषा व्यावहारिक थी, जिसमे अन्य भाषाओ संस्कृत अंग्रेजी और उर्दू आदि भाषाओं का नियमित तौर पर मिश्रण था। साहित्यिक और भाषण इनकी दो मुख्य शैली के होती थी।

बिहार समाज सेवा संघ के सचिव विकास सिंह ने कहा उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज सन 1902 में दाखिला लिया 1915 में उन्होंने स्वर्ण पद के साथ विधि पर स्नातक की परीक्षा पास की। इसके बाद डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनका पदार्पण वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत करते ही हो गया। समाज के कोषाध्यक्ष राधेश्याम प्रजापति ने बताया कि आधुनिक भारत के इतिहास में कई महापुरुष पैदा हुए जिन्होंने न केवल भारत को आजादी दिलाई बल्कि आजादी के उपरांत उन्होंने भारत के निर्माण में भी अपना सक्रिय योगदान दिया। ऐसे ही महापुरुषों में से एक डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद थे जिन्होंने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया बल्कि स्वतंत्रता उपरांत भी भारत के पुनर्निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दिया।

सांस्कृतिक संयोजक दीपक तिवारी के अनुसार गांधीवादी विचारधारा एवं आदर्शों को मानने वाले डॉ राजेंद्र प्रसाद का व्यक्तित्व नम्रता, सरलता और सादगी से धनी था जिसके कारण उन्हें जो प्रतिष्ठा प्राप्त थी वह बहुत कम लोगों को प्राप्त होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वतंत्र भारत के राष्ट्रपति पद पर नियुक्त होने के बाद भी उन्होंने कभी भी इन गुणों का त्याग नहीं किया। आज डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के जयंती विशेष पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ घटनाओं को जानने का हम सभी भारतीय करते हैं।

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