सुपर अल नीनो पर ‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब’ का खतरनाक खुलासा, दुनिया भर में हो सकती हैं लाखों मौतें, जानें भारत-पाकिस्तान पर असर

नई दिल्ली: प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के पास के इलाकों में बने सुपर अल नीनो हालातों से दुनिया भर में गर्मी की तपिश बेहिसाब बढ़ने वाली है। साथ ही लाखों लोगों के मरने का खतरा है। एक प्रसिद्ध रिसर्चर्स ने यह चेतावनी दी है। ‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब रिसर्च’ संस्था के विशेषज्ञों ने अंदाजा लगाया है हर साल गर्मी की तीव्रता से होने वाली मौतों के अलावा इस बार 4,51,000 लोगों के मरने का खतरा है। भारत में करीब 15,800 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।

इसी क्रम में सुपर अल नीनो के कारण अलग-अलग इलाकों पर पड़ने वाले असर, होने वाली अतिरिक्त मौतों का अंदाजा लगाते हुए संस्था ने एक रिपोर्ट जारी की है। आपको बता दें कि क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब दुनिया भर में लोगों, अर्थव्यवस्थाओं, समुदायों को जलवायु परिवर्तन, चरम मौसम हालात कैसे प्रभावित करते हैं, इस विषय पर अध्ययन करती है। मौजूदा रिपोर्ट तैयार करने के लिए 1996 से 2025 तक अलग-अलग देशों में हर साल गर्मी की तीव्रता से होने वाली औसत मौतों को देखा गया। बाद में सुपर अल नीनो के असर से इन औसत मौतों के अलावा कितनी मौतें हो सकती हैं, इसका अंदाजा लगाया।

सुपर अल नीनो का असर ग्लोबल साउथ देशों में ही सबसे ज्यादा होगा। रिसर्चर्स ने कहा है कि इन देशों में ही सबसे ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज हो सकती हैं। अंदाजा लगाया गया है कि अकेले साहेल (सहारा रेगिस्तान के नीचे) इलाके में ही 66,800 अतिरिक्त तापमान संबंधी मौतें हो सकती हैं। उसके बाद नाइजीरिया में 31,400, सूडान में 17,500, नाइजर में 10,000, चाड में 8,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज हो सकती हैं। वैसे ही, दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया देशों में मिलाकर 19,400 और इंडोनेशिया में 19,300 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। इनके बाद भारत में 15,800 और ब्राजील में 13,300 अतिरिक्त मौतें दर्ज हो सकती हैं, ऐसा बताया।

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अंदाजा लगाया है कि भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में फरवरी के बाद गर्मियों तक तापमान संबंधी मौतें लगातार होती रह सकती हैं। ‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब’ ने कहा कि संबंधित देशों की सरकारें पहले से अलर्ट होकर टेम्परेचर वार्निंग, कूलिंग सेंटर, पीने के पानी की सुविधा, बाहर काम करने वाले मजदूरों को सुरक्षा और मेडिकल सुविधाओं को मजबूत करने जैसे कदम उठाने के लिए अपने अंदाजे मदद करेंगे। विश्व मौसम संगठन (WMO) ने इस महीने की 3 तारीख को बताया कि अल नीनो अभी अपने पीक पर नहीं पहुंचा है। अंदाजा लगा रहे हैं कि यह और मजबूत होगा। नवंबर से दिसंबर के बीच यह पीक पर पहुंच सकता है। साथ ही स्पष्ट किया कि यह फरवरी 2027 तक करीब 100 प्रतिशत जारी रहने की संभावना है।

अमेरिका की नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के हालिया अंदाजे के मुताबिक प्रशांत समुद्र के मध्य इलाके में सतह के तापमान सामान्य से 1.8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हैं। पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत इलाके में 3 डिग्री से ज्यादा का अंतर दिखा है। संस्था ने बताया कि इसलिए इस अल नीनो के मजबूत होने की संभावना 90 प्रतिशत से ज्यादा है।

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