लेखर्षभाचार्य (विद्या मार्तण्ड) का जन्म नाम आचार्य आशीष पाण्डेय है। इनका जन्म 12-7-200 को उत्तर प्रदेश सुल्तानपुर जिले के परसड़ा नामक ग्राम में हुआ इनके पिता का नाम शेर बहादुर पाण्डेय है। आचार्य ने अपनी शिक्षआ परमहंस संस्कृत महाविद्यालय टीकर माफी अमेठी से पूर्ण किया तथा वैयाकरणराद्धान्तमञ्जूषा, निर्मला व्याकरणामृत (संस्कृत सूत्रबद्ध हिन्दी व्याकरण), काव्य प्रभेदिका (काव्य की आत्मा अक्षर का सिद्धांत) बृहच्छन्दकुसुमाकर (छन्द के लगभग छह सौ नये नियम) परमहंस संहिता (भागगवत महापुराण- रामचरितमानस सदृश) पुस्तक की रचना किया। अभी यह नये संविधान’ सार्वभौम संविधान’ की रचना करने में तत्पर हैं इनका कहना है कि श्रेष्ठ आचार्यों, अधिकारियों, न्यायाधीशों, सुप्रसिद्ध अध्यापकों और कुछ नेताओं की मदद से यह एक नया संविधान बनायेगे। अभी आचार्य जी ने 80 पृष्ठ संविधान के नियमों की रचना कर चुके हैं। वे इसे भारत सरकार को सौंपना चाहते हैं। इस पर पाठकों की प्रतिक्रिया अपेक्षित है।
‘सार्वभौम संविधान’
भारतीय संविधान ने समानता का संकल्प करके असमानता की गूढ़ नीति अपनाई है जिसके चलते भारत के हर नागरिक को किसी न किसी प्रकार हानि का सामना करना पड़ रहा है भारतीय नागरिकों में निरन्तर संविधान के प्रति आरक्षण, निर्माता, रोजगार, वेतन, निवास, भूमि आदि के विवाद को देखते हुए लेखर्षभाचार्य विद्या मार्तण्ड ने एक नये संविधान ‘सार्वभौम संविधान’ की रचना करने का संकल्प किया है जिसमें वे कुछ दिनों से लेखन कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है वे भारत के श्रेष्ठ आचार्यों, सुप्रसिद्ध अध्यापकों, अधिकारियों और कुछ वरिष्ठ नेताओं आदि की सहायता भी लेगें यदि वे लोग अपना विचार देना चाहेंगे।
विद्या मार्तण्ड ने बताया कि वे अपने संविधान में पूर्ण समानता देते हुए भारत के हर नागरिक को यथोचित सुविधा, रोजगार, वेतन देने का नियम बना रहे हैं। भारत सरकार को बिना किसी प्रकार की हानि पहुचाये संविधान के नियमों द्वारा उत्तरोत्तर उन्नति प्रदान करायेंगे। शिक्षा के लिए नियम बनाते हुए उन्होंने कहा है कि विद्यार्थियों को पूर्ण रुप से बत्तीस वर्ष तक निशुल्क शिक्षा,भोजन आदि प्रदान किया जायेगा। तथा शिक्षा के साथ अस्त्र शस्त्र, यन्त्र, चिकित्सा आदि का प्रत्यक्ष उदाहरणात्मक शिक्षण सभी विद्यार्थियों को कक्षा नव से दिया जाने लगेगा। तक्षशिला जैसे महान विश्वविद्यालय भारत के चारों दिशाओं में महिला पुरुष के लिए अलग अलग दो- दो होगें तथा उनकी शाखाएँ राज्यों के मध्य सुव्यवस्थित की जायेंगी। विद्यालय का निर्माण कोई भी कराये किन्तु उसकी व्यवस्था भारत सरकार देखेगी। किस प्रदेश में, किस जनपद में कितने महाविद्यालय, माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय होगें इसका भी उन्होंने नियम बनाया।

समस्त महाविद्यालय, माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य पद पर सेवा निवृत्त आई ए एस, पी सी एस अधिकारी होगें। जो शिक्षा को प्रारम्भ से ही बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे। उनका उन्हें वेतन दिया जायेगा। विद्यालयों के पास बाजार की दूरी, गावों के किनारे प्रशिक्षण केन्द्र, गांवों के किनारे उसकी सुन्दरता के लिए सुन्दर वृक्ष होने चाहिए। गांवों के हर एक बुजुर्ग को यथायोग्य भारत सरकार गांवों में रोजगार देगी जैसे – गांवों की सड़कों को बुहारना, फूलों को सींचना, लगाना, गावों में सरकारी जमीन पर बने खेल मैदान, उपवन आदि को स्वच्छ करना आदि।
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गांवों में बिखरी हुई सरकारी जमीनों को एकत्रित करके उस पर लेखपाल की देखरेख में फसलों को उगाना आदि कार्य किये जायेंगे। इस संविधान के नियम के द्वारा भारत से भूमि विवाद सर्वदा के लिए समाप्त हो जायेगा। सड़कों के किनारे रहने वालों नागरिकों के मकान और सड़क की दूरी, उनके कार्य तथा उनके लाभ के बारे में सुन्दर व्यवस्था बताई गयी है।
रोजगार युत पति पत्नी को एक ही जिले में सेवा कार्य दिया जायेगा यदि पद एक हैं और वह पद जिले में अन्य और नहीं हो सकता तो जिले के निकट जिले में उनकी इच्छा के अनुसार सेवा कार्य दिया जायेगा। अधिवक्ताओं की व्यवस्था उनके अधिकार और कार्य तथा वेतन लाभ की व्यवस्था के साथ न्यायालय और न्यायाधीशों के अधिकार और स्वतंत्रता तथा संख्या के उत्तम नियम हैं। नेताओं के लिए एक अलग न्यायालय होगा जहाँ केवल उन्हीं के अपराध की सुनवाई सार्वजनिक रूप से होगी। इनके लिए न्यायाधीश कौन होगा। उसके अधिकार, कार्य क्या होगे इसका भी नियम है।
राष्ट्रपति से लेकर अन्य नेता आदि के पास क्या योग्यता होनी चाहिए किस पद के लिए क्या आयु होनी चाहिए तथा उनके अपराध के प्रति दण्ड क्या होने चाहिए इसका भी नियम बहुत सुन्दर बनाया गया है। किन्नर समाज को सैन्य शक्ति में स्थान देकर महिला पुरुष में होने वाले विवाद की सुनवाई आदि उन्हीं के द्वारा कराई जानी चाहिए। भारत की अर्थ व्यवस्था किस प्रकार बिना जनता को पीड़ा पहुचाये सर्वोपरि होगी यह उसमें वर्णित है। शंकराचार्य, मन्दिर आदि के कार्य, व्यवस्था अधिकार आदि उसमें बताया गया है।
दण्ड नीति में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था, उनके अपराध दण्ड, और उनकी स्वतंत्रता के बारे में भारतीय संविधान से अलग और उत्तम नियम हैं। उनके विचार में तिरंगे में हम माँ भारती की छवि देखकर उसे नमन करते हैं इसलिए तिरंगे के मध्य माँ भारती का चित्र होना चाहिए और अशोक चक्र उनकी नाभि के रूप में होना चाहिए। भारत के हर व्यक्ति को रोजगार देने के लिए सरकार बाध्य होगी। जनपद में बाजार नीति क्या होगी इसका भी उत्तम नियम उसमें बनाया गया है।
भारत पूरी तरह भिक्षुक मुक्त होगा। वेश्यालयों को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया जायेगा। उसमें प्राप्त महिलाओं को उनके घर भेजा जायेगा यदि वह स्वीकार नहीं करते हैं तो उनसे जो विवाह करना चाहे कर सकता है अथवा भारत सरकार उनके लिए एक अलग से रोजगार व्यवस्था करेगी जब तक उनका जीवन शेष है उसके बाद भारत में कोई वेश्यालय नहीं होगा। बच्चियों के अपहरण, रेप के दण्ड में मृत्यु दण्ड नहीं अपितु मृत्यु से भी कठिन दण्ड नीति होगी।
विदेश में यात्रा करने वाले नेता आदि के लिए क्या नियम होगें इसका भी प्रावधान उसमें है। विद्या मार्तण्ड का यह संकल्प है कि किसी भी प्रकार भारत सरकार की बिना किसी हानि के वे अपने नियम के माध्यम से भारत के हर नागरिक को सुखी करेंगे। चिकित्सा व्यवस्था किस तरह होनी चाहिए इसका उसमें सर्वोत्तम नियम है। मुख्यमंत्री आदि के गुप्त अधिकारी होंगे उनके अधिकार, कार्य आदि का वर्णन उसमें है। अधिकतर होने वाले सामान्य विवाद को किस तरह निकट थानाध्यक्ष आदि के द्वारा समाप्त किया जायेगा बिना किसी के प्रति पक्षपात के यह नियम भी इसमें विद्यमान हैं। न्यायालय में अपराध की सुनवाई की क्या सीमा होगी इसका भी वर्णन उसमें हैं। पत्रकारों के अधिकार, सरकार से उनकी सहयोग व्यवस्था का वह वर्णन है जिसके माध्यम से वे भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने में सहयोगी होगे।
भारत को केवल मुख से ही नहीं अपितु सारा विश्व अपने देश के संविधान में विश्व गुरु कहेगा। हम विदेशों से बिना किसी हानि के धनार्जन कैसे करेगें इसका भी नियम उसमें है। पूर्णतः संविधान के नियमों को यहाँ बताना सम्भव नहीं हो सकेगा इसलिए उसके कुछ अंश संक्षेप में यहाँ बताये गये हैं। सार्वभौम संविधान’ के द्वारा भारत को पुनः अखण्ड भारत, सोने की चिड़िया और लिखित रूप में विश्वगुरु बनाने का संकल्प ‘लेखर्षभाचार्य विद्या मार्तण्ड’ कर चुके हैं। उनका विचार है कि यह संविधान भारत सरकार के यशस्वी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री आदि तक पहुंचे और इस पर विचार करके स्वीकार किया जाये।

पुस्तक के लेखक लेखर्षभाचार्य (विद्या मार्तण्ड) का मोबाइल नंबर- 7007874232
