हैदराबाद : एमएलसी के कविता ने कहा कि यह अत्यंत खेद की बाद है कि देश में जाति के नाम पर भेदभाव की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति अभी भी मौजूद है। एमएलसी ने उदाहरण देकर बताया कि राजस्थान में एक विपक्षी नेता एक बार मंदिर में देवी के दर्शन करने गया। इसके बाद वेद पंडितों ने मंदिर को मलीन के हो जाने की बात कहकर संप्रोक्षण कर दिया।
कविता ने आगे कहा कि हमारे तेलंगाना के बांसवाड़ा क्षेत्र में एक चाय की दुकान पर अब भी दो गिलास वाली व्यवस्था लागू है। केवल यही नहीं, मंदिर में सामूहिक भोजन करने के बाद मंदिर को दूध से शुद्ध करने की घटनाएं भी अनेक हैं। कविता ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व केवल शब्दों तक ही सीमित हैं। अब हमें इन्हें आचारण में प्रदर्शित करने की आवश्यकता है।
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