हैदराबाद: आंध्र प्रदेश महेश को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक पर हुए साइबर हमले के मामले की साइबर क्राइम पुलिस गहराई से जांच कर रही है। मुख्य रूप से बेंगलुरु और दिल्ली शहरों में नाइजीरियन के नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित किया। पता चला कि बैंकों में खाता रखने वालों का चयन करने और पैसा जमा होते ही उनसे नकदी निकालने के लिए नाइजीरियन को चुना गया।
आशंका जताई जा रही है कि इन्हीं के जरिए मुख्य आरोपी के पास रकम चली गई। पुलिस जब मामले की जांच के लिए दिल्ली और बेंगलुरू गई तो नाइजीरियन लाखों रुपए नकद लेकर फरार हो गये थे। इसके साथ ही दो टीमें इन्हें पकड़ने की फिराक में हैं।
साइबर क्राइम पुलिस को आशंका जताई है कि नाइजीरिन वर्चुअल अकाउंट के जरिए महेश बैंक से 12.90 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों ने इसे 128 खातों में जमा किया। पुलिस ने अब तक 14 लोगों को उनके नाम और पते के आधार पर गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बाकी बचे अधिकांश राशि जमा किये गये खातों की जांच की। पते ठीक नहीं होने के कारण उन्हें पकड़ना मुश्किल हो गया।
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पुलिस ने जांच में पाया कि मुख्य आरोपियों ने बैंक की विभिन्न शाखाओं में खाता खोलने के लिए नाइजीरिन की मदद ली है। आरोपी कभी-कभी इनसे सेलफोन पर बात करते थे। उन नंबरों के माध्यम से विवरण इकट्ठा करने का प्रयास किया गया तो पता चला कि सभी विवरण झूठे और नकली पते हैं।
इसके अलावा नाइजीरियन कुछ स्थानों पर हॉटस्पॉट का उपयोग किया और वह झूठे मेल और आईपी पते दिखाई दिये। इसके चलते एथिकल हैकर्स द्वारा उस समय में किसने उपयोग किया है इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
