सुप्रीम कोर्ट में तेलंगाना सरकार की बड़ी जीत, करोड़ों की संपत्ति पर अधिकार, जानिए असली कहानी

हैदराबाद : तेलंगाना सरकार की सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत हुई है। हाईटेक सिटी के पास माणिकोंडा जागीर जमीन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है। इससे सरकार को हजारों करोड़ रुपये की 1,654 एकड़ जमीन का अधिकार मिल गया। मणिकोंडा जागीर की जमीन को लेकर तेलंगाना सरकार और वक्फ बोर्ड के बीच कई सालों से विवाद चल रहा है। मामला 2016 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। तब से मुकदमा चल रहा है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया कि जमीन का पूरा अधिकार तेलंगाना सरकार का है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद के संबंध में 3 अप्रैल 2012 को वक्फ बोर्ड के पक्ष में उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द कर दिया। जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए सरकार के पक्ष में 156 पेज का फैसला सुनाया। अगर यह मामला तेलंगाना सरकार हार जाती है तो वक्फ बोर्ड को मुआवजे के रूप में एकमुश्त 50,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता था। ऐसा इसलिए कि सरकार वक्फ बोर्ड पर मुकदमा करते समय कानूनी लड़ाई हार जाती है तो वह मुआवजा देगी।

ये है असली कहानी

वक्फ बोर्ड द्वारा 2006 में जारी इर्राटा अधिसूचना में दरगाह हजरत हुसैन शाह वली के लिए कुल 1,654 एकड़ की घोषणा की गई थी, जो विवादास्पद हो गई है। हालांकि, सरकार तर्क देती रही है कि दरगाह को केवल एक एकड़ जमीन है। इनमें से कुछ भूमि आईएसबी को संयुक्त आंध्र प्रदेश में 2001 में आईएसबी को और 2004 के बाद एमआर प्रॉपर्टीज सहित अन्य कंपनियों को आवंटित की ही थी। इस जमीन को राजस्व भूमि मानते हुए सरकार ने आईटी कंपनियों, व्यवसायों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बेचना या आवंटित किया है।

हालांकि वक्फ बोर्ड ने कहा कि वह जमीन दरगाह की है। वह जमीन दुरगाह हजरत हुसैन वली को लगभग 150 साल पहले प्रदान की है। वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल ने भी इस तर्क का समर्थन किया था। इस संबंध में संयुक्त आंध्र प्रदेश सरकार और वक्फ बोर्ड के बीच हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसी क्रम में हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाया। तेलंगाना राज्य के गठन के बाद राज्य सरकार ने 2016 में उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। लंबे समय से इस मामले की सुनवाई कर रही शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया है कि जमीन के सभी अधिकार तेलंगाना सरकार के हैं।

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