हैदराबाद: कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में रविवार को डॉ ऋषभदेव शर्मा की अध्यक्षता में मदनबाई क़ीमती सभागार रामकोट में क्लब की 375वीं मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता डॉ रिज़वान बाशा (राजभाषा प्रबंधक HPCL), अध्यक्ष डॉ ऋषभदेव शर्मा, व डॉ अहिल्या मिश्र मंचासीन हुए। मंचासीन अतिथियों एवं उपस्थित साहित्यकारों की उपस्थिति में मां शारदे की छवि के सम्मुख दीप प्रज्वलित किया गया। तत्पश्चात डॉ रमा द्विवेदी ने सुमधुर स्वर में निराला रचित सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
अवसर पर प्रमुख वक्ता रिज़वान बाशा का क्लब की ओर से सम्मान किया गया। डॉक्टर अहिल्या मिश्र ने सभी उपस्थित जनों के स्वागत में कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य के साथ विगत 30 वर्षों से कादम्बनी क्लब निरंतर अपनी गतिविधियों के साथ दक्षिण में अपनी सेवाएँ दे रहा है। युवा पीढ़ी भी जुड़ रही है और विद्वान जन भी यहाँ आकर अपने उद्बोधन से प्रेरित करते हैं।
‘राजभाषा हिन्दी एवं आज की स्थिति’ पर अपनी बात रखते हुए रिज़वान बाशा ने कहा कि राजभाषा और इसकी ज़रूरत को समझने के लिए हमें इतिहास में जाना पड़ेगा। उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन और उसके बाद स्वतंत्रता संग्राम तथा महात्मा गांधी का हिंदी में दिया गया नारा “करो या मरो” और सुभाष चंद्र बोस का नारा “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” का ज़िक्र कर हिन्दी का महत्व बताते हुए कहा कि भाषा को लेखन और बोलचाल में रखेंगे तो ही वह भाषा जीवित रहेगी अन्यथा विलुप्त हो जाएगी। हमारे यहाँ कई राष्ट्रीय प्रतीक हैं पर राष्ट्रीय भाषा पर क्वेश्चन मार्क लगा हुआ है। अंग्रेज़ी अपनी जगह है परंतु अपनी राजभाषा का सम्मान हमें ख़ुद करना चाहिए।
डॉ ऋषभदेव शर्मा ने कहा कि यह विडंबना है कि हिन्दी में कामकाज करें यह हमे बार बार कहना पड़ता है। हिन्दी के प्रति हमारा समर्पण भाव होना चाहिए और जो हिंदी में कार्य से इनकार करेगा उसे दंडित करना चाहिए। हरभाषा अपने स्थान और अस्तित्व के आधार पर महत्व रखती है तो हमें भी अपनी राजभाषा का मान रखना होगा। इसके अस्तित्व को बचाना हमारा दायित्व है। इसी कड़ी में डॉ अहिल्या मिश्र, डॉ सुरभी दत्त और सुनीता लुल्ला ने अपनी बात रखी।
अवसर पर सभागार में श्री वर्धमान स्था. श्र. संघ रामकोट में विराजित (एस.डी.हॉल) श्रमण संघीय उप प्रवर्तक, प्रवचन दक्ष, प. पू. श्रुत मुनि म.सा. की सानिध्य में कादम्बिनी क्लब के कार्यकारिणी सदस्यों का सम्मान किया गया। प. पू. श्रुतमुनि म.सा ने कहा कि यह शिक्षा का प्रांगण निश्चित ही शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में और डॉ अहिल्या मिश्र के नेतृत्व में हिंदी के लिए सराहनीय कार्य कर रहा है। हमें बेहद ख़ुशी है कि आप सब साहित्य के प्रति इतना रुझान रखतेहैं। उन्होंने स्वयं हिन्दी कैसे सीखी यह बताते हुए सभी को हिन्दी के प्रति समर्पण भाव रखते हुए हर काम काज हिन्दी में करने तथा विशेष रूप से अपने घरों में बच्चों के साथ हिन्दी का प्रयोग करने के लिए कहा। उन्होंने सबको आशीर्वाद दिया और मांगलिक प्रदान की।
सम्मान सत्र में दीपा कृष्णदीप, देवा प्रसाद मायला, डॉ सुपर्णा मुखर्जी, पुरुषोत्तम कडेल, विनोद गिरि अनोखा, भगवती अग्रवाल, भावना पुरोहित, मोहनी गुप्ता, डॉ राशि सिन्हा, रवि वैद, शिल्पी भटनागर, शुभ्रा मोहंतो, डॉ संगीता शर्मा, सरिता सुराना, सीताराम माने, डॉ सुरभी दत्त, डॉ सुषमा देवी, डॉ रमा द्विवेदी, प्रवीण प्रणव, मीना मुथा, आर्या झा, डॉ आशा मिश्रा, जी परमेश्वर, तृप्ति मिश्रा को शाल और मोमेंटो से सम्मान किया गया एवं डॉ ऋषभ देव शर्मा, सुनीता लुल्ला, चंद्रप्रकाश दायमा, उमा सोनी ने सम्मान ग्रहण किया। विगत माह में संपन्न अभिनंदन समारोह में उपरोक्त कार्यकारिणी सदस्यों ने पूर्ण सपर्पण भाव के साथ अपनी ज़िम्मेदारियों का वहन किया था।
दूसरे सत्र में डॉ शर्मा की अध्यक्षता में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। डॉ मदन देवी पोकरना, चंद्र प्रकाश दायमा, डॉ रमा द्विवेदी और सुनीता लुल्ला मंजस्थ हुए। उपस्थित उपर्युक्त रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। डॉ मदन देवी ने क्लब के साथ जुड़ी यादें साझा की। ऋषभ देव शर्मा ने अध्यक्षीय काव्य पाठ किया और कहा कि सभी ने सुंदर रचनाएँ प्रस्तुत की और रचनाएँ विभिन्न विषयों कविताएँ, गीत, गज़ल, संस्मरण, हायकु, मुक्तक केंद्रित रहे। प्रदीप कुमार, धनुका, प्रवीण कुमार, ज्योति शाह, मोनिका, कुमारी आत्रिका आदि की उपस्थिति रही। सम्मान सत्र में डॉ रमा द्विवेदी ने सहयोग किया।
साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति की ओर से डॉ अहिल्या मिश्रा का सम्मान किया गया। शिल्पी भटनागर और देवा प्रसाद मायला ने धन्यवाद ज्ञापित किया। क्लब सदस्य डॉ अर्चना झा के पतिदेव स्वर्गीय मनोज कुमार को उनके निधन पर क्लब की ओर से श्रद्धांजलि दी गई। मीना मुथा ने कार्यक्रम का संचालन किया। सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं दी गई।
