हैदराबाद (डॉ नरेंद्र दिवाकर की रिपोर्ट) : वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन फॉर रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट ऑफ धोबिस (WORDD) की ओर से संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती 22 फरवरी को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, प्रीतम नगर स्थित गाडगे भवन में भव्य रूप से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीआईएसएफ के सेवानिवृत्त सीनियर कमांडेंट एम. के. वर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज के सर्जरी विभाग के प्रो. राजकुमार चौधरी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. राममिलन चौधरी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ संत गाडगे महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

इस अवसर पर ‘संत गाडगे का व्यक्तित्व, कृतित्व, दर्शन एवं सामाजिक आंदोलन’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किये। मुख्य अतिथि प्रो. राजकुमार चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि संत गाडगे महाराज का जीवन समाज सेवा, समानता और जनकल्याण का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने स्वच्छता, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को अपने आंदोलन का आधार बनाकर समाज में व्यापक परिवर्तन लाने का कार्य किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में एम. के. वर्मा ने कहा कि संत गाडगे महाराज का व्यक्तित्व और दर्शन आज भी समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है और उनके विचार सामाजिक समरसता और जागरूकता को मजबूत करने में सहायक हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. राममिलन चौधरी ने कहा कि संत गाडगे महाराज ने स्वच्छता और शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का आधार बनाया और उनके विचारों को व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर के राजन्ना की लिखित मूल पुस्तक ‘फांसी’ (एक बहुजन की आत्मकथा), जिसका अंग्रेजी अनुवाद डॉ चंडुरी कामेश्वर व श्रीमती पद्मा अजय भार्गव ने किया है, ‘The Hanging Noose’ का विमोचन तथा ‘रजक चेतना कैलेंडर 2026’ का लोकार्पण भी किया गया।

इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. संदीप दिवाकर एवं डॉ धर्मेंद्र चौधरी ने किया। इस दौरान राकेश दिवाकर (ग्रामीण भारत टीवी), समाजसेवी ममता दिवाकर, डॉ. नरेंद्र दिवाकर, सुधीर कुमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Also Read-

संगोष्ठी के प्रथम सत्र में वक्ताओं ने संत गाडगे महाराज के व्यक्तित्व, सामाजिक आंदोलन और उनके विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। दूसरे सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राम करन निर्मल, संस्था के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र दिवाकर एवं ममता दिवाकर मंचासीन रहे। विशिष्ट अतिथि धर्मेंद्र दिवाकर ने कहा कि संत गाडगे महाराज 20वीं सदी के सामाजिक आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महान संत थे, जिन्होंने समाज की बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया और आत्मचिंतन का मार्ग दिखाया। संस्था के सचिव विनोद भास्कर ने संस्था के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि WORDD की शुरुआत मात्र दस लोगों से हुई थी और आज यह एक सशक्त सामाजिक संगठन के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कोविड काल में संस्था ने बेसहारा और जरूरतमंद लोगों की सहायता कर समाज में सेवा और सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया। संगोष्ठी के दौरान संत गाडगे महाराज के जीवन पर आधारित गीतों की प्रस्तुति भी की गई, जिससे कार्यक्रम का वातावरण प्रेरणादायक बना रहा।

इस दौरान वक्ताओं ने सामाजिक एकता, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य रूप से अनिल दिवाकर ने समाज में एकता और सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। ममता दिवाकर ने महिला सशक्तिकरण को समाज के विकास का आधार बताते हुए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। इसी क्रम मं राम चंद्र ने कहा कि संत गाडगे महाराज द्वारा किए गए सामाजिक सुधार कार्य आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। इसी कड़ी में सुधीर कुमार ने स्वरोजगार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आह्वान किया कि वर्तमान समय में बेरोजगारी की समस्या से निपटने के लिए युवाओं को स्वरोजगार अपनाना चाहिए और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार न केवल व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

समापन सत्र में आकाशवाणी से सेवानिवृत्त बोलता प्रसाद ने भीमराव आंबेडकर और संत गाडगे महाराज के विचारों को याद करते हुए कहा कि संत गाडगे महाराज भले ही औपचारिक शिक्षा से वंचित रहे हों, लेकिन उनका ज्ञान और सामाजिक दृष्टिकोण उन्हें स्वयं में एक विश्वविद्यालय के समान बनाता है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के शोधार्थी शरद कन्नौजिया ने कहा कि संत गाडगे महाराज ने समाज को एक प्रयोगशाला के रूप में देखा और मानव सेवा को ईश्वर की सच्ची पूजा बताया। ईश्वरी प्रसाद दिवाकर ने बहुजन महापुरुषों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक न्याय और जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ. राम करन निर्मल ने संत गाडगे महाराज के मानव कल्याण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के कार्यों को प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके विचारों को अपनाने का आह्वान किया।

अंत में अध्यक्ष एम. के. वर्मा ने संगोष्ठी को अत्यंत सफल और सकारात्मक बताते हुए संस्था के सामाजिक कार्यों की सराहना की। संगोष्ठी के समापन पर वक्ताओं और प्रतिभागियों ने एक स्वर में संत गाडगे महाराज के स्वच्छता, शिक्षा, मानव सेवा और सामाजिक सुधार के संदेश को समाज में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। अंत में सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों धन्यवाद ज्ञापन संस्था के अध्यक्ष डॉ नरेंद्र दिवाकर ने किया।
