आपका मालूम है कि विभा भारती जी मिलिन्द प्रकाशन के प्रमुख श्रृतिकांत भारती की पत्नी है। हमेशा हर कार्य में तेजस्वी देखनी वाली विभा जी का 1 जुलाई 2025 को निधन हो गया। विभा जी की स्मृति में 12 जुलाई को संस्मरण सभा आर्य कन्या विद्यालय में है। एक साल पहले स्थापित विणा वादिनी साहित्य समिति और लॉयन्स क्लब की अध्यक्षा भी रही चुकी है।
सबसे मिलजुल कर रहने वाली श्रीमती विभा भारती का जन्म 2 अगस्त 1952 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ। स्कूल व कॉलेज में वह सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाटक, टेबल टेनिस, रनिंग, रिले इत्यादि में अपनी प्रतिभा को उजाकर रह चुकी है। उसने अनेक पुरस्कार भी प्राप्त किये। ऐसी होशियार विभा जी का विवाह 28 मई 1973 श्रुतिकान्त से हुआ। विवाह के पश्चात श्रुतिकांत जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मिलिन्द प्रकाशन को आगे बढ़ाने में काफी योगदान रहा है।
विभा जी को साल 1974 में प्रथम पुत्र रूचिर एवं 1979 द्वितीय पुत्र परितोष का जन्म हुआ। विभा जी हमेशा साहित्यिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहती थी। 1983 में श्रुतिकांत भारती को थ्रोट कैन्सर हुआ। फिर भी वह डगमगाई नहीं। बल्कि डटकर पति के साथ रही और हिम्मत दी। साथ ही लूना पर विभिन्न संस्थाओं के कार्य में अपना योगदान देती रही। उसने मिलिन्द प्रकाशन एवं बच्चों शिक्षा-दीक्षा को सुचारू रूप से संभाला। आकाशवाणी पर भी उनके अलग अलग विषयों पर कार्यक्रम प्रसारित हुए। अंत तक अनेक संस्थाओं से वह जुड़ी रही है।
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हैदराबाद पुस्तक मेले की अध्यक्ष व मंत्री रही चुकी है। लॉयन्स क्लब ऑफ हैदराबाद ईस्ट की भी अध्यक्ष व मंत्री रह चुकी है। विभा जी को लेखन कार्य का भी बहुत शौक था। वह कविता और कहानियाँ भी लिखती थी। उनकी रचनाएं अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। वह आखिर सांस तक गीता परिवार, गीत चांदनी, कादम्बिनी क्लब, वरिष्ठ नागरिक संघ, हम साथ साथ (खण्डवा), अखिल भारतीय प्रकाशक की सदस्य, हैदराबाद सिकन्दराबाद मारवाड़ी संगठना एवं डिस्ट्रिक्ट लॉयन्स इनटरनेशनल में भी वेल बेबीशो की चेयरमैन रह चुकी है।
बड़ा बेटा रूचिर बी ई, एम बी ए, एवं इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के स्नातक हैं। वर्तमान में एक सॉफ्टवेयर कम्पनी में डॉयरेक्टर हैं। बड़ी बहु रोशनी भी कॉमर्स की लैक्चरर हैं एवं उसकी भी कई रेफरेंस किताबें प्रकाशित हुईं हैं। छोटा बेटा परितोष भी इंजीनियरिंग करने के लिए ऑस्ट्रेलिया गया। वर्तमान मे वह भी आईटी इंडस्ट्री में कार्यकर्त है। छोटी बहु निधि ऑस्ट्रेलिया में अभी घर गृहस्थी में जुटी हुई हैं।
विभा जी सबके साथ हमेशा अच्छे विचार एवं धारणाएं बनाई। अनेक उच्च उदाहरण समाज के सामने रखी है। वह एक प्रकार से प्रकाशवान ऊर्जा लेकर चलती थी। विभा जी आज भले ही हमारे बीच नहीं है। परन्तु उनके दिए गए विचारों एवं शुद्ध दैविक कार्यों को आगे बढ़ाना हम सबका दायित्व है। ईश्वर विभा जी की आत्मा को शांति प्रदान करें और उनको आत्मज्ञान प्राप्त हों ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है। ॐ शांति: ॐ शांति।

सुधा ठाकुर
सचिव
वीणा वादिनी साहित्यिक समिति हैदराबाद
