वेनेज़ुएला पर हमला: अमेरिकी राष्ट्रपति ‘सांड’ डोनाल्ड ट्रम्प पर लगाओ लगाम, वर्ना…

इसे हम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दादागिरी ही कहेंगे कि एक संप्रभु राष्ट्र के राष्ट्रपति को रातों-रात सैन्य कार्रवाई करके जबरन बंधक बनाकर अमेरिका लाया गया है। जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति की बेलगाम होती इच्छाओं और दुनिया को अपनी मुठ्ठी में करने की महत्वाकांक्षा की चरम परिणति है। जिस तरह से अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने काराकास में ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ को अंज़ाम दिया, उससे वेनेजुएला के सुरक्षा बल सकते में आ गए और उन्होंने कोई प्रतिरोध नहीं किया।

बेकाबू सांड

जिस तरह से राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेंस को नींद में जबरदस्ती से दबोचकर खींचकर बाहर लाया गया और उन्हें हथकड़ी पहनाकर, आँखों पर पट्टी बाँधकर अमानवीय तरीके से अमेरिका लाया गया और सरेआम उनकी बेइज्जती की गई, उसे देखकर लगता है जैसे दुनिया में मानवाधिकार नाम की कोई चीज नहीं बची। दूसरे देशों में मानवाधिकार के नाम पर चिल्लाने वाला अमेरिका खुलेआम गुंडागर्दी कर रहा है और उसे रोकने वाला कोई नहीं है। दिन-प्रतिदिन ट्रंप की मनमानियां बढ़ती जा रही हैं और वह बेकाबू सांड की तरह अपने सींगों से सबको घायल करने पर आमादा है। अगर समय रहते इस सांड पर लगाम नहीं लगाया गया तो यह दुनिया के लिए ख़तरनाक होता जाएगा।

खतरे की घंटी

अब सवाल यह उठता है कि अमेरिका ने किस आधार पर मादुरो के खिलाफ यह कार्रवाई की? कहने को तो ट्रंप कह रहे हैं कि मादुरो नारको टेररिज्म को बढ़ावा दे रहे हैं और ड्रग कार्टेल का संचालन कर रहे हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर आज़ उन्हें मैनहैट्टन कोर्ट में पेश किया गया। जहां पर मादुरो ने अपने ऊपर लगाए गए तमाम आरोपों को गलत बताया और अपनी रिहाई की मांग की। लेकिन लगता है कि ट्रंप के इशारे पर उनके मुकदमे की अगली सुनवाई की तारीख जान-बूझकर 11 मार्च दी गई है, ताकि तब तक अमेरिका वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर कब्जा कर सके और सत्ता अपने हाथ में ले सके। अगर ऐसा होता है तो यह न केवल वेनेजुएला के लिए वरन समस्त लैटिन अमेरिकी देशों और एशियाई देशों के लिए भी खतरे की घंटी साबित होगी।

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तानाशाही

कहने को ट्रंप चाहे कुछ भी कहें लेकिन सारी दुनिया जानती है कि उनकी नीति और नीयत दोनों में खोट है। नारको टेररिज्म तो एक बहाना है, असल में तो अमेरिका वेनेजुएला के समृद्ध तेल भंडार पर अपना कब्जा करना चाहता है। दो करोड़ 85 लाख की आबादी वाला वेनेजुएला तेल और खनिज संपदा की दृष्टि से इतना समृद्ध देश है कि वहां पर तेल के अथाह भंडार के अलावा लोहा, कोयला, सोना, हीरे और निकल के भंडार हैं। वेनेज़ुएला पूर्व गुआना, ब्राजील और कोलंबिया से घिरे वेनेजुएला एंजेल सहित असंख्य सुन्दर जल प्रपातों, वर्षा वन, सुरम्य उद्यानों और मेरिडा में सर्वोच्च केबल कार के लिए प्रसिद्ध है और ट्रंप इन सब पर कब्जा करके इन्हें अपनी तानाशाही से चलाना चाहते हैं।

सोची-समझी साजिश

दरअसल यह बहुत पहले से सोची-समझी साजिश के तहत बुना गया जाल है। जब से मादुरो चीन के साथ युआन में व्यापार करने लगे और उन्होंने अमेरिकी तेल कंपनियों के प्रस्ताव ठुकराए, तब से ही ट्रंप उनके पीछे हाथ धोकर पड़े थे। पहले उन्होंने मादुरो के खिलाफ एंटी ड्रग्स मुहिम छेड़ी, शैडो फ्लीट पर पाबंदी लगा दी, तीस नौकाएं नष्ट कर दीं और बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी। इतना ही नहीं, मादुरो पर पहले जो 15 मिलियन डॉलर का इनाम था, उसे 50 मिलियन डॉलर कर दिया। यह बहुत बड़ी रकम है और लगता है कि इसके लालच में ही मादुरो के अंगरक्षकों ने उन्हें धोखा दिया।

पूर्व उप राष्ट्रपति कमला हैरिस

ट्रंप की इस अवैध और गैर कानूनी कार्रवाई का चारों तरफ़ विरोध हो रहा है। न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी ने इस आक्रामक कार्रवाई का खुला विरोध किया है। वहीं अमेरिका की पूर्व उप राष्ट्रपति कमला हैरिस ने वेनेजुएला को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा – ‘डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला में की गई कार्रवाई अमेरिका को ज्यादा सुरक्षित और मजबूत नहीं बनाती। मादुरो भले ही एक क्रूर और अवैध तानाशाह हों लेकिन इससे यह सच्चाई नहीं बदलती कि यह कार्रवाई गैर कानूनी और ग़लत थी।’ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि सभी सदस्य देश संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करें। वहीं अमेरिकी राजदूत माइकल वॉल्ट्ज ने कहा कि 2024 के विवादित चुनावों के बाद मादुरो वैध राष्ट्राध्यक्ष नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई मादक पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के लिए जरूरी थी, जो अमेरिका और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।

वेनेज़ुएला के राजदूत

इसका विरोध करते हुए वेनेज़ुएला के राजदूत ने कहा – ‘हम अमेरिकी आक्रामकता के इस अहम पहलू को नजरंदाज नहीं कर सकते। वेनेज़ुएला को उसके प्राकृतिक संसाधनों के कारण निशाना बनाया गया है।’

अंतरराष्ट्रीय कानून

उन्होंने सुरक्षा परिषद से संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत कार्रवाई करने की अपील की और कहा कि अमेरिका को हमारे राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की प्रतिरक्षा का सम्मान करना चाहिए और उनकी तत्काल रिहाई तथा सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने वेनेजुएला के खिलाफ बल प्रयोग की स्पष्ट और बिना शर्त निंदा किए जाने की मांग करते हुए बल के जरिए किसी क्षेत्र या संसाधन के अधिग्रहण के सिद्धांत की फिर से पुष्टि करने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान को बहाल करने के लिए कदम उठाने की मांग की।

वेनेजुएला की उप राष्ट्रपति

कहने को तो वेनेजुएला की उप राष्ट्रपति सुश्री डेल्सी रोड्रिगेज ने अंतरिम राष्ट्रपति पद की शपथ ली है लेकिन ट्रंप ने अपने नापाक इरादे जता दिए हैं और कह दिया है कि सुरक्षित, सही और न्यायपूर्ण सत्ता हस्तांतरण तक सत्ता अपने हाथ में रखेंगे। इसका सीधा-सा मतलब है कि अमेरिका की विराट तेल कंपनियां वेनेजुएला के तेल भंडारों पर कब्जा करके उनका अंधाधुंध दोहन करेंगी। लेकिन डेल्सी रोड्रिगेज ने स्पष्ट कहा – ‘मैं उस पीड़ा के साथ आई हूं जो हमारी मातृभूमि पर अवैध सैन्य आक्रामकता के बाद वेनेजुएला के लोगों को पीड़ा झेलनी पड़ी है। मैं उस दर्द के साथ आई हूं, जो हमारे दो नायकों के अपहरण से जुड़ा है। जिन्हें अमेरिका ने बंधक बना रखा है – राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और इस देश की प्रथम महिला सिलिया फ्लोरेंस।’

माँ की कसम खाता हूं

इतना ही नहीं, मादुरो के बेटे गोयेरा भी अब इसके खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने कहा – ‘हम ठीक हैं और शांत हैं, आप हमे लोगों के साथ सड़कों पर देखेंगे। वे हमें कमजोर देखना चाहते हैं लेकिन हम गरिमा के साथ झंडा उठाएंगे। हमें दुःख तो है, गुस्सा भी है लेकिन वे जीत नहीं पाएंगे। मैं अपनी जान, अपनी माँ की कसम खाता हूं।’ विश्व की दो महाशक्तियां रूस और चीन ने भी इसका विरोध किया है। मलेशिया और दक्षिण अफ़्रीका जैसे देशों ने हमले पर खुलकर वेनेज़ुएला के प्रति एकजुटता दिखाई और अमेरिकी कार्रवाई का कड़े शब्दों में विरोध जताया। अन्य 17 देशों ने भी इस सैन्य कार्रवाई का विरोध किया है। मगर भारत ने इस प्रकरण पर बहुत ही सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। भारत ने सदैव की भांति आपसी बातचीत के द्वारा समस्या के समाधान की बात कही।

भारत के विदेश मंत्री के बयान

अब सवाल यह है कि भारत ने क्यों मलेशिया या दक्षिण अफ़्रीका की तरह कठोर प्रतिक्रिया नहीं दी? वो भी तब जब वह ख़ुद को ग्लोबल साउथ के नेता के तौर पर पेश करता है। तो इसका उत्तर यह है कि यहां पर भी भारत अपनी पुरानी गुटनिरपेक्ष नीति पर कायम रहा, जिसकी बुनियाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी। तभी भारत के विदेश मंत्री के बयान में किसी का विरोध या समर्थन जैसा भाव नहीं था। वहीं उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने मादुरो को अपना दोस्त बताते हुए अमेरिका को विश्व युद्ध की चेतावनी दी और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है। उन्होंने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यह कार्रवाई दुनिया को तृतीय विश्व युद्ध की ओर ले जा सकती है।

नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता वेनेजुएला की मारिया कोरिना

सन् 2025 की नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो मादुरो की घोर विरोधी हैं और उन्होंने अमेरिका से सैन्य हस्तक्षेप की बात भी की थी। नोबेल पुरस्कार के लिए वे बाहरी मदद से चुपचाप चोरी छिपे वेनेजुएला से ओस्लो पहुंच गई थी। हालांकि ट्रंप भी इस पुरस्कार के दावेदार माने जा रहे थे लेकिन मारिया कोरिना मचाडो ने यह बाज़ी मार ली। जो भी हो, ट्रंप की इस अनैतिक और अवैध कार्रवाई को सम्पूर्ण विश्व में अंतरराष्ट्रीय नियमों और राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन माना जा रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि बोलिविया, डोमिनिकन रिपब्लिकन, इक्वेडोर, ग्वाटेमाला, हैती, मैक्सिको, पनामा और निकारागुआ में राजनीतिक हस्तक्षेप और तख्तापलट के बाद अमेरिका की साम्राज्यवादी नीति विस्तार पा रही है, जो न केवल लैटिन अमेरिकी देशों के लिए वरन् सम्पूर्ण विश्व के लिए घातक है।

कभी भी विस्फोटक रूप ले सकता है

हथियारों के बल पर दूसरे देशों में सत्ता परिवर्तन करके वहां पर अपनी कठपुतली सरकार बनाकर उसके माध्यम से अपनी दादागिरी दिखाना अमेरिका की बहुत पुरानी रणनीति है, लेकिन अब समय आ गया है कि इस बेकाबू होते राष्ट्रपति पर लगाम लगाई जाए, ताकि दुनिया में शांति व्यवस्था कायम रहे और विश्व तीसरे विश्व युद्ध की ओर न बढ़े। खबरों की मानें तो अमेरिका ने रूस के तेल टैंकरों पर कब्जा कर लिया है और वेनेजुएला के समस्त तेल भंडारों को अपने कब्जे में ले लिया है। अब यहां पर तीन महाशक्तियों – अमेरिका, रूस और चीन में सीधे टकराव की स्थिति बन रही है और यह टकराव कभी भी विस्फोटक रूप ले सकता है।

सरिता सुराणा
हिन्दी साहित्यकार एवं स्वतंत्र पत्रकार
हैदराबाद

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