कादम्बिनी क्लब की मासिक गोष्ठी, गीतकार शैलेंद्र जीवनी पर प्रवीण का शानदार संदेश, आप भी पढ़ें एक बार

हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में 21 दिसंबर को संगोष्ठी सत्र संयोजक अवधेश कुमार सिन्हा (नई दिल्ली) की अध्यक्षता में ऑनलाईन के माध्यम से क्लब की 401वीं मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन संपन्न हुआ। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए क्लब की संस्थापक अध्यक्ष डॉ अहिल्या मिश्र एवं कार्यकारी अध्यक्ष मीना मुथा ने संयुक्त रूप से बताया कि इस अवसर पर प्रथम सत्र का आरंभ सस्मिता नायक द्वारा सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से हुआ। डॉ अहिल्या मिश्र ने पटल पर उपस्थित साहित्यकार बंधुओं-एवं बहनों का स्वागत करते हुए कहा कि 32वें वर्ष में जिस तरह हम सभी जुड़े रहे इसी तरह भविष्य में भी क्लब का साथ निरंतर सभी दें जिससे कि हिन्दी साहित्य की सेवा में हमारा सहकार्य बना रहे।

प्रथम सत्र में प्रवीण प्रणव का मुख्यवक्ता के रूप में परिचय देते हुए अवधेश कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रवीण प्रणव सॉफटवेअर- टेक्नोलॉजी से जुड़े होने के बावजूद साहित्य में अटूट रुचि रखते हैं और एक ऑलराऊंडर की भाँति हर जिम्मेदारी का समर्पण के साथ निर्वाह करते हैं। जानेमाने सुप्रसिद्ध गीतकार एवं कवि शैलेंद्र जी के गीत संसार पर प्रवीण प्रणव अपने विचार रखेंगे। उन्होंने शैलेन्द्र का संक्षिप्त परिचय देकर विषय प्रवेश किया।

प्रवीण प्रणव ने अपने उ‌द्बोधन में कहा कि फिल्म उद्योग से जुड़े गीतकार शैलेंद्र के जीवन में झांकने का हम प्रयास करते हैं तो पता चलता है कि कामयाबी की मंजिल को छूने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है। वे बचपन में मेधावी छात्र रहें। माली हालात ठीक नहीं थे। कविता और गीत लिखने में, शुरू से ही रुचि रही। उनके बचपन से लेकर उनके अंतिम दिनों तक की यात्रा करवाते हुए प्रवीण प्रणव ने कहा कि धीरे-धीरे वे कवि सम्मेलनों में आमंत्रित किए जाने लगे। सुप्रसिद्ध अभिनेता राजकपूर ने बरसात फिल्म में गीतकार के रूप में उन्हें अवसर दिया और उनके गीतों ने धूम मचा दी। शैलेंद्र के भावपूर्ण गीत दिल को छू जाते हैं।

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फिल्म तीसरी कसम की यादें साझा करते उन्होंने कहा कि फिल्म बनने में काफी लंबा समय लगने की वजह से शैलेंद्र को कर्ज में डूबना पड़ा और उन्हें फिर से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि फ्लॉप होने के बावजूद यह फिल्म पुरस्कृत हुई। जीना यहाँ, मरना यहाँ उसके सिवा जाना कहाँ इस अंतीम गीत को रचते रचते उन्होंने इस संसार से बिदा ली। उनके गीतों का उल्लेख करते हुए प्रवीण प्रणव ने कहा कि तमाम संघर्षों को झेलते हुए वे शीर्षस्थान पर पहुँचे। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। इसी कड़ी में सुनीता लुल्ला उमा सोनी, डॉ आशा मिश्र ने अपनी बातें रखीं। सासमिता नायक शैलेन्द्र के गीत गाईं। डॉ अहिल्या मिश्र ने कहा कि आज संगोष्ठी सत्र में एक दिशा मिली है। साहित्य व फिल्म का मेल कितना अहम है। विनोदागिरी अनोखा ने सत्र का धन्यवाद दिया।

दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी संपन्न हुई। सत्र की अध्यक्षता श्रुतिकान्त भारती (ऑस्ट्रेलिया) ने की। भावना पुरोहित, प्रियंका वाजपेयी,,सुनीता लुल्ला, गजानन पांडे,मीरा ठाकुर, मोहिनी गुप्ता, शीला भनोत, निशी कुमारी, वर्षा शर्मा, चंद्रप्रकाश दायमा, तृप्ति मिश्रा, डॉ सुरभि दत्त, दर्शन सिंह, उमा सोनी, मोनिका भटट, शिल्पी भटनागर, डॉ कृष्णा सिंह, डॉ आशा मिश्र, सूरज कुमारी गोस्वामी, प्रवीण प्रणव, मीना मुथा, विनोदगिरी अनोखा,ने काव्य पाठ किया। डॉ रमा द्विवेदी, सीताराम माने, मधु दायमा, के राजन्ना, किरण सिंह, शोभा देशपांडे, डॉ स्वाति गुप्ता, डॉ विनिता शर्मा, अनिल कुमार सिंह, रेखा अग्रवाल, सत्यनारायण काकड़ा, डॉ गंगाधर वानोडे, विभूति सिन्हा की उपस्थिति रही।

श्रुतिकांत भारती ने अध्यक्षीय टिप्पणी में कहा कि आज शैलेंद्र पर प्रवीण प्रणव ने बहुत ही सुंदर ढंग से अपने विचार रखें और दूसरे सत्र में शैलेंद्र जी की यादों का प्रभाव हमें देखने को मिला। सत्र का धन्यवाद तृप्ति मिश्रा ने दिया। अवसर पर क्लब अध्यक्षा ने वर्ष 2026 से आगे के कार्यकाल के लिए कादंबिनी क्लब की नूतन कार्यकारिणी के गठन की घोषणा की, जिसे करतल ध्वनि से स्वीकृत किया गया। डॉ आशा मिश्र ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। मीना मुथा संचालन की व्यवस्था को संभाला। सभी ने एक दूसरे को नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

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