साहित्य सेवा समिति की 123 वीं मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन, यह रहा विषय

हैदराबाद : साहित्य सेवा समिति, हैदराबाद, तेलंगाना की 123 वीं मासिक गोष्ठी अध्यक्ष डॉ दया कृष्ण गोयल, महामंत्री ममता जायसवाल, पूर्व महामंत्री सुनीता लुल्ला की उपस्थिति में संपन्न हुई। गोष्ठी का संचालन गीता अग्रवाल द्वारा किया गया। सर्वप्रथम पहलगाम में निर्दोष मृतकजनों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई एवं शांति मंत्र से शांति की मनोकामना की गई। तत्पश्चात उर्मिला पुरोहित द्वारा सरिता सुराणा रचित सरस्वती वंदना का मधुर कंठ से गायन हुआ। गोष्ठी दो सत्रों में आयोजित हुई। प्रथम सत्र में विषय ‘आतंकवाद की मानसिकता’ विषय पर परिचर्चा हुई और द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी हुई।

प्रथम सत्र वरिष्ठ सदस्य जी. परमेश्वर की अनुमति के साथ प्रारंभ हुआ। “आतंककवाद की मानसिकता” विषय पर विषय प्रवेश दिया ममता जायसवाल ने। अपने वक्तव्य में आतंकवाद के परिपेक्ष परिभाषा उनके प्रकारों विभिन्न युद्धों, आंदोलनों कारणों, कठिनाइयों व समाधान पर आतंकवाद पर रचे साहित्य हाउस टेररिज्म एंड द लूमिंगटॉवर, एवरी वॉर मस्ट एंड तथा भारतीय रचनाकार लेफ्टिनेंट जनरल वी. के अहलूवालिया के पुस्तकों के कथन के “आतंकवादी अभियान अंतहीन लग सकता है लेकिन वह हमेशा समाप्त होता है” “अत दीपो भव ” “स्वयं के प्रकाश को पहचानो” सार द्वारा समाप्ति दी।

विषय के प्रमुख प्रवक्ता के रूप में सरिता सुराणा ने पुराण कल से आधुनिक काल तक जुड़े आधुनिक आतंकवादी भावों को बताया तथा भारतीय परिपेक्ष में इसकी विस्तृत विवेचन देते हुए अहिंसात्मक देश में हिंसात्मक अभिवृत्तियों की बढ़ती कड़ियों पर क्षोभ जताया तथा विश्व स्तर पर कैसे आतंकवाद को झेल रहा है, इस पर अपने विचार प्रकट किये। इस चर्चा की कड़ी को आगे बढ़ते हुए चंद्र प्रकाश दायमा ने धर्म विशेष के मौन व उसकी कमजोर अल्पज्ञान पर प्रश्न उठाएं वह सशक्त होने पर बल दिया।

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युवा अभिजीत पाठक ने इसे और मुखर स्वर देते हुए कहा शेरों को अपनी गर्जना पहचाननी होगी व जिम्मेदारी से बचकर तथाकथित बौद्धिक गुलामी व पारितोषिकता का मोह छोड़ना होगा, अजय कुमार पांडेय ने भी शांति के नाम पर मौन को कायरता स्वीकारा, दर्शन सिंह ने आंतकवाद के विभिन्न बिंदुओं को उठाया, वहीं जी. परमेश्वर का भी मानना है की पीढ़ी को ऊर्जाशील बन आतंकवाद को नकारा बनाना होगा।

प्रथम सत्र के चर्चा के उपरांत काव्य गोष्ठी में वीर रस भावों की देशभक्ति, पहलगाम आतंक का दर्द दिखाई दिया। गोष्ठी में सुनीता लुल्ला, विनीता शर्मा, चन्द्र प्रकाश दायमा, दर्शन सिंह, अभिजीत पाठक, डॉ सुषमा देवी, आर्य झा, रिमझिम झा, इंदू सिंह, गीता अग्रवाल, कृष्ण प्रकाश अग्रवाल, नवल किशोर अग्रवाल, रंजीता पांडे, उमेश चंद यादव, विनोद गिरि अनोखा, वर्षा शर्मा, उमा देवी सोनी, उर्मिला पुरोहित, सरिता सुराणा, डॉ दया कृष्ण गोयल व ममता जायसवाल ने काव्य पाठ किया।

गोष्ठी में डॉ अर्चना पांडे, जी परमेश्वर, मंजू भारद्वाज, अजय कुमार पांडेय, सुधा ठाकुर, तृप्ति मिश्रा, मधु दायमा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन समर्थ रूप से गीता अग्रवाल ने किया। तकनीकी व रिपोर्ट का सौजन्य दिया समिति महामंत्री ममता जायसवाल ने। डॉ दया कृष्ण गोयल समिति अध्यक्ष के अध्यक्षीय टिप्पणी व सुनीता लुल्ला के धन्यवाद ज्ञापन द्वारा गोष्ठी का सफल समापन हुआ।

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