जन्म दिवस पर विशेष लेख : वेद भक्त डॉ विजयवीर विद्यालंकार, जानें कार्य और कृति

पंडित जी डॉ. विजयवीर विद्यालंकार का जन्म मुम्बई में 13 जुलाई 1944 को एक ऋषि भक्त नारायण राव जी आर्य परिवार में हुआ। आपने आरंभ में गुरुकुल घटकेश्वर, हैदराबाद से शिक्षा प्राप्त की और आगे की उच्च शिक्षा के लिए गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार में प्रवेश किया,‌ जहां पर आपने विद्यालंकार तक पढ़ाई की। उस्मानिया विश्वविद्यालय से एम. ए. संस्कृत में की और हिंदी में भी एम. ए. और फिर पी.एच.डी. किया।

पंडित जी की अभिरुचि (हॉबी) वैदिक यज्ञानुष्ठान, धार्मिक प्रवचन तथा काव्य रचना है। पंडित जी ने आर्य जगत के पत्र – पत्रिकाओं का सम्पादन किया है। पंडित जी के प्रकाशित कृतियों में रस सिद्धान्त विवेचन (प्रबन्ध ग्रन्थ), दक्षिण में रामकथा, राष्टपुरुष श्रद्धानन्द, वैदिक विचार, वेदामृत, हिन्दी साहित्य साधक डॉ.एन.पी. कुट्टन पिल्लै, हिन्दी साहित्य गीतिका, विपंचिका, चतुर्वेद – मन्त्रानुक्रम – विवरणिका इत्यादि शामिल हैं।

पंडित विजयवीर जी इस समय मानव कल्याण हेतु, ईश्वरीय ज्ञान, चारों वेदों का भाष्य और काव्यानुवाद करने के कार्य में लगे हुए हैं। आप ग्रहस्थ जीवन की जिम्मेदारी उठाते हुए भी एक ऋषि मुनि के समान अपना सर्वस्व चारों वेदों के काव्यानुवाद में लगाए हुए हैं। आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि आपने यजुर्वेद, अथर्ववेद, सामवेद का काव्यानुवाद कर प्रकाशन भी पूर्ण किया है।

यह आपकी उपलब्धि बहुत बड़ी है और मानव जाति के लिए इस पुण्य कर्म को हम सदा सदा के लिए इनके कृतज्ञ रहेंगे। इस सांसारिक व्यस्तता के बाद भी कितना कठिन कार्य इन्होंने संपन्न किया और इस समय ऋग्वेद के काव्यानुवाद में बहुत ही व्यस्त हैं। आप लगभग 700 मंत्रों का काव्यानुवाद कर चुके है। अगले वर्ष अप्रैल तक ऋग्वेद के पहला खण्ड प्रकाशित होने की आशा है।

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आपको कई सम्मान एवं पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय भावनात्मक एकता पुरस्कार, भगवान महावीर विश्व सद्भावना पुरस्कार, अंतर्राष्ट्रीय वैदिक सम्मेलन वैदिक साहित्य सम्मान, विश्व वेद सम्मेलन हरिद्वार में वैदिक साहित्य में विशिष्ट योगदान सम्मान, महर्षि दयानन्द सरस्वती वैदिक जागरण पुरस्कार, वेदों और रस सिद्धांतों पर उल्लेखनीय कार्यों के लिए युद्धवीर अवार्ड, आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि सभा एवं डीएवी कालेज प्रबंधन समिति (दिल्ली) द्वारा वैदिक विद्वान के रूप में प्रशस्ति पत्र, स्वतंत्रता सेनानी पंडित गंगाराम स्मारक मंच द्वारा वेदों को काव्य रूप देने में जीवन को समर्पित करने हेतु अभिनन्दन पत्र, प्रसिद्ध ऐतिहासिक आर्यसमाज महर्षि दयानंद मार्ग, सुल्तान बाजार में सम्मानित किया गया है।

आशा और विश्वास करते हैं कि आपकी लेखनी पद्यानुवाद के लिए चलती रहे और परमपिता परमात्मा द्वारा दिया हुआ वेदों का अमृत ज्ञानभंडार आपके द्वारा मानव कल्याण के लिए सरल और सुलभ बनाते हुए आगे बढ़ेंगे। आप स्वस्थ और प्रसन्न रहते हुए हमें मार्गदर्शन करते रहेंगे।

लेखक : भक्त राम
अध्यक्ष : स्वतंत्रता सेनानी पंडित गंगाराम स्मारक मंच
2 – 2 – 647/ ए /51,
साईं बाबा नगर, शिवम रोड,
बाग अंबरपेट, हैदराबाद – 500 013
मोबाइल 98490 95150

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