हैदराबाद : साहित्य सेवा समिति ने ‘मध्यकाल में राम भक्त काव्य धारा से लेकर आधुनिक काल तक हिंदी कविता में श्रीराम’ विषय पर अपनी 134 वीं मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन किया। साहित्य सेवा समिति के अध्यक्ष डॉक्टर दया कृष्ण गोयल व समिति के महामंत्री ममता कुमारी जायसवाल की उपस्थिति में साहित्य सेवा समिति ने अपनी 134 वीं मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन संपन्न की।
समकालीन वैश्विक धरातल के परिदृश्य में श्रीराम चिंतन धारा की महत्ता को समझते हुए समिति ने अपनी गोष्ठी को प्रस्तावित किया। गोष्ठी के प्रारंभ में गीता अग्रवाल ने स्वरचित सरस्वती वंदना को प्रस्तुत किया। तत्पश्चात डॉ दया कृष्ण गोयल ने स्वागत भाषण में अद्यतन काल से आधुनिक काल में श्रीराम भूमिका को निवेदित किया।
इस विषय पर अपने प्रस्तावना देते हुए सत्य प्रसन्न ने विविध पद्य आत्मक उदाहरण द्वारा विषय को समसामयिक रूप में निरूपित किया एवं श्रीराम की काव्यधारा को स्पष्ट किया। इसी विषय को विस्तारित रूप देते हुए विषय के प्रमुख प्रवक्ता अभिजीत पाठक ने विषय को तथ्यात्मक रूप से प्रस्तावित करते हुए श्रीराम साहित्य धारा के संपूर्ण रूप को निरूपित करते हुए यह घोषित किया कि आज के जनमानस के राम बाल्मीकि रामायण के राम और रामचरितमानस के राम व आधुनिक काल के राम से भिन्न अपने रूप को ले रहे हैं और त्वरित निर्णय को अपनी धारण क्षमता सिद्ध कर रहे हैं।
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इसी विषय की चर्चा बिंदु को प्रकाशित करते हुए ममता जायसवाल ने संशयात्मक प्रश्न उपस्थित किया। क्या श्रीराम केवल नव्य पीढ़ी के लिए भीड़ वाले नारे वाले राम मात्र तो बनकर नहीं रह जाएंगे। श्रीराम जनित संस्कार भ्रर्म आत्मक प्रचार न रह जाए परवर्ती विचारकों ने इस चर्चा को आगे बढ़ाकर यह उद्बोधन दिया कि भाषा, शिक्षा, स्व अनुशासन द्वारा हम राम के भ्रमात्मक प्रचार को आत्मिक स्वरूप में बदल सकते हैं तथा सीता मय राम को पारिवारिक सामाजिक, सांस्कृतिक वैश्विक आदर्श बना सकते है। जिसमें सी. पी. दायमा, दर्शन सिंह, डॉ रचना चतुर्वेदी, डॉ सुपर्णा मुखर्जी, विनय सिंह, बैजनाथ सुनहरे, गीता अग्रवाल, उमा देवी सोनी आदि प्रबुद्ध जनों ने अपनी विचारधारा प्रतिबिंबित की।
प्रथम सत्र का संचालन समिति के महामंत्री ममता जायसवाल के द्वारा किया गया तदुपरांत दिव्तीय काव्य गोष्ठी के सत्र का संचालन गीता अग्रवाल ने किया काव्य गोष्ठी में राम मय गीतों कविताओं के अतिरिक्त मार्मिक संवेदना युक्त गीत कविता तथा शृंगारिक गीतों की प्रस्तुति भी रही। इसमें गणमान्य डॉ दया कृष्ण गोयल, ममता जायसवाल, अभिजीत पाठक, सत्य प्रसन्न, गीता अग्रवाल, उमेश सिंह यादव, केपी अग्रवाल, सी पी दायमा, उमा देवी सोनी, विनय सिंह, दर्शन सिंह, बैजनाथ सुनहरे, रचना चतुर्वेदी, ऋृतिकांत भारती, मधु दायमा डॉ सुपर्णा मुखर्जी की उपस्थिति में अपने स्वरचित काव्य रचनाओं को प्रस्तुत किया। डॉक्टर दया कृष्ण गोयल ने अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत किया। विनय सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के द्वारा गोष्ठी का समापन किया गया।
