साहित्य सेवा समिति: चुनावी राजनीति और साहित्यकार विषय पर इन वक्ताओं ने की गई सारगर्भित चर्चा

हैदराबाद: साहित्य सेवा समिति की 106 वीं गोष्ठी रविवार 3 दिसंबर को आनलाइन सम्पन्न हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ सुमनलता जी ने की। तकनीकी आयोजना का निर्वहन सुश्री रेखा अग्रवाल ने किया। प्रथम सत्र में चर्चा का विषय- ‘चुनावी राजनीति और साहित्यकार’ रहा है।

गोष्ठी का आरम्भ सुश्री मोहिनी गुप्ता जी के सरस्वती वंदना गायन से हुआ। सभा के लिए स्वागत् उद्बोधन डॉ सुमनलता ने किया। तत्पश्चात रेखाअग्रवाल ने विषय परिचय के लिए डाॅ सुमनलता जी को आमंत्रित किया। आपने इतिहास के कुछ उदाहरण देते हुए बताया कि साहित्यकार को राजनीति से विलग नहीं रखा जा सकता। भारत, फ्रांस और विश्व के अन्य देशों में भी सदा ही साहित्यकार ने राजनीति को नई दिशा दिखाने का कार्य किया है।

मध्य युग में भी साहित्यकार राजनीति से सम्बद्ध रहे हैं। कभी राज्याश्रय में रह कर कभी स्वतंत्र रह कर किया गया। अमीर खुसरो से बाद तक भी यह प्रथा जारी रही है। लेकिन हमारे पास कई ऐसे साहित्यकार रहे हैं जो सक्रिय राजनीति में संलग्न रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी, वी पी सिंह और कुमार विश्वास और अन्य शामिल है। सभी ने राजनीतिक चुनावों तक को प्रभावित किया है। चुनावी राजनीति में किसी भी राजनीतिक पार्टी के किये गये कार्यों को जनता के आगे बढाया जाता है। अथवा जनता को जागरूक भी किया जाता है।

विषय के प्रमुख हमारे प्रवक्ता अभिजित पाठक रहे हैं। आपने साहित्यकार की सक्रियता को राजनीतिक गतिविधियों से अभिन्न बताया। आपने यह भी बताया कि साहित्यकार राजनीति की गहराइयों से जनता को परिचित कराये, समय-समय पर मार्गदर्शन का कार्य भी करें, लेकिन स्वयं सक्रिय राजनीति में समाहित न हो जाये। स्वमं अगर वह शामिल हो जाता है तो अपनी महत्वाकांक्षाओं के चलते निष्पक्ष नहीं रह पायेगा। मध्य युगीन भारत से मुगलकाल और ब्रिटिश शासन तक साहित्यकार ने जन जागरण का कार्य किया है। रामधारी सिंह दिनकर जी, अटल बिहारी वाजपेयी जी और कुमार विश्वास ने सक्रिय राजनीति में भाग लेते हुए भी जनता के हितों को सर्वोपरि रखा है।

तत्पश्चात समिति की महामंत्री सुनीता लुल्ला ने अपने वक्तव्य में कहा कि साहित्यकार समाज से अछूता नहीं रह सकता। सक्रिय राजनीति और चुनावी माहौल में अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। नकारात्मक राजनीतिक गतिविधियों से भी जनता को जागरुक रखे ताकि सही पक्ष का चुनाव किया जा सके जो राष्ट्र हित में रहे। मंजू भारद्वाज ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि उन्होंने अपने आलेख इत्यादि लिख कर समाचार पत्र औ पत्रिकाओं द्वारा जन जागरण का कार्य किया।

गोष्ठी के द्वितीय सत्र का संचालन विनोद गिरि अनोखा ने किया। उपस्थित सभी कवियों ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया। इंदु सिंह, मंजू भारद्वाज, अभिजित पाठक, चंद्र प्रकाश दायमा, दर्शन सिंह मोहिनी गुप्ता, आर्या झा, पूजा महेश, विनोद गिरि अनोखा, रेखा अग्रवाल, सुनीता लुल्ला और सुमनलता जी ने स्वरचित काव्य पाठ किया।

डॉ सुमन लता ने अध्यक्षीय उद्बोधन में सभा में उपस्थित सभी कवियों के काव्य पाठ की सराहना की। अंत में सुश्री आर्या झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया और सभा के समापन की घोषणा की गई।

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