19 नवंबर को महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती है। लक्ष्मीबाई को झांसी की रानी के नाम से जाना जाता है। वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक अद्भुत और प्रेरणादायक क्रांतिकारी थीं। उनका जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका तांबे था। बचपन से ही वह साहस और योग्यता की मिसाल थीं। वह युद्ध-कला, तलवारबाजी और घुड़सवारी में निपुण थीं।
1853 में उनके पति महाराजा गंगाधर राव का निधन हुआ। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने “Doctrine of Lapse” के तहत झांसी पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की। लक्ष्मीबाई ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने झांसी की स्वतंत्रता और अपने प्रजा की सुरक्षा के लिए हथियार उठाया और 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई।
रानी लक्ष्मीबाई ने एक शक्तिशाली सेना तैयार की जिसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी भाग लिया। उन्होंने युद्ध में अपने बेटे दामोदर राव को पीठ पर बांधकर, खुद पुरुषों की तरह युद्धभूमि में उतर कर अंग्रेज़ी फौज का साहसपूर्वक मुकाबला किया। उनकी बहादुरी, रणनीति और नेतृत्व ने अंग्रेजों के लिए झांसी को जीतना कठिन बना दिया।
1857 और 1858 के बीच झांसी पर कईं बार हमला किये गये। रानी ने वीरता का परिचय दिया। अंतिम युद्ध ग्वालियर के पास हुआ। 18 जून 1858 को उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनका यह बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन गया।
महारानी लक्ष्मीबाई केवल एक रानी या योद्धा नहीं थीं, बल्कि एक नारी संघर्ष की एक ऐसी मिसाल थीं। उन्होंने यह साबित किया कि महिलाएं भी देश की स्वतंत्रता के लिए सबसे संघर्ष कर सकती हैं। उनका जीवन साहस, बलिदान, मातृत्व और देशभक्ति की जीवंत गाथा है। उनकी क्रांतिकारी संघर्ष ने आधुनिक भारत की स्वतंत्रता की नींव रखी और वे सदैव भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
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रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी हमें यह सीख देती है कि नायक केवल पुरुष होते हैं, बल्कि महिलाओं के लिए साहसी और निडर रहने का संदेश देता है। साथ ही नारी भी इतिहास रच सकती है। उनका संघर्ष और साहस हर देशभक्त के लिए अपार प्रेरणा है। उनकी कहानी भारत की गौरवशाली आज़ादी की अमर गाथा में एक स्वर्णिम अध्याय है।

– कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’
कवि,लेखक, अनुवादक
9848493223
