हैदराबाद/वॉशिंगटन: वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल को डोनाल्ड ट्रंप को दे दिया है। मचाडो ने अपने देश के भविष्य पर चर्चा के लिए गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वॉइट हाउस में मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद मचाडो ने कहा कि मैंने अमेरिका के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार मेडल पुरस्कार दिया। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के प्रति ट्रंप का अनोखी प्रतिबद्धता के पहचान के तौर पर उठाया गया कदम बताया। मचाडो की ट्रंप से मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई करके वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को आधी रात को अपहरण कर लिया था।
मेडल देने के बारे में जानकारी देते हुए मचाडो ने लैटिन अमेरिका के महान क्रांतिकारी सिमोन बोलिवर का एक किस्सा सुनाया। मचाडो ने कहा कि दो साल पहले जनरल मार्क्विस डी लायाफेट ने सिमोन बोलिवर को एक मेडल दिया था, जिस पर जॉर्ज वॉशिंगटन का चेहरा बना हुआ था। बोलिवर ने वह मेडल अपनी बाकी जिंदगी अपने पास रखा। उन्होंने आगे कहा, “इतिहास में दो साल बाद, बोलिवर के लोग वॉशिंगटन के वारिस को एक मेडल वापस दे रहे हैं। इस बार नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल, हमारी आजादी के प्रति उनकी अनोखी प्रतिबद्धता की पहचान के तौर पर।”

सिमोन बोलिवर का नाम दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप में बहुत सम्मान से लिया जाता है। वेनेजुएला के काराकस में 1783 में जन्में बोलिवर ने कई लैटिन अमेरिकी देशों को आजादी दिलाई। सिमोन बोलिवर के सम्मान में वेनेजुएला का आधिकारिक नाम बोलिवेरियन रिपब्लिक ऑफ वेनेजुएला रखा गया है। इसके अलावा बोलीविया देश का नाम भी उनके सम्मान में रखा गया है।

ट्रंप लंबे समय से नोबेल पुरस्कार पाने की खुलेआम ख्वाहिश जाहिर करते रहे हैं। वह खुद को पुरस्कार न देने के लिए नोबेल कमेटी और नॉर्वे की सरकार को निशाने पर लेते रहे हैं। ट्रंप की लगातार बयानबाजी के बावजूद पिछले साल नोबेल कमेटी ने शांति पुरस्कार के लिए मचाडो के नाम की घोषणा की थी। पुरस्कार जीतने के बाद मचाडो ने इसे ट्रंप को समर्पित किया था। इस बीच नोबेल कमेटी ने एक बार फिर कहा है कि नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल किसी को दिया जा सकता है लेकिन पुरस्कार ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।
नोबेल पीस सेंटर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मेडल को बेचा जा सकता है या किसी को दिया जा सकता है। इसमें बताया गया, “जैसा कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी कहती है: एक बार जब नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो जाती है तो इसे रद्द नहीं किया जा सकता, साझा नहीं किया जा सकता या दूसरों को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। यह फैसला अंतिम होता है और हमेशा के लिए मान्य होता है।” इसने आगे कहा कि एक मेडल मालिक बदल सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का खिताब नहीं बदल सकता।
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నోబెల్ శాంతి బహుమతి ట్రంప్ కు అందజేత
హైదరాబాద్ : వెనుజువెలా ప్రతిపక్ష నాయకురాలు మారియా కొరినా మచాడో గురువారం వైట్ హౌజ్లో ట్రంప్ని కలిశారు. ఈ సందర్భంగా తన నోబెల్ శాంతి బహుమతి పురస్కారాన్ని ట్రంప్ నకు అందజేశారు. సమావేశం అనంతరం ఈ విషయాన్ని మచాడో స్వయంగా మీడియాకు వెల్లడించారు.
ఈ సందర్భంగా మచాడో మాట్లాడుతూ ‘చరిత్రలో రెండు వందల ఏళ్ల తర్వాత, బొలివర్ వారసులు వాషింగ్టన్ వారసుడికి ఒక పతకాన్ని తిరిగి ఇస్తున్నా. ఇది మన స్వేచ్చ పట్ల ఆయన ప్రత్యేక నిబద్ధతకు గుర్తింపుగా నా నోబెల్ శాంతి బహుమతిని ట్రంప్ నకు అందజేస్తున్నా’ అని వ్యాఖ్యానించారు. వెనుజువెలా అధ్యక్షుడు నికోలస్ మదురో, ఆయన భార్యను ఇటీవల అమెరికా సైనిక దళాలు అదుపులోకి తీసుకున్న కొన్ని రోజులకే ఈ పరిణామాలు చోటు చేసుకోవడం ప్రపంచ వ్యాప్తంగా చర్చనీయాంశంగా మారింది.
మచాడోతో భేటీ అనంతరం ట్రంప్ స్పందిస్తూ ‘మారియా కొరినా మచాడోను కలవడం నాకు ఎంతో సంతోషంగా ఉంది. ఆమె ఎన్నో కష్టనష్టాలను ఎదిరించి నిలిచిన గొప్ప మహిళ, ఇన్నాళ్ళు ప్రపంచ శాంతి కోసం నేను చేసిన కృషిని గుర్తించి ఆమె తన నోబెల్ పురస్కారాన్ని నాకు బహుమతిగా ఇచ్చారు. థ్యాంక్యూ మరియా అంటూ తన ట్రూత్ సోషల్ వేదికగా తెలిపారు.
గత ఏడాది అమెరికా అధ్యక్షులు డోనాల్డ్ ట్రంప్ తనకు నోబెల్ శాంతి బహుమతి ఇవ్వాలని దానికి తాను పూర్తి అర్హుడని నానా హంగామా చేశారు. కానీ, నోబెల్ బహుమతి మాత్రం ట్రంప్నకు దక్కలేదు. 2025 లో నోబెల్ బహుమతి వెనుజువెలా ప్రతిపక్ష నేత కొరినా మచాడోకి దక్కింది. (ఏజెన్సీలు)
