माओवादी हरिभूषण की मौत पर फूट-फूट कर रो पड़ी विधायक सीतक्का, बीते दिनों को किया याद और परिवार को दी सांत्वना

हैदराबाद : मुलुगु विधायक और कांग्रेस पार्टी की नेता सीतक्का ने माओवादी नेता हरिभूषण की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सीताक्का ने कहा कि हरिभूषण की मृत्यु बहुत ही दुखद घटना है। वह आम लोगों के आदमी थे। हरिभूषण की मृत्यु की खबर सुनकर सीतक्का गुरुवार को महबूबाबाद जिले के गंगाराम मंडल के मेडगुडेम स्थित उनके घर परिवार से मिलने गई।

इस अवसर पर सीतक्का ने हरिभूषण के परिवार के सदस्यों को पकड़कर फूट-फूट कर रो पड़ी और परिवार को सांत्वना दी। इस दौरान सीताक्का ने याद किया कि जब हरिभूषण पाकाला कोत्तागुडा क्षेत्र में टीम लीडर थे, तब उनके साथ इस क्षेत्र के लोगों के अधिकारों के लिए किये जा रहे आंदोलन में काम किया।

गौरतलब है कि विधायक सीतक्का करीब दो दशक से अधिक समय तक नक्सली आंदोलन में काम किया। दनसरी अनसूया उर्फ ​​सीतक्का तत्कालीन मुख्यमंत्री एनटी रामाराव के आह्वान पर नक्सली आंदोलन छोड़कर लोकतांत्रिक मुख्य धारा में शामिल हो गई। बाहर आने के बाद सीतक्का ने एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह टीडीपी में शामिल हो गई और साल 2009 हुए चुनाव में विधायक चुनी गई।

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आपको बता दें कि गुरिल्ला युद्ध व्यूह रचना में माहिर माओवादी नेता, तेलंगाना के सचिव और केंद्रीय समिति के सदस्य 50 वर्षीय यापा नारायण उर्फ ​​हरिभूषण उर्फ ​​जगन की कोरोना के कारण मौत हो गई। साथ ही एक अन्य माओवादी नेता इंद्रावती क्षेत्र समिति की सदस्य सिद्दीबोइना सरक्का उर्फ ​​भारतक्का भी कोरोना संक्रमण के वजह से दम तोड़ दिया।

माओवादियों ने गुरुवार को इस बात की पुष्टि की है। बताया गया है कि पुलिस की गोलीबारी में हरिभूषण अनेक बच निकले थे। लेकिन कोरोना से नहीं बच पाये। हरिभूषण रेडिकल स्टूडेंट यूनियन (आरएसयू) के लिए काम करते हुए 1991 में नक्सली आंदोलन में शामिल हो गये। साल 1996 में वह खम्मम जिला समिति के सदस्य बन गये। 1998 में उत्तरी तेलंगाना में पहली प्लाटून की जिम्मेदी संभाली।

साल 2000 में प्रोटेक्शन प्लाटून में उसे भेज दिया गया। साल 2005 में स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य के रूप में पदोन्नति दी गई। 2015 में राज्य समिति के सचिव और नवंबर 2018 में केंद्रीय समिति के सदस्य के रूप में चुने गये। केंद्रीय समिति ने हरिभूषण की सेवाओं को देखते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ बदली कर दिया। वहां पर वह सभी नक्सलियों को युद्ध संघर्ष का प्रशिक्षण दिया।

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