हैदराबाद/सुकमा: माओवादी माडवी हिडमा की मुठभेड़ पर नया विवाद खड़ा हो गया है। बस्तर राज मोर्चा के संस्थापक, आदिवासी नेता और पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने आरोप लगाया कि हिडमा की मौत किसी मुठभेड़ का परिणाम नहीं है। यह नक्सली संगठन के भीतर सत्ता संघर्ष का हिस्सा है। साथ ही उन्होंने इसे फर्जी एनकाउंटर भी बताया। मनीष ने आगे कहा कि हिडमा केवल तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के माओवादी नेताओं के इशारों पर काम करता था
कुंजाम ने शुक्रवार को मीडिया से कहा कि हिडमा आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की तैयारी कर चुका था। हालांकि संगठन के शीर्ष नेताओं को यह बात स्वीकार नहीं थी। हिडमा का आत्मसमर्पण संगठन की शक्ति और नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा झटका होता। इसी डर और वर्चस्व की लड़ाई में देवजी के इशारे पर साजिश रची गई और उसे योजनाबद्ध तरीके से खत्म कर दिया गया। आदिवासी नेता ने आगे कहा कि अगर यह सच्ची मुठभेड़ है, तो अभी तक पारदर्शी सबूत और प्रत्यक्ष प्रमाण सामने क्यों नहीं आए? इस घटना की स्वतंत्र जांच कर वास्तविकता सार्वजनिक की जाए।

इसी क्रम में कुंजाम ने जंगलों में सक्रिय माओवादी साथियों से सीधे संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि देवा बारसे, ऐरा और बाकी साथियों से मेरी अपील है कि वे हथियार छोड़ें और सुकमा में ही आत्मसमर्पण करें। आंध्रप्रदेश या तेलंगाना मत जाएं। मैं पुलिस से बात करूंगा और जरूरत पड़ी तो खुद आपको लेने जंगल जाऊंगा। अब लौटने का समय है।
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पूर्व विधायक ने आरोल लगाया है कि माओवादी वरिष्ठ नेता देवजी ने ही हिड़मा को मरवाया है। उसके बाद उसने 50 नक्सलियों को गिरफ्तार करवाया और वहां से बचकर निकल गया है। फिलहाल देवजी आंध्रप्रदेश में छिपा हुआ है और वह सरकार की देखरेख में सुरक्षित है। देवजी पर एक करोड़ रुपये से ज्यादा का इनामा है। मनीष कुंजाम ने यह भी दावा किया कि झीरम घाटी हमले में हिडमा का हाथ नहीं था। बस्तर में हुई सारी बड़ी घटनाओं का मास्टरमाइंड हिडमा को कहा जाता है। लेकिन सच्चाई ये है कि यह सारे हमले आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के माओवादी करवाते हैं। यहां के युवकों को बदनाम करने के लिए इस तरह का काम करते हैं।
मनीष कुंजाम ने आरोप लगाया कि हिडमा को मरवाने की पूरी साजिश देवजी ने ही रची थी। वही बस्तर से हिड़मा को लेकर आंध्र प्रदेश गया था। उसके बाद वहां की पुलिस को उसने हिमा के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने हिडमा का एनकाउंटर कर दिया। देवजी ने अपना वजूद बढ़ाने के लिए ही ऐसा किया है। मनीष कुंजाम ने यह भी आरोप लगाया कि हिमा को पकड़कर मारा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ताड़मेटला में 76 जवानों की हत्या का मास्टरमाइंड हिमा को बताया जाता है। लेकिन उस समय उस इलाके का सब जोनल सेक्रेटरी रामन्ना था। सवाल किया कि फिर वह मास्टरमाइंड कैसे हो सकता है?
आपको बता दें कि हिडमा के एनकाउंटर के बाद टॉप नक्सली लीडर देवजी के एनकाउंटर की भी खबरें आई थीं। हालांकि बाद में सुरक्षाबल के जवानों ने इस दावे को फर्जी बताया था। पुलिस ने देवजी के एनकाउंटर की खबरों को खारिज कर दिया। हि़डमा का अंतिम संस्कार गुरुवार को उसके पैतृक गांव पूवर्ती में किया गया है। हिडमा सुकमा जिले का रहने वाला था। हिड़मा के एनकाउंटर के दौरान सुरक्षाबल के जवानों पूरे गांव में तैनात है।
