जैन कवि-साहित्यकारों का महाकुंभ संपन्न, आपने लगाये चार चांद

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जैन विभूतियों का जिनशासन के प्रति समर्पण श्लाघनीय है – हुकुमचंद सांवला
जैन कवि-साहित्यकार अभिनंदनीय हैं – यति कुमार विजय
जिनशासन को जैन साहित्य संगम पर गर्व है – विजय सुराणा

उदयपुर : अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम का तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन 13 से 15 सितम्बर को अनेकानेक उपलब्धियों के कीर्तिमान स्थापित करते हुए सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। राजस्थान के कामलीघाट चौराहे पर स्थित मेवाड भवन के प्राकृतिक विशाल परिसर में आयोजित इस राष्ट्रीय अधिवेशन-2025 का मंगल शुभारंभ मुख्य अतिथि हुकुमचंद सांवला (पूर्व अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद्), ज्योतिषाचार्य यति कुमार विजय, विधायक लादूलाल पितलिया, समाजसेवी विजय सुराणा (अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष जैना ग्लोबल) ने भगवान बाहुबली की विशाल प्रतिमा के समक्ष ध्वजारोहण करके किया।

मेवाड भवन के विशाल सरस्वती-सभागार में 13 सितम्बर को आयोजित उद्घाटन सत्र का शुभारंभ अतिथियों व संस्था के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन करके किया। अतिथियों और जैन कवि-साहित्यकारों का स्वागत अधिवेशन के संयोजक डॉ प्रकाश दक ने किया। इससे पहले देश भर पधारे 150 से अधिक कवि-साहित्यकार, अतिथि नाचते-गाजते मुख्य द्वार से भगवान बाहुबली के समक्ष पहुँचे और प्रभु वन्दना की। मुख्य अतिथि हुकुमचंद सांवला ने ओजस्वी शैली में उद्बोधन देते हुए जिनशासन और भारत देश में जैन श्रेष्ठीवर्यों, समाजसेवियों के अविस्मरणीय अनुपम योगदान को प्रामाणिक रूप से बताया। सांवला ने कहा कि जैन विभूतियों का योगदान श्लाघनीय रहा है। आपने जिनधर्म और जिनवाणी को हृदयंगम करके सच्चे श्रमणोपासक बनने पर बल दिया। आपके उद्बोधन में अनवरत तालियाँ बजती रही व जिनशासन जयकार के नारे लगते रहे।

संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप जैन “हर्षदर्शी” ने संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए मनहरण कवित्त सुनाया। आपने संस्था की विशिष्ट उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए भविष्य में क्रियान्वित होने वाली योजनाओं के बारे में अवगत करवाया। ज्योतिषाचार्य यति कुमार विजय ने जिनवाणी के प्रचार-प्रसार में अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम की भूमिका की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए 2027 का राष्ट्रीय अधिवेशन जोधपुर में करने का आह्वान किया। जैना ग्लोबल के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विजय सुराणा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम पर हम सभी को गर्व है। जैन कवि-साहित्यकारों को आगे लाकर उन्हें मंच और मान देने की दिशा में कार्य करना अनुमोदनीय व अभिनन्दनीय है।

समारोह में समस्त अतिथियों का माला, शॉल, साफा व प्रतीकचिह्न प्रदान कर अभिनंदन किया गया। आभार राष्ट्रीय महामंत्री मनोज मनोकामना ने व्यक्त किया। समारोह का सुन्दर प्रभावक संचालन संगीता बागरेचा “संगी” मुम्बई ने किया। समारोह के प्रारंभ में शकुन डागा ने नवकार वंदना की व वरिष्ठ कवि-गीतकार कैलाश जैन “तरल” ने मधुर स्वर में अरिहंत वन्दना सुनाई।

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अधिवेशन के दूसरे सत्र में पधारे हुए कवि-साहित्यकारों ने क्रमशः अपना परिचय व उपलब्धियों से सभी को अवगत कराया। इस अवसर पर कपूरचंद सेठिया की कृति माता-पिता जीवन के भगवान व भजन रत्नावली, पायल कोठारी की कृति जिन्दगी के रंग व अहसास, संगीता बागरेचा ‘संगी’ के ग्रंथ मेरे गुरुवर दर्शनसागरजी एवं रेनू सिरोया की कृति काव्य कुमुदिनी कृतियों का विमोचन कैलाश जैन तरल, राजेन्द्र कांठेड, जगदीप जैन “हर्षदर्शी”, राजा जैन, रमेश बोहरा, विनोद बाफना, अमित मरडिया, प्रकाश दक, मनोज मनोकामना, विजयसिंह नाहटा द्वारा किया गया। देश भर में संचालित इकाईयों द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए संचालित गतिविधियों व भावी योजना के बारे में बताया। समारोह का काव्यमयी संचालन जयंतीलाल जैन जागरूक ने किया। प्रारंभ में मंगलाचरण रेनू सिरोया ‘कुमुदिनी’ ने किया।

अधिवेशन के तीसरे सत्र में देश के कोने-कोने से पधारे कवि-कवयित्रियों द्वारा कवि सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें विविध रसों में काव्यपाठ किया। कवि सम्मेलन में देर रात तक काव्यरस बरसता रहा। इसका संचालन अमित मरडिया व चिराग चैतन्य ने किया। अधिवेशन के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में अधिवेशन के प्रायोजक मेवाड़ भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष भँवरलाल पितलिया, मंत्री गौतमचंद बोहरा एवं ताराचंद बांठिया आदि पदाधिकारियों का आत्मीय आतिथ्य के साथ आवास व स्वादिष्ट भोजन प्रदान करने के लिए भावभीना अभिनंदन माला, शॉल, प्रशस्ति-पत्र, नवकार फ्रेम आदि अर्पण कर किया गया। आदर्श इकाई का पुरस्कार तमिलनाडु शाखा, सर्वाधिक उपस्थिति पुरस्कार मध्यप्रदेश शाखा, संस्था के ग्रुप में नित्य लेखन के लिए गौतमचंद बोहरा को उपरणा, माला, प्रतीकचिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। संचालन विमल पितलिया-मैसूर ने किया।

विद्वद् संगोष्ठी में देश के प्रसिद्ध विद्वानों सर्वश्री विजयसिंह नाहटा-जयपुर, डॉ प्रकाश दक-मैसूर, पदमचंद गाँधी-भोपाल, डॉ सुभाष जैन-उज्जैन, डॉ अरूण जैन फरीदाबाद, खुशबू जैन हरियाणा ने विविध विषयों पर मर्मस्पर्शी व चिन्तनीय उद्बोधन दिए। विद्वद् संगोष्ठी का विद्वतापूर्ण संचालन डॉ सी. एम. मेहता जावरा ने किया। मंगलाचरण नीतू बाफना-कांकरोली व आठ वर्षीय बालिका सानवी जैन दिल्ली ने किया।

दूसरे सत्र में चन्दा डांगी द्वारा निर्देशित महिलाओं के द्वारा संस्कार शाला पाठशाला का उद्घाटन पर एक से बढ़कर एक शानदार भव्य नाटक व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुई। संस्कार शाला के नाटक-मुक्तक-गीत संगीता बागरेचा संगी द्वारा तैयार किए गए तथा नाटक का कविताओं और दोहों के माध्यम से सुंदर संचालन नीलम जैन “नीलजीत” के द्वारा प्रभावक रूप से किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत नीलम जैन “नीलजीत” ने माँ शारदे के गीत व नवकार महामंत्र को गाकर करते हुए की। संस्कार शाला का फीता काट कर नहीं बल्कि पाठशाला के द्वार खोल कर मंगला बोहरा, पानीदेवी पितलिया, लीला देवी बोहरा व इन्दुबाला हर्षदर्शी द्वारा शुभारंभ किया गया।

संस्कार शाला में पर्यावरण को स्वच्छ रखना, अन्न उतना ही ले थाली में व्यर्थ न जाए नाली में, सेल्फी विथ कल्चर नाटक सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया गया, इसमें नीलम जैन बाडमेर का जन्मदिन पारंपरिक तरीके से तिलक लगाकर, श्रीफल अर्पण कर, आरती करके मिठाई खिलाकर उपहार स्वरूप पर्यावरण किट देकर मनाया गया। डॉ. रेणु सिरोया व प्रतिभा सहलोत ने सत्य पर आधारित हरिश्चंद्र तारामती पर नाटक की भावविभोर कर देने वाली प्रस्तुति दी। श्रीमती शकुन डागा ने अनपढ़ बहू पर नाटक प्रस्तुत किया। डॉ. रेनू सिरोया कुमुदिनी, प्रतिभा सहलोत, ज्योत्स्ना पोखरना, कुसुम सुराणा, कनक पारख, कंचन, पायल, चंचल जैन,सलोनी भटेवरा, खुशबू जैन, पिंकी आदि महिलाओं ने कुव्यसनों पर कव्वाली प्रस्तुत सम्यग् संदेश दिया।

नीतू बाफन, इंदू जी डोसी, सीमा मनोकामना, शकुन डागा, कनक पारख, हर्षलता दूधोरिया आदि ने महावीरा को पास मैंने पाया और अनिता मेहता, चन्दा डांगी ने गीत व लीला देवी द्वारा बाबुल का ये घर गौरी गीतिका द्वारा भावपूर्ण गीत गाकर प्रस्तुतियां दी गई। मनीषा मरडिया व तमिलनाडु-इकाई की महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाकर सुन्दर प्रस्तुति दी। इस कड़ी में राजेश डागा ने नृत्य कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

अंत में चंदा डांगी ने समस्त प्रतिभागी महिला सदस्यों की लाजवाब प्रस्तुति देने के लिए आभार व्यक्त किया। महिला सांस्कृतिक कार्यक्रम में पर्यावरण स्वच्छ भारत, पॉलाथिन भारत छोड़ो, समाज में फैली हुई कुरीतियों-कुव्यसनों, नशा मुक्त भारत, मोबाइल में समय बर्बाद, संस्कार का हनन, पाश्चात्य वेशभूषा, वसुधैव कुटुम्बकम् विषयक नाटक गीत आदि की शानदार प्रस्तुतियाँ दी गई। अधिवेशन के अंतिम सत्र में लोकेश सरगम व अलंकार आच्छा के संचालन में कवियों ने लाजवाब काव्य प्रस्तुतियाँ दी। सागरमल सर्राफ का सेवा-सहकार के लिए सम्मान किया गया ।

अधिवेशन के तीसरे दिन गौतमचंद बोहरा के निर्देशन में दो बसों से अधिवेशन स्थल के निकट महाराणा प्रताप की अंतिम युद्धस्थल दिवस स्मारक व ट्रेन द्वारा गोरमघाट के नयनाभिराम दृश्य का भ्रमण कर आनंद लिया गया। अंत में पिपली गाँव स्थित बोहरा परिवार द्वारा संस्थापित विद्यालय में सुन्दर साधर्मिक भक्ति की गई। विद्यालय के सभागार में बोहरा परिवार की उदारता की अनुमोदना-अभिनंदन किया गया।

प्रकृति के मनोरम वातावरण में आयोजित इस त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देश भर से आए कवि-साहित्यकारों ने अपूर्व उत्साह से भाग लिया। समस्त अधिवेशन में पधारने वाली प्रतिभाओं का अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम द्वारा आकर्षक प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर अभिनंदन किया गया। अधिवेशन के सहसंयोजक व मेवाड भवन ट्रस्ट के मंत्री गौतमचंद बोहरा परिवार की ओर अधिवेशन प्रतिभागियों को मिठाई पैकेट वितरित किए गए। अधिवेशन में आवास व्यवस्था में प्रकाश दक व जयंतीलाल जैन तथा पंजीयन में सागरमल सर्राफ, डॉ. सी. एम. मेहता, जयंतीलाल जैन, तिलोक सहलोत, कमलेश जैन आदि ने सुन्दर सेवा-अर्पण की। अधिवेशन में समयोचित प्रसंगानुसार कविताओं से समा बाँध ने का जयंतीलाल जैन-मुम्बई ने सराहनीय सहयोग दिया। मुकेश जैन-जोधपुर व सुरेन्द्र मुणोत-कोलकाता अहिंसा क्रांति की टीम ने प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप जैन “हर्षदर्शी”, उपाध्यक्ष विजयसिंह नाहटा, महामंत्री मनोज मनोकामना, संयोजक डॉ. प्रकाश दक, सह संयोजक गौतमचंद बोहरा, वरिष्ठ संरक्षक कैलाश जैन तरल, राजेन्द्र कांठेड, विनोद बाफना एवं पदाधिकारियों ने मेवाड़ भवन ट्रस्ट व समस्त अधिवेशन में पधारने वालों का क्षमायाचना के साथ आभार व्यक्त किया। अधिवेशन के समापन पर सभी ने एक-दूसरे से गले मिलकर भावविभोर होकर अगले अधिवेशन में पुनः मिलने की कामना के साथ अश्रुपूरित विदाई दी।

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