20 नवंबर का दिन हिंदी साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। क्योंकि इस दिन का संबंध कवि कांत से जुड़ा है। जो हिंदी साहित्य के अद्वितीय कवि, आलोचक और विचारक रहे हैं। उनका वास्तविक नाम शिवप्रसाद शर्मा था, किंतु वे ‘कवि कांत’ के नाम से विख्यात हुए। उनका जन्म 20 नवंबर 1867 को गुजरात के गांधीनगर क्षेत्र में हुआ था। कवि कांत का असली नाम मणिशंकर रत्नजी भट्ट था
कवि कांत ने हिंदी साहित्य को अनेक अद्भुत काव्य रचनाएँ दी है। इनमें उन्होंने मानव जीवन की विविध अनुभूतियों, सामाजिक बंधनों और आध्यात्मिक प्रश्नों को अभिव्यक्त किया। उनका साहित्य भावनाओं की गहराई और दार्शनिकता का अनुपम संगम है। उनकी कविताओं में प्रेम, नैतिकता, प्रकृति की सुंदरता, देशभक्ति और जीवन के दार्शनिक पहलुओं का सजीव चित्र मिलता है। उनकी प्रसिद्ध काव्य पुस्तक ‘प्रेम सदन’ का हिंदी कविता में विशेष स्थान है। यह संग्रह मानवीय भावनाओं का दुर्लभ समन्वय प्रस्तुत करता है। कवि कांत की भाषा प्रवाही, सरल और अर्थपूर्ण है, जो हर वर्ग के पाठक को सहजता से संपर्क करती है।
कवि कांत का योगदान केवल काव्य लेखन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने हिंदी आलोचना और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने युग के सामाजिक और नैतिक प्रश्नों पर गंभीर चिंतन किया और हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी। कवि कांत का व्यक्तित्व संस्कारी, संयमी और विचारशील था। उन्होंने साहित्य के माध्यम से समाज सुधार और मानवता की सेवा को सर्वोपरि माना। उनकी रचनाएँ आज भी हिंदी साहित्य के अध्ययन और चिंतन के लिए प्रासंगिक हैं।
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कवि कांत की साहित्यिक विरासत हमें यह सिखाती है कि कविता केवल मनोभावों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक और दार्शनिक प्रतिबद्धता का माध्यम भी हो सकती है। 20 नवंबर के दिन हिंदी साहित्य जगत में उनका जन्मोत्सव एक अवसर है। जब हम उनकी कविताओं के माध्यम से जीवन के उच्च आदर्शों और गहन संवेदनाओं को समझ सकते हैं। कवि कांत हिंदी साहित्य के विशाल मंदिर में एक ऐसे वीणा पाणि के समान हैं, जिनकी मधुर आवाज़ सदैव अनुगूँज बनी रहेगी। उनके काव्य संसार में प्रवेश एक आत्मसात् अनुभव है, जो पाठक को मानवीय संवेदनाओं और जीवन के रहस्यों के करीब ले जाता है।
इसलिए हिंदी साहित्य का यह दिन कवि कांत के योगदान को सम्मानित करने और उनके विचारों को पुनःजीवित करने का दिन है। उनकी रचनाओं में छिपी गहनता और सौंदर्य हमें साहित्य की सार्थकता की याद दिलाती है और हिंदी संस्कृति को समृद्ध करती है। इसीलिए कवि कांत की रचनाएं आने वाली पीढ़ी को नई दिशा देती रहेगी।

– कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’
कवि,लेखक, अनुवादक
9848493223
