कादंबिनी क्लब की 400वीं मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन, रेडियो की गुदगुदी से पुरानी यादें हो गई ताजा

हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में 16 नवंबर को गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाईन संगोष्ठी का सफल आयोजन डॉ मदनदेवी पोकरणा की अध्यक्षता में किया गया। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए डॉ अहिल्या मिश्र (क्लब अध्यक्षा) एवं मीना मुथा (कार्यकारी संयोजिका) ने संयुक्त रूप से बताया कि प्रथम सत्र का आरंभ प्रवीण प्रणव (संगोष्ठी सत्र संयोजक) द्वारा निराला रचित सरस्वती वंदना से हुआ।

डॉ अहिल्या मिश्र ने पटलपर उपस्थित सभी साहित्यकारों का शब्दकुमुमों से स्वागत करते हुए 400वीं मासिक गोष्ठी तक की दीर्घ यात्रा के लिए सभी का साथ एवं सहयोग हेतु कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह 32 वर्षों की गहन तपस्या और मेहनत का फल है जो हम आज 400वीं गोठी की मंजिल को छू पाए हैं। स्वास्थ्य की वजह से हम इसका भव्य आयोजन नहीं कर पाये पर ईश्वर ने चाहा तो जनवरी में हम इसका ऑफलाइन भव्य आयोजन करेंगे।

प्रथम सत्र में सीमा कुमारी (कार्यक्रम निदेशक आकाशवानी हैदराबाद) “रेडियो और हिन्दी एक अटूट रिश्ता” विषय पर बात रखेंगी यह बताते हुए डॉ आशा मिश्र ने सीमा कुमारी के परिचय से पटल को अवगत कराया और क्लब से सभी को इसी तरह हमेशा जुड़े रहने की अपील की। सीमा कुमारी ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखते हुए कहा कि जन जन की बात के लिए रेडयो से बढ़िया माध्यम कुछ नहीं है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी “मन की बात” रेडिओ प्रसारण से ही कर रहे हैं। रेडियो भावनात्मक पुल है जिसके माध्यम से हम बुजुर्गों से युवाओं तक पहुँच सकते हैं। भाषा की मर्यादा, शालीनता, सुंदरता, स्पष्टता, शुद्धता, सरलता का प्रसार भारती पूर्णतः ख्याल रखता है। हिंदी को जनभाषण से राष्ट्रीय भाषा तक पहुंचाना रेडिओ का अपना लक्ष्य रहा है। उन्होंने रेडियो के आरंभिक दौर से लेकर अब तक हिंदी के लिए किए गए कार्यों का ज़िक्र किया और इसके योगदानों से सबको अवगत कराया।

संबंधित खबर-

संगोष्ठी सत्र संयोजक अवधेशकुमार सिन्हा ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि बिहार में ये माहौल होता था कि लोहा सिंह का नाटक रेडियो पर प्रसारित होने के समय रेडियो के इर्द गिर्द भीड़ इकटठा हो जाती थी। टेलीविज़न आने के बाद रेडियो की लोकप्रियता में कमी आने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की और मुख्य वक्ता से इसकी वापसी कैसे की जाए विचार जानना चाहा। विचार व्यक्त करते हुए सीमा कुमारी ने सर्वे की चर्चा की और कहा कि रेडियो अपने अलग-अलग रूपों में आज भी उतनी ही लोकप्रिय है जितनी पहले थी। इस परिचर्चा में डॉ अहिल्या मिश्र, सुनीता लुल्ला, मीरा ठाकुर, मीना मुथा, प्रवीण प्रणव आदि ने भाग लिया और अपनी यादें साझा कीं। डॉ आशा मिश्र ‘मुक्ता’ने सत्र का आभार व्यक्त किया और कहा कि आज हम यादों की दुनिया में खो गए और इसके लिए सीमा कुमारी को धन्यवाद दिया।

उषा शर्मा की अध्यक्षता में द्वितीय सत्र में कवि गोष्ठी आयोजित की गयी। जिसमें तृप्ति मिश्रा, रचना चतुर्वेदी, शीला भनोत, दर्शन सिंह, विनोदागिरी अनोखा, गजानन पांडे, डॉ संगीता शर्मा, सुनीता लुल्ला, सीमा कुमारी, अंशु श्री सक्सेना, मीरा ठाकुर, वर्षा शर्मा, शोभा देशपांडे, डॉ अहिल्या मिश्र, प्रवीण प्रणव, डॉ कृष्णा सिंह, रेखा अग्रवाल, चंद्रप्रकाश दायमा, बी बालाजी, मीना मुथा ने काव्यपाठ किया। उषा शर्मा ने अध्यक्षीय टिप्पणी देते हुए कहा कि सभी की रचनाएं सराहनीय रही हैं। विशेषतः युवा वर्ग सक्रीय हैं हिन्दी साहित्य की ओर यह अच्छी बात है। अध्यक्षीय काव्यपाठ के साथ उन्होंने अपनी बात को विराम दिया। मधु भटनागर, डॉ सुषमादेवी, मोहिनी गुप्ता, डॉ सुपर्णा मुखर्जी, सरिता दीक्षित, शिल्पी भटनागर, के राजन्ना आदि की उपस्थिति रही। प्रवीण प्रणव ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। विनोद गिरी अनोखा ने काव्य सत्र का आभार व्यक्त किया। मीना मुथा ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

Recent Comments

    Archives

    Categories

    Meta

    'तेलंगाना समाचार' में आपके विज्ञापन के लिए संपर्क करें

    X