हैदराबाद/तेहरान: इजरायल के एक भीषण हवाई हमले में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के इंटेलिजेंस चीफ मेजर जनरल सैयद माजिद खादेमी मारे गए हैं। ईरान की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की गई है। सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि सुबह तड़के हुए एक हमले में खादेमी की मौत हो गई। बयान में यह नहीं बताया गया कि उनकी मौत कहां हुई।
ईरान के आधिकारिक बयान में आगे कहा गया कि जनरल खादेमी ने लगभग 50 वर्षों तक सेवा की थी और इंटेलिजेंस और सुरक्षा सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। बयान में आगे कहा गया कि ईरान में दुश्मनों की घुसपैठ को रोकने और शासन की सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करने के प्रयासों से निपटने में उनकी अहम भूमिका थी।
खादेमी उन हाई-रैंकिंग अधिकारियों में सबसे नए हैं जिनकी हत्या की गई है। पिछले महीने, इजरायल ने दो दिनों के भीतर ही ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी, जिन्हें दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद देश का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता था उन्हें और खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब को निशाना बनाया था। वो पिछले साल जून में ही आईआरजीसी के खुफिया सेवा के प्रमुख नियुक्त किए गये थे। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। इन हमलों में उन्होंने ईरान के कई शीर्ष अधिकारियों को मार गिराया है। जिनमें आईआरजीसी प्रमुख मोहम्मद पाकपुर, बासिज बल के प्रमुख गुलामरेज़ा सुलेमानी और रक्षा मंत्री अजीज नासिरज़ादेह शामिल हैं।
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आपको बता दें किअमेरिका और इजरायल ने नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई को भी मारने की कसम खाई है। मुजतबा 28 फरवरी को हमले की शुरुआती कार्रवाई में मारे गए पिछले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं। आईआरजीसी के खुफिया प्रमुख जनरल खादेमी की छवि एक कट्टरपंथी नेता की थी। उन्हें विशेष रूप से विदेशी जासूसी को रोकने और आंतरिक विरोध को कुचलने के लिए जाना जाता था। उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का अत्यंत करीबी और वफादार माना जाता था। उनकी मुख्य जिम्मेदारी आईआरजीसी के भीतर बाहरी घुसपैठ (खासकर मोसाद) को रोकना और संगठन की गोपनीयता बनाए रखना थी। (एजेंसियां)
