हैदराबाद : ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जंग जारी है। इसी क्रम में अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब दे रहे ईरान को बड़ी सफलता मिली है। ईरान ने एक ड्रोन हमले में सऊदी अरब स्थित अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के स्टेशन को उड़ा दिया है। सीआईए का स्टेशन रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास में मौजूद था। हालांकि इस बात का पता नहीं चल पाया है कि उसकी मौत हो गई या नहीं।
खबर है कि संदिग्ध ड्रोन ने सीआईए स्टेशन पर हमला किया। यह हमला ऐसे समय में किया गया है जब पता चला है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ईरान में विद्रोह भड़काने के लिए कुर्द लड़ाकों को हथियार देने की योजना बना रही है। हमले से ठीक दो दिन पहले अमेरिकी और इजरायल हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इस हमले के लिए लोकेशन सीआईए ने जुटाई थी।

वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में विदेश विभाग के इंटरनल अलर्ट का जिक्र किया है। इससे पता चलता है कि ड्रोन हमले में सीआईए स्टेशन का एक हिस्सा गिर गया और परिसर धुएं से भर गया। स्टेशन को ढांचागत नुकसान भी हुआ है। अमेरिका और सऊदी अरब ने बताया कि दो ड्रोन ने दूतावास कॉम्प्लेक्स पर हमला किया। हालांकि यह नहीं बताया कि सीआईए स्टेशन पर कोई असर पड़ा था।
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गौरतलब है कि शनिवार को इजरायल और अमेरिका के हमले में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान भड़का हुआ है। तेहरान ने इजरायल और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सहयोगियों के खिलाफ लगातार हमले कर रहा है। मंगलवार को ऐसे ही एक ड्रोन हमले में दुबई में अमेरिकी कॉन्सुलेट हिल गया, जब एक बड़े धमाके से वहां आग लग गई। इसके पहले कुवैत में अमेरिकी बेस पर हमले में 6 सैनिक मारे गए थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को ईरान पर हमले का आदेश दिया था। शुरुआती स्ट्राइक में सुप्रीम लीडर समेत बड़े नेताओं को मार दिया गया, जो बड़ी सफलता थी। लेकिन ईरान ने अब जिस तरह से जवाब दिया है, उसने वॉइट हाउस को हैरान कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ईरान अपने पड़ोसियों पर हमला करेगा, जो इस अभियान में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
ईरान के पास बड़ी मात्रा में हथियार है। उसने यह हमला ऐसे समय में किया गया है जब अमेरिका ईरान पर हमला करने के लिए कुर्द नेताओं से बात कर रहा है। ईरानी कुर्द मिलिशिया के पास इराक-ईरान बॉर्डर पर हजारों सैनिक हैं, जिन्हें उत्तरी इलाके के कुर्दिस्तान इलाके में समर्थन हासिल है।
अब ट्रंप प्रशासन इस रास्ते से हथियार पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। सद्दाम हुसैन के पतन के बाद यह इलाका स्थानीय कुर्दिश समूहों के लिए पनाहगाह रहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने शनिवार को जंग शुरू होने के बाद इस इलाके में इन समूहों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है। (एजेंसियां)
