International Women’s Day : स्वतंत्रता संग्राम में वीर नारियों की भूमिका और वर्तमान समाज

नोट- आठवीं कक्षा के छात्र कमलेकर साईतेजा ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर यह लेख लिख भेजा है। पाठकों से आग्रह है कि वे इस लेख पर अपनी प्रतिक्रिया लिख भेजे। साथ ही आपके बच्चों को भी लिखने के लिए प्रोत्साहित करें। प्राप्त रचनाओं को तेलंगाना समाचार में प्रकाशित किया जाएगा।

जब कभी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की बात आती है, तो भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानियों और उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। बेशक, कई महिला स्वतंत्रता सेनानी जीवन के हर क्षेत्रों की सामान्य महिलाएं थीं। फिर भी उन्होंने सच्ची भावना और साहस के साथ भारत की आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

साल 1920 में गांधीजी के आह्वान पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। पूरे भारत की महिलाओं ने विशेष रूप से असहयोग आंदोलन का समर्थन किया। उनकी सक्रिय भागीदारी से कई महिला संगठन उभरकर सामने आये।

मुख्य रूप से देश की आजादी और देश की रक्षा के लिए महारानी लक्ष्मी बाई, सरोजिनी नायडू,उषा मेहता, कस्तूरबा गांधी, मूलमती, सरला देवी चौदुरानी, ​​कैप्टन लक्ष्मी सहगल, एनीबिकेंट, अरुणा आसफ अली, रानी वेलु नाचियार, सुचेता कृपलानी, रानी गाइदिनल्यू, बेगम हजरत महल, उदा देवी, कमल देवी चट्टोपाध्याय, मैडम भीकाजी कामा, प्रीतिलता वेद्दार, कमला नेहरू, विजय लक्ष्मी पंडित, बत्तुला सुमित्रा देवी आदि महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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महिला दिवस पर यह याद रखना सबसे महत्वपूर्ण है कि आज हम जिस आजादी का आनंद ले रहे हैं, वह इन बहादुर महिलाओं के संघर्ष से ही संभव हो पाया है। इन महिलाओं ने भारत को ब्रिटिश की गुलामी से मुक्त कराने के लिए अपनी आखिरी सांस तक संघर्ष किया।

वर्तमान समय में जब मोबाइल का इस्तेमाल दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और हिंसा जैसी घटनाएं आम बात हो गई है। भले ही यह अवनि से अंतरिक्ष तक आगे बढ़ रहे हैं। फिर भी महिलाओं को हेय दृष्टि से देखा जाता है। मीडिया तथा फिल्मों में महिलाओं को एक खिलौने के रूप में दिखाया जाता है। ये समाज और युवाओं को गुमराह कर रहा है।

इस समय मां, बहन, बेटी, पत्नी, सास आदि निभाने वाली महिलाएं अनेक कष्ट सह रही है। ऐसे में महिलाओं का सम्मान होना जरूरी है। इसके लिए सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक और रोजगार के क्षेत्रों में महिलाओं को आगे आने की जरूरत है। युवाओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस देश में महिलाओं का सम्मान होता है, उसी देश में नारी पूजी जाती है।

लेखक कमलेकर साईतेजा
आठवीं कक्षा
जीएनआरआदित्य स्कूल, अच्चंपेट
नागरकर्नूल जिला, तेलंगाना
मोबाइन नंबर- 7997093459

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