हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र में ‘भारतीय भाषा’ दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम में आभासी मंच के माध्यम से मुख्य अतिथि के रूप पूर्व क्षेत्रीय निदेशक प्रो. गंगाधर वानोडे, क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक, विशिष्ट अतिथि डॉ. सी.पी. सिंह, डॉ. दीपेश व्यास, डॉ. एस. राधा, शेख मस्तान वली, सजग तिवारी, के. इंद्रा एवं संदीप कुमार तथा महाराष्ट्र राज्य के गोंदिया जिले के 492वें नवीकरण पाठ्यक्रम के प्रतिभागी अध्यापक आदि उपस्थित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक, सम्मानित अतिथि एवं प्रतिभागियों द्वारा महाकवि सुब्रमण्यम भारती एवं सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके किया। इस अवसर आभासी मंच के माध्यम से प्रो. गंगाधर वानोडे ने कहा कि अधिक भाषाओं का सीखना ज्ञान में वृद्धि करता है तथा प्रतिभागियों को भाषा के संदर्भ में समान शब्दों के अलग-अलग अर्थों को समझने की बात की।

डॉ. फत्ताराम नायक ने कहा कि महाकवि सुब्रमण्यम भारती जी के कार्यों एवं लेखन पर समयोचित चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत विभिन्नताओं से भरा देश है। किंतु भाषाएँ इन्हें एक सूत्र में बांधकर एक संपूर्ण राष्ट्र का रूप देती है। देश की आजादी के लिए भाषा ही एक ऐसा माध्यम थी जिसकी वजह से सभी ने मिलकर अंग्रेजों के विरूद्ध स्वतंत्रता आंदोलन छेड़ा।
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चंद्र प्रताप सिंह ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें सभी भाषाओं सम्मान करना चाहिए। महाकवि सुब्रमण्यम भारती अधिक भाषाएँ जानते थे। अतः सभी भाषाओं को हिंदी के माध्यम से जोड़कर हम भारतीयों के बीच संवाद की स्थिति को उत्पन्न कर सकते हैं।
डॉ. एस. राधा ने कहा कि भारत भर में 19500 भाषाएँ एवं बोलियाँ बोली जाती है। भारतीय भाषा दिवस का आयोजन इसी संदर्भ को लेकर किया गया है। हमें सभी भाषाओं को बराबर सम्मान देना है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपेश व्यास एवं धन्यवाद ज्ञापन शेख मस्तान वली ने किया।
