हैदराबाद/ढाका: शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में बांग्लादेश की अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के फैसले के बाद भारत से शेख हसीना को सौंपने का आग्रह किया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा प्रत्यर्पण संधि के अनुसार, यह भारत का अनिवार्य कर्तव्य है।’ उसने यह भी कहा कि शेख हसीना को शरण देना “अमित्रतापूर्ण” और “न्याय के प्रति अवमानना” होगा।
कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्रालय के सलाहकार डॉ आसिफ नजरुल ने कहा कि बांग्लादेश मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए अंतराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण से मौत की सजा सुनाए जाने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यावर्तन का अनुरोध करते हुए भारत को एक और औपचारिक पत्र भेजेगा। सोमवार को सचिवालय में पत्रकारों से बात करते हुए, डॉ नजरुल ने कहा, “भारत को एक और पत्र भेजा जाएगा, जिसमें शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजने का आग्रह किया जाएगा। अगर भारत उन्हें शरण देना जारी रखता है, तो उसे यह समझ लेना चाहिए कि ऐसा कृत्य बांग्लादेश और उसके लोगों के प्रति शत्रुतापूर्ण और निंदनीय है।”
Also Read-
इस फैसले को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताते हुए, उन्होंने आगे कहा: “आज (सोमवार), बांग्लादेश की धरती पर न्याय कायम हुआ है। यह एक ऐतिहासिक दिन है। इंशाअल्लाह, जब तक हम यहाँ हैं, न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। मुझे उम्मीद है कि भविष्य की कोई भी सरकार इस ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगी।” पिछले साल जुलाई में हुए विद्रोह के पीड़ितों का ज़िक्र करते हुए, डॉ. नजरुल ने कहा: “इस आंदोलन के दौरान सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों लोग गंभीर रूप से घायल या अपंग हो गए। उनकी पीड़ा के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति—शेख हसीना—को अब मौत की सजा सुनाई गई है। उनके मुख्य सहयोगी, पूर्व गृह मंत्री असदुज़्जमां खान कमाल को भी मौत की सजा मिली है।”
शेख हसीना के सौंप जाने के बांग्लादेश के आग्रह पर भारत सरकार ने अबतक कोई फैसला नहीं लिया है। ना ही उसका उत्तर दिया है। देखने है कि भविष्य में क्या होने वाला है।
