अखिल भारतीय फिल्म प्रेमियों के लिए ‘ही-मान’ अर्थात धर्मेंद्र का नाम सदैव श्रद्धा और प्रशंसा का पर्याय रहेगा। 89 वर्ष की उम्र में उनके निधन ने हिंदी सिनेमा को एक अपूर्व क्षति दी है, जो केवल एक अभिनेता की नहीं, एक युग की समाप्ति का प्रतीक है। परदे पर उनका बहुमुखी अभिनय, जीवन के संघर्षमय सफर और उनके व्यक्तित्व की सादगी ये सब भारतीय फिल्म इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ गए। उनके जीवन, संपूर्ण फिल्म कॅरियर, प्रतिष्ठित भूमिकाओं और उनकी यादों को कभी भी भूला नहीं जा सकता।

धर्मेंद्र का जीवन चरित्र संघर्ष, समर्पण और असाधारण प्रतिभा का संगम था। फगवाड़ा के एक साधारण कृषक परिवार से निकलकर 1960 के दशक में उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। तब से लेकर आज तक उनके अभिनय के रंग और उनकी लोकप्रियता में न तो समय ने कमी की और न ही निखार के प्रसाद को कम किया। धर्मेंद्र ने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं निभाकर खुद को ‘ही-मैन’ से ‘संवेदनशील कलाकार’ तक की कड़ी में स्थापित किया। उनकी फिल्मों ने समाज के विभिन्न पहलुओं को दिखाया, रूप-रंग का खेल निभाया और कई बार दर्शकों का दिल जीत लिया।
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धर्मेंद्र की सबसे यादगार फिल्मों में ‘शोल़े’ में वीरू का किरदार आज भी भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ भूमिकाओं में गिना जाता है। उनकी दोस्ती, साहस और ह्यूमर फिल्म की आत्मा थे। ‘चुपके चुपके’ में प्रोफेसर परिमल की कॉमेडी, ‘सत्यकाम’ में एक आदर्शवादी मानव की भूमिका, ‘फूल और पत्थर’ में जटिल भावनाओं से परिपूर्ण शाका और ‘हक़ीक़त’ जैसी देशभक्ति से ओतप्रोत फिल्मों में उनका अभिनय, उनकी विविध प्रतिभा का प्रमाण है। इन फिल्मों में धर्मेंद्र ने अपने अभिनय से न केवल लोकप्रियता पाई, बल्कि दर्शकों और आलोचकों की भी विशेष प्रशंसा अर्जित की।
धर्मेंद्र की सफलता के पीछे उनकी सहजता और मानवता थी। फिल्म उद्योग की चमक-दमक के बीच भी वे अपने विनम्र स्वभाव और जमीन से जुड़े रहने के लिए मशहूर थे। अभिनेता के तौर पर उन्होंने जितनी लोकप्रियता हासिल की, जनता और सहकर्मियों के बीच उनके प्रति जो सम्मान और प्यार था, वह भी उतना ही गहरा था। वे न केवल अपने अभिनय के लिए, बल्कि एक बेहतर इंसान के रूप में भी याद किए जाते हैं।
उनकी मौत पर जहां पूरे देश ने शोक व्यक्त किया। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी उन्हें एक युग के अंत के रूप में याद किया। उनके अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के तमाम दिग्गज कलाकारों ने भाग लेकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। धर्मेंद्र का जीवन और कार्य कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और आदर्श का स्रोत बना रहेगा।
इस प्रकार धर्मेंद्र का जीवन और उनका अभिनय युगों तक यादगार रहेगा और हिंदी सिनेमा के इतिहास में वह सदैव अनंत सितारे की तरह चमकते रहेंगे। उनकी फिल्मों और उनकी छवि से जुड़ी यादें हमें सिखाती हैं कि प्रतिभा के साथ संयम और सादगी भी सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी है। उनकी विरासत हिंदी फिल्मों और भारतीय संस्कृति की समृद्धि का अमर मार्ग दर्शक है।

– कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’
कवि लेखक अनुवादक
9848493223
