WORDD ने मनाया समाज सुधारक राष्ट्रसंत गाडगे महाराज जी का स्मृति दिवस, इन वक्ताओं ने दिया यह संदेश

कौशाम्बी (उत्तर प्रदेश) : समाज सुधारक राष्ट्रसंत गाडगे महाराज जी के स्मृति दिवस के अवसर पर वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन फ़ॉर रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट ऑफ धोबिस (WORDD) सुधवर, चायल कौशाम्बी के तत्वावधान में ‘सामाजिक जागरूकता एवं राष्ट्र संत गाडगे महाराज’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संत गाडगे महाराज के चित्र पर माल्यार्पण से हुई।

इस अवसर पर समाजसुधारक शिव शरण ने कहा कि संत गाडगे महाराज का जीवन संघर्ष हम सबके लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो हमें भी जीवन में न थकने और न हारने व आगे बढ़ते रहने को प्रेरित करती है। डॉ. विजय कनौजिया ने कहा कि उन्होंने कम उम्र से ही शोषण का प्रतिकार करना शुरू कर दिया था और अपने मामा जी के खेत को साहूकार से मुक्त कराया। फिर उन्होंने पूरे वंचितों को आगे बढ़ाने और पढ़ाने के लिए कई शिक्षण संस्थाओं, वाचनालयों, छात्रावासों आदि का निर्माण कराकर वंचितों के उत्थान के मार्ग प्रशस्त किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि गाडगे महाराज ने शिक्षा को समाज सुधार और प्रगति की कुंजी माना, उन्होंने गरीबों, दलितों और वंचितों के लिए शिक्षा को सुलभ बनाने पर न केवल जोर दिया, अपितु उसके लिए उन्होंने उल्लेखनीय कार्य भी किया। उन्होंने यहाँ तक कहा कि आर्थिक तंगी होने पर भोजन के बर्तन बेचकर भी शिक्षा दिलाना चाहिए, अंधविश्वास मिटाने और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए उन्होंने कीर्तन और भजन का सहारा लिया और गांव-गांव स्वच्छता के माध्यम से शिक्षा और नैतिक मूल्यों का प्रचार भी किया, जिससे शिक्षा के साथ-साथ चारित्रिक विकास और सामाजिक चेतना का मार्ग प्रशस्त हुआ।

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सोशल एक्टिविस्ट ममता नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि गाडगे महाराज के जीवन में उनकी माता सखु बाई और पत्नी कुंता बाई के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। जहां माँ ने बचपन में ही पिता झिंगराजी जनोरकर की मृत्यु के बाद बहुत कष्ट उठाकर गाडगे महाराज का लालन-पालन किया तो उनकी पत्नी ने गाडगे महाराज जी के शैक्षणिक कार्यों को गति प्रदान करने के लिए अपने जेवरात तक बेंच दिए। गाडगे महाराज यह जानते थे कि शिक्षा के द्वारा ही समाज से अंधविश्वास और कुरीतियों को दूर किया जा सकता है इसलिए उन्होंने वंचितों को शिक्षा प्रदान करने के लिए बहुत अधिक प्रयास किया। उन्होंने पंढरपुर की चोखामेला धर्मशाला डॉ. अम्बेडकर साहब को सौंप दिया।

डॉ. संदीप दिवाकर ने कहा कि संत गाडगे महाराज ने शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर, इसे सामाजिक परिवर्तन, नैतिकता और आत्म-सम्मान के साथ जोड़कर जन-जन तक पहुँचाया। बोलता प्रसाद दिवाकर ने कहा कि उन्होंने अपने संघर्षों से सीखा और यह प्रयास किया कि वैसी परेशानी का सामना दूसरों को न करना पड़े। तमाम कुरीतियों को पहले स्वयं त्याग किया और उदाहरण प्रस्तुत किया जिसका अनुकरण व अनुसरण अन्य लोग अपने जीवन में करने लगे। उनका मनना था कि शिक्षा से व्यक्ति हर क्षेत्र में बदलाव ला सकता है बशर्ते वह प्रयास करे। गाडगे महाराज व्यक्तित्व बड़ा ही विराट था। इसीलिए उन्होंने शिक्षा को सामाजिक समानता और उत्थान का सबसे प्रभावी साधन माना।

कार्यक्रम में आचार्य विनोद भास्कर चौधरी को राज्य आद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में बतौर अनुदेशक नियुक्त होने और डॉ. मनीष दिवाकर को शिक्षाशास्त्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त होने तथा देश की उच्चतम न्यायालयइन आयोजित 2 दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में (एटा की ऋचा यादव के साथ) उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने पर सोशल एक्टिविस्ट व पराविधिक स्वयं सेवक ममता नरेन्द्र दिवाकर को अंगवस्त्र और संत गाडगे महाराज जी व बाबा साहब भीमराव अंबेडकर पर केंद्रित पुस्तक भेंटकर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी गईं।

संस्था के अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2026 राष्ट्रसंत गाडगे महाराज जी का 150वां जयंती वर्ष है। इसलिए संगठन के द्वारा 22-23 फरवरी 2026 को एक संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के तमाम शोधछात्र, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता शिरकत करेंगे। इसके साथ ही साल-भर जगह-जगह रैली और गोष्ठियों का आयोजन कर राष्ट्रसंत गाडगे महाराज जी के द्वारा सामाजिक समानता और समाज उत्थान के लिए किए गए कार्यों का प्रचार प्रसार किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में मशहूर कवि और गजलकार डॉ. मनीष दिवाकर ने अपनी स्वरचित रचना “कउड़ा का मीटर” सुनाकर माहौल को और अधिक जीवंत बना दिया। कार्यक्रम में विनोद रजक, अनिल कुमार, मंजू, आरती भास्कर, तेजस और श्रेयस सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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