केंद्रीय हिंदी संस्थान में गुरु पूर्णिमा की धूम, समझे और समझाए पर्व का महत्व

हैदराबाद : 10 जुलाई को केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के सभागार में महाराष्ट्र राज्य के लातूर जिले के माध्यमिक विद्यालय के हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए आयोजित 486वें नवीकरण पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों द्वारा गुरु पूर्णिमा (व्यास पूजा) कार्यक्रम बड़े धूमधाम से आयोजित किया गया।

इस अवसर पर सर्वप्रथम संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. गंगाधर वानोडे, डॉ. फत्ताराम नायक, डॉ. दीपेश व्यास, डॉ. एस. राधा, शेख मस्तान वली तथा सजग तिवारी ने सरस्वती पूजन कर कार्यक्रम की विविधवत शुरूआत की।

महाराष्ट्र राज्य के लातूर जिले से आए हुए हिंदी अध्यापकों ने संस्थान के सभी अध्यापकों एवं प्रशासनिक कार्मिकों का शॉल एवं स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे क्षेत्रीय निदेशक प्रो. वानोडे ने कहा कि गुरु की महिमा अपरंपार है। इसलिए गुरु को ईश्वर से पहले पूजा जाता है क्योंकि ईश्वर को प्राप्त करने का रास्ता गुरु द्वारा ही बताया जाता है।

इस अवसर पर संस्थान के अध्यापक फत्ताराम नायक ने कहा कि गुरु शिष्य का संबंध केवल शैक्षणिक ही नहीं है अपितु जीवन की सफलता एवं असफलता में गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान का पूरा योगदान होता है। संस्थान के अतिथि अध्यापक डॉ. दीपेश व्यास ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, जिससे जो भी सीखने को मिले हमें सीखना चाहिए और वह हमारे जीवन का गुरु जैसा महत्व रखता है।

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संस्थान की कार्यालय अधीक्षक डॉ. एस. राधा ने कहा कि पौराणिक काल से ही हमारे समाज में गुरु का विशेष स्थान रहा है। गुरु शिष्य का संबंध माता-पिता से बढ़कर है। केवल गुरु ही है जो अपने शिष्य को अपने से अधिक प्रगतिशील होते हुए देखना चाहता है।

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