हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद, साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति हैदराबाद एवं ऑथर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया हैदराबाद चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में 10 जनवरी को कादम्बिनी क्लब संस्थापिका डॉ. अहिल्या मिश्र की स्मृति में कीमती भवन (रामकोट) में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
कार्यकारी अध्यक्ष मीना मुथा एवं महासचिव प्रवीण प्रणव द्वारा प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि वरिष्ठ साहित्यकार, नाटककार, निबंधकार, कहानीकार, कवयित्री, संपादिका और समाजसेवी डॉ. अहिल्या मिश्र का 15 दिसंबर को दुखद निधन हुआ। वे विगत 32 वर्षों से कादम्बिनी क्लब का सफल संचालन करती रहीं, साथ ही हिंदी की सेवा, प्रचार-प्रसार में सतत कर्मठ कार्यशीलता के साथ निरंतर अग्रसर रहीं। आपके साहित्यिक योगदानों के लिए आप कई पदों, मान-सम्मानों से विभूषित हुईं। आपके कई साहित्यिक ग्रंथ प्रकाशित हुए जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई। आप भारत सरकार के कई मंत्रालयों में सलाहकार समिति की सदस्य भी रहीं। नारी सशक्तिकरण के प्रति अपने संघर्ष और क्रांतिकारी विचारों के लिए आप जानी जाती रहीं।
विज्ञप्ति में आगे कहा कि डॉ. अहिल्या मिश्र का जन्म 16 सितंबर 1948 में हुआ। उनमें विद्वता, सरलता, भावुकता, संघर्ष-शक्ति का अद्भुत संगम दिखाई देता है। बिहार से हैदराबाद की धरती पर आ कर उन्होंने हिंदी का परचम लहराया। पति स्व. राजदेव मिश्र के निधन के पश्चात भी वे हिम्मत न हारते हुए आगे बढ़ीं। परिवार में पुत्र मानवेन्द्र मिश्र, पुत्रवधू डॉ. आशा मिश्र ‘मुक्ता’, पोता आर्यव, पौत्री दिव्या और अक्षिति हैं। उन्होंने क़रीबी रिश्तेदारों का भी सदैव ख्याल रखा। घर-बाहर की दुनिया का तालमेल बिठाकर लौह-स्त्री की भूमिका में वे सदैव नज़र आईं।
इस अवसर पर क्रांतिकारी कवि निखिलेश्वर, डॉ. मदनदेवी पोकरणा, शांति अग्रवाल, श्रुतिकांत भारती, मधु भटनागर, डॉ. बी. बालाजी, डॉ. रमा द्विवेदी, सरिता सुराणा, दर्शन सिंह, डॉ. कृष्णा सिंह, एडवोकेट अशोक तिवारी, डॉ. सीमा तिवारी, प्रवीण पांडया, रिद्धिश जागीरदार, हर्षलता दुधोड़िया, जितेंद्र प्रकाश, के. राजन्ना, जी. परमेश्वर आदि ने डॉ. अहिल्या मिश्र के साथ अपने संस्मरण साझा किए। प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने कहा कि डॉ. अहिल्या मिश्र के जाने से एक शून्य का निर्माण हुआ है, इस अपूरणीय क्षति को भरा नहीं जा सकता। वात्सल्य, दृढ़ता और कोमलता से उनका व्यक्तित्व सुसज्जित था। उनके स्नेह का मैं सदैव अधिकारी रहा। वे किसी के लिए माँ थीं, गुरु थीं, दीदी, बुआ थीं। मुझे वे हमेशा ‘भाई’ बुलाती रहीं। बस यही कहूँगा कि ईश्वर परिवार को इस कठोराघात को सहन करने का साहस और बल प्रदान करें।
इस दौरान भक्तराम, पुष्पा वर्मा, उमा सोनी, भावना पुरोहित, शुभ्रा मोहंतो, शिल्पी भटनागर ने भी अश्रुपूर्ण भावांजलि व्यक्त की। उनके पुत्र मानवेन्द्र मिश्र ने कहा कि उनकी संघर्षशीलता, पठन-पाठन, बालिकाओं को उच्च शिक्षा की प्रेरणा देते रहना, विभिन्न संस्थाओं से जुड़े रहना, व्यस्त जीवन शैली रहते हुए भी सबको समय देते रहना अनुकरणीय है। मैं आगे भी माँ की इस साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने में संस्था का साथ देता रहूँगा। डॉ. आशा मिश्र ‘मुक्ता’ ने कहा कि वे किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उनकी उँगली पकड़कर ही मैंने साहित्यिक दुनिया और घर-परिवार में चलना सीखा है। वे सदैव मेरी मार्गदर्शक और प्रेरणाश्रोत रही हैं।
इस उपलक्ष्य में सीताराम माने, शोभा देशपांडे, चन्द्रलेखा कोठारी, डॉ. अनीता मिश्र, सत्यनारायण काकड़ा, ईटेला सम्मन्ना, शशि राय, बलवीर, श्री द्विवेदी, ललित मुथा, देवा प्रसाद मायला, किरन सिंह, सुमित्रा, जसमत पटेल, अमृतकुमार जैन, वर्षा शर्मा, सुनीता गुप्ता, डॉ. सुषमा देवी, सरिता दीक्षित, तृप्ति मिश्रा, दीपक कुमार दीक्षित, सौरभ भटनागर, विभा आदि की उपस्थिति रही। उपस्थित सदस्यों ने डॉ. अहिल्या मिश्र को पुष्पांजलि समर्पित करते हुए उनकी आत्मा की चिरशांति के लिए प्रार्थना की। मीना मुथा ने श्रद्धांजलि सभा का संचालन किया। एन. आर. श्याम, अवधेश कुमार सिन्हा और कई अन्य लोगों ने भी डॉ. अहिल्या मिश्र के प्रति अपने शोक संदेश भेजे।
