स्वर्गीय कृष्ण कुमार अष्ठाना स्मृति बाल साहित्य राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन, यह भी रहे खास आकर्षण

भोपाल : यह बाल साहित्य को संवर्द्धित करने का अवसर है। बालकों को हम जैसा वातावरण देंगे, सांस्कृतिक, पारिवारिक, सामाजिक, जो हमारा है, वो उनको श्रेष्ठ बनाता है। प्राकृ‌तिक चेतना की रक्षा बाल साहित्य द्वारा कर सकते हैं। उपदेश से परहेज क्यों ? बच्चे को दिशा-निर्देश दें। रोकना-टोकना करें, पर प्रकारेंतर से। यह बात वरिष्ठ साहित्यकार एवं बाल पत्रिका ‘बालवाटिका’ के संपादक भेरूँलाल गर्ग ने बतौर अतिथि कही।

अवसर रहा साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश द्वारा स्वर्गीय कृष्ण कुमार अष्ठाना स्मृति बाल साहित्य राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन का, जो भोपाल स्थित एनआईटीटीटीआर (श्यामला हिल्स) में हुआ। इसका समग्र संयोजन बाल पत्रिका ‘देवपुत्र’ के सम्पादक गोपाल माहेश्वरी ने किया। सैकड़ों बाल साहित्यकारों की उपस्थिति में इस संगोष्ठी का उद्घाटन मंच पर उपस्थित अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे, डॉ. गर्ग, दिनेश पाठक और राजा चौरसिया ने दीप प्रज्ज्वलन से किया। इसका संचालन गोपाल माहेश्वरी ने किया।

इस दो दिनी संगोष्ठी में पहले दिन प्रथम सत्र में ‘बाल मनोविज्ञान और बाल साहित्य सृजन’ विषय पर समीक्षा तैलंग, डॉ. रश्मि अग्रवाल, डॉ. वर्षा महेश, शीला पाण्डेय, डॉ. सुनीता श्रीवास्तव, शशि पुरवार, राजकुमारी चौकसे, देवी प्रसाद गौड़ और देवेन्द्रसिंह सिसौदिया ने वक्ता के नाते अभिव्यक्ति दी। ऐसे ही द्वितीय सत्र में ‘बाल-साहित्य में बदलती परिवार व्यवस्था, शिक्षक एवं समाज की भूमिका’ विषय पर डॉ. रेखा लोढा, नीलम राकेश, उमेशचंद्र सिरसवारी, मीरा जैन व निरुपमा त्रिवेदी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। तीसरे सत्र में ‘बाल-साहित्य में देशप्रेम, राष्ट्रीयता, पर्यावरण तथा भारतीय संस्कृति का भाव विषय पर सपना साहू ‘स्वप्निल’, आशा पांडेय, सत्यनारायण सत्य, विष्णु शर्मा ‘हरिहर’ और हरीराम पथिक आदि ने बाल साहित्य के बिंदु प्रस्तुत किए।चौथे सत्र में ‘बाल-साहित्य में कल्पना एवं यथार्थ’ विषय पर डॉ. आर.पी. सारस्वत, डॉ. वर्षा ढोबले सहित मीरा तिवारी आदि ने अपने भाव व्यक्त किए।

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इस महती आयोजन में अकादमी से सम्बद्ध बाल साहित्य शोध सृजन पीठ की निदेशक और प्रसिद्ध बाल साहित्य लेखिका डॉ. मीनू पाण्डेय ‘नयन’, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रमेश यादव, डॉ. विमला भंडारी एवं डॉ. नागेश पांडेय ‘संजय’ आदि की उपस्थिति रही। ‘गली बचपन की’ शीर्षक से आयोजित उक्त संगोष्ठी में देशभर के बाल रचनाकार जुटे हैं। अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे और बाल साहित्यकारों की मौजूदगी में अनुरंजन कार्यक्रम कवि सम्मेलन के रूप में हुआ। विभिन्न बाल रचनाकारों ने इस में अपनी रचनाओं से सबको प्रभावित किया।

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