कादम्बिनी क्लब की गोष्ठी में ‘गज़ल में दुष्यंत कुमार’ विषय पर सारगर्भित चर्चा, पढ़ें साहित्य गरिमा पुरस्कार पर महामंत्री का आह्वान

हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में रविवार को गूगल मीट के माध्यम से प्रो. ऋषभदेव शर्मा (हिन्दी परामर्शी दूरस्थ शिक्षा विभाग, मानू) की अध्यक्षता में क्लब की 403वीं मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन संपन्न हुआ। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए मीना मुथा (कार्यकारी अध्यक्ष) एवं महासचिव प्रवीण प्रणव (महामंत्री) ने बताया कि प्रथम सत्र का आरंभ गान कोकिला शुभ्रा महन्तों द्वारा सुमधुर स्वर में निराला रचित सरस्वती वंदना से हुआ। मीना मुथा ने पटल पर उपस्थित साहित्यकार गणमान्यों का शब्द कुसुमों से स्वागत करते हुए क्लब की 32 वें साहित्यिक यात्रा वर्ष में सबका साथ यूँ ही आगे बना रहे यही कामना व्यक्त की।

कार्यकारी अध्यक्ष ने आगे बताया कि सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरेराम समीप ‘गज़ल में दुष्यंत कुमार’ इस विषय पर अपनी बात रखेंगे यह बताते हुए संगोष्ठी सत्र संयोजक प्रवीण प्रणव को विषय प्रवेश एवं मुख्य वक्ता हरेराम समीप के परिचय हेतु अनुरोध किया गया। प्रवीण प्रणव ने कहा कि हरेराम समीप जी आज के सत्र में हमारे बीच उपस्थित हुए हैं। उनकी लगभग 60 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे शोधकार्य के लिए भी चर्चित रहे हैं। समीप जी आज हमें दुष्यंत कुमार के जीवन एवं उनकी गजल प्रतिभा से हमें रू-ब-रू कराएंगे।

हरेराम समीप ने अपने उद्बोधन में कहा कि सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रो ऋषभदेव शर्मा और मैं गज़ल के सहयात्री हैं। दुष्यंतकुमार निसंदेह अद्भूत अप्रतिम अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी रहे हैं। कवि की बुलंदी उसकी स्वीकार्यता से होती है। दुष्यंत कुमार को साहित्यिक संस्कार परिवार से विरासत में मिला था। पिता शायर थे, उनकी शायरी से दुष्यंत प्रभावित थे। उनकी गजलों में छंद लय कभी उनसे दूर नहीं हुआ। वे समकालीन उर्दू शायरों में रहें और वे हिन्दी गजल आंदोलन के युगप्रवर्तक के रूप में जाने जाते हैं। गजल को सीमित परिभाषा से निकालकर जनचेतना की विधा के रूप में पहचान दिलाने में दुष्यंत कुमार की पहचान रही है। आम जन के आत्मसंघर्ष में वे सदैव खड़े रहे। लोकतंत्र को भी सवालों के घेरे में उन्होंने खड़ा किया। उनकी गजलों की किताबें विमर्शो का संकलन है। दुष्यंत जन पक्षधर ही नहीं युग के प्रवर्तक हैं। प्रदीप भट्ट ने कहा कि इस विषय को संक्षिप्त समय में समेटना असंभव है, फिर भी हरेरामजी ने श्रोताओं की उत्कंठा को समझा और अपने विचार साझा किए।

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प्रो ऋषभ देव शर्मा ने अध्यक्षीय टीप्पणी में कहा कि गजल विधा पर अध्ययन करनेवाले सलाहकार के रूप में समीप जी के कुछ और समीप होने का मौका मिला। दुष्यंत की सटीकता, सारसिकता, विराट प्रतिभा को कम समय में अभिव्यक्त करना संभव नहीं था। हरेरामजी ने गागर में सागर भर दिया। आपातकाल के दौरान दुष्यंत सतर्क हुए। गजल को केंद्रिय महत्व देने का काम दुष्यंतकुमार ने किया। उनकी समग्र कविताओं में उनकी अद्वितीयता प्रकट होती है। वे रीतिसिद्ध कवि हैं और उनकी गजलें नवनीत हैं। उन्होंने गजल के सारे परिदृश्य को बदलकर रख दिया। गजल पर रूमानी का ठप्पा लगा हुआ था दुष्यंत ने उसे बदलकर पीडा और जनआक्रोश के लिए उठाया और परिवर्तन की राह चुनी। जबतक मनुष्य है उनकी कविता प्रासंगिक है। निश्चित ही आज का सत्र विशेष सफल रहा है।

प्रवीण प्रणव ने सत्र का धन्यवाद देते हुए कहा कि आगामी माह में 15 मार्च को साहित्य गरिमा पुरस्कार समिति, ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया हैदराबाद चैप्टर, कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में होटल अबोड (लकड़ी का पूल) में प्रात: 10.30 से शाम 5.30 बजे तक दो सत्रों में रूबरू कार्यक्रम का आयोजन होगा। प्रथम सत्र में डॉ अहिल्या मिश्र स्मृति सम्मान से हिन्दी सेवी अहिंदी भाषी महिला साहित्यकार को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही सिया सहचरी काव्य सम्मान’, महासहस्त्रावधानी डॉ गरिकिपाटि नरसिम्हा राव तेलुगु अनुवादक पुरस्कार’, ‘महासहस्त्रावधानी डॉ गरिकिपाटि नरसिम्हा राव हिन्दी अनुवादक पुरस्कार’,शांति अग्रवाल कहानी / उपन्यास लेखन पुरस्कार’, ‘श्री आचार्य कृष्णदत्त हिन्दी साहित्य व्यंग्य / लघुकथा लेखन पुरस्कार’, चंपाई माधव कदम हिन्दी लेखन पुरस्कार’, राम किशोरी स्मृति सम्मान,सृजनात्मक तकनीक हिन्दी सम्मान’, ‘शुभ्रा मोहंतो संगीत साधना पुरस्कार’ एवं `कादम्बिनी क्लब, हैदराबाद साहित्य गौरव सम्मान’ से विभिन्न साहित्यिक विधाओं में लेखन कर रहे है साहित्यकारों, मनिषियों को नवाजा जाएगा। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम और बहुभाषी कवि गोष्ठी का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने सभी से कार्यक्रम में जुड़ने का अनुरोध किया।

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द्वितीय सत्र में प्रदीप भट्ट की अध्यक्षता में कविगोष्ठी हुई। इसमें हरेराम समीप, प्रो. ऋदेवशर्मा, रक्षा मेहता, प्रियंका वांजपेई, तृप्ति मिश्रा, सुषमा त्रिपाठी, भावना पुरोहित, चंद्रप्रकाश दायमा, सुनीता लूल्ला, उषा शर्मा, निशी कुमारी, विजय प्रशांत, किरण कुमारी (झारखंड), दर्शन सिंह, मेघा झा,, डॉ सुषमा देवी, तरुणा शर्मा, डॉ स्वाती गुप्ता, प्रवीण प्रणव, आशा मिश्र, मीना मुथा, हर्षलता दुधोरीया, शोभा पांडे आदि ने काव्यपाठ किया। सत्यनारायण काकडा, शशि राय, मोनिका, श्रुतिकान्त भारती, शेखर त्रिपाठी, रवी वैद, सरिता दीक्षित, डॉ राशि सिन्हा, शिल्पी भटनागर, सुखमोहन अग्रवाल, मधु भटनागर की उपास्थिती बनी रही। डॉ अहिल्या मिश्र की अंतिम काव्यरचना का पाठ डॉ आशा मिश्र मुक्ता ने किया। प्रदीप भट्ट ने अध्यक्षीय टीप्पणी में सभी की रचनाओं को सराहा और अध्यक्षीय काव्यपाठ किया। मीना मुथा ने कार्यक्रम का संचालन किया। प्रवीण प्रणव ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया और डॉ आशा मिश्रा मुक्ता (कोषाध्यक्ष) ने सभी के प्रती आभार व्यक्त किया।

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