हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र की ओर से महाराष्ट्र राज्य के बुलढ़ाणा जिले के हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए 493वें नवीकरण पाठ्यक्रम’ का आयोजन 19 से तक किया गया। इसका समापन समारोह शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त (उपनिदेशक एवं क्षेत्रीय निदेशक राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान, भारत सरकार) अनिल कुमार उपस्थित रहे।

इस अवसर पर पाठ्यक्रम संयोजक केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक, डॉ. दीपेश व्यास, अतिथि प्रवक्ता एवं डॉ. एस. राधा उपस्थित थीं। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रतिभागियों द्वारा संस्थान गीत एवं स्वागत गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम में कुल 33 (महिला-07 पुरुष-26) प्रतिभागियों ने कक्षा में उपस्थित होकर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

मुख्य अतिथि अनिल कुमार ने कहा कि इस नवीकरण पाठ्यक्रम का उद्देश्य आपके अंदर भाषा कौशल के साथ शिक्षण की नवीन विधियों का विस्तार भी करना है। मराठी और हिंदी दोनों की लिपि देवनागरी है, पर मात्राओं में अंतर के कारण दोनों को पढ़ाने का तरीका अलग-अलग है। अपनी कक्षाओं में हिंदी अध्यापकों को यह ध्यान देना चाहिए कि वह हिंदी का वातावरण निर्मित कर बोलने में अधिक से अधिक हिंदी का प्रयोग करें। जिससे उनके विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास पूर्ण रूप से हो सके। साथ ही उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को प्रशिक्षणार्थियों के साथ साझा करते हुए उनसे यह आशा व्यक्त कि वह हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना बहुमूल्य योगदान देंगे।

पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक ने कहा कि इस प्रशिक्षण के दौरान जो भी सीखा है वह अपने ग्रामीण अंचल के विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को प्रदान करें तथा उनके अंदर हिंदी के प्रति आदर एवं सम्मान की भावना जागृत करें। प्रत्येक विद्यार्थी से अपनी सहानभूति की दृष्टि रखते हुए उनकी समस्याओं का समाधान करे।
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इस अवसर पर डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि एक शिक्षक के अंदर परिस्थितियों को बदलने का हुनर होता है। वह अपने भाषायी कौशल के माध्यम से अपने विद्यार्थियों को किसी भी ऊँचाई पर ले जा सकता है। एक विद्यार्थी की सफलता के पीछे उसके गुरु का महत्वपूर्ण योगदान होता है। बिना गुरु ज्ञान के जीवन सफल नहीं हो सकता। डॉ. एस. राधा ने कहा कि आप शिक्षक हैं, इसलिए आपकी जिम्मेदारी समाज के प्रति सबसे ज्यादा होती है। यहाँ प्रशिक्षण के दौरान आपने जो अनुभव लिए वह आपके जीवनोपयोगी रहेंगे तथा उनका लाभ आपके विद्यार्थियों को मिलेगा। डॉ. दीपेश व्यास ने कहा कि एक शिक्षक जीवनपर्यंत सीखता रहता है आपने यहाँ प्रशिक्षण के दौरान जो सीखा है वह अपने विद्यार्थियों को अवश्य सिखाएँ।

इस कार्यक्रम का संचालन सौ. सीमा मुकेश निमोदिया एवं आभार ज्ञापन सौ. संगीता संदिप शुक्ला द्वारा किया गया। इस पाठ्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने हस्तलिखित पत्रिका ‘’मातृतीर्थ बुलढ़ाणा जिला’’ की रचना की। समापन समारोह के दौरान अतिथियों द्वारा हस्तलिखित पत्रिका का लोकार्पण किया गया। प्रतिभागियों को अतिथियों के द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। पर-परीक्षण के आधार पर उत्तम अंक प्राप्त छात्रों को विशेष पुरस्कार दिए गए। सुनिल मधुकर अरबट को प्रथम पुरस्कार, सैय्यद वहीद सैय्यद नज़ीर को द्वितीय पुरस्कार, नंदकिशोर अबगड़ को तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। सौ. शिल्पा नतिनि मल्लावत को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया।
इस पाठ्यक्रम के समापन समारोह में प्रतिभागियों ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। अतिथि परिचय सौ. एस. एन. मल्लावत ने दिया। पाठ्यक्रम से संबंधित प्रतिक्रियाएँ प्रतिभागी नंदकिशोर अबगड़, सौ. एस. एन. मल्लावत, विक्रांत सिंह जीवन सिंह राजपूतएवं सौ. एस. बी. जाधव. तबिता द्वारा दी गईं। देशभक्ति गीत फजल पठान एवं स्वरचित कविता किशोर अनिल राहाटे ने गाया। प्रतिभागियों द्वारा सामूहिक नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्थान परिवार का भरपूर सहयोग रहा। अंत में राष्ट्रगान से कार्यक्रम का समापन हुआ।
