भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस अत्यंत गौरव और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन भारतीय संविधान के लागू होने और भारत के एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष तथा लोकतांत्रिक गणराज्य बनने का प्रतीक है। गणतंत्र दिवस हमें स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों, संविधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता की निरंतर स्मृति कराता है। हर वर्ष गणतंत्र दिवस के लिए एक विशेष विषय निर्धारित किया जाता है, जो परेड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की दिशा तय करता है। गणतंत्र दिवस 2026 का विषय- “वंदे मातरम् के 150 वर्ष”- भारत की राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और देशभक्ति की आत्मा को समर्पित है।

वंदे मातरम् : इतिहास, भावना और राष्ट्रबोध
1876 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। इस गीत ने गुलामी के दौर में करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में बाँधा और मातृभूमि को “माता” के रूप में देखने की चेतना को सुदृढ़ किया। स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम् को संघर्ष का उद्घोष बनाया। इस वर्ष , इसके 150 वर्ष पूर्ण होने पर, यह गीत भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाला सेतु बन गया है।

वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत भावार्थ के साथ…
वंदे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम्, शस्य श्यामलां मातरम्।
भावार्थ: यहाँ हमें मातृभूमि की प्राकृतिक सुंदरता के दर्शन होते हैं। यह भारत की जल से परिपूर्ण भूमि, समृद्ध फलों, शीतल पवन और हरे-भरे खेतों का प्रतीक है। कवि कहता है कि मैं उस मातृभूमि को नमन करता हूँ जो जल से परिपूर्ण, फलों से समृद्ध, शीतल पवन से युक्त और हरे-भरे खेतों से सुशोभित है। यह भारत की प्राकृतिक समृद्धि और कृषि- संस्कृति का प्रतीक है।
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शुभ्र ज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्, फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्।
भावार्थ: इन पंक्तियों में चाँदनी और पुष्पों से सुसज्जित रात का वर्णन है। कवि का मत है कि भारत भूमि उज्ज्वल चाँदनी और खिले हुए फूलों वाले वृक्षों से अलंकृत है। यहाँ भारत की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक गरिमा को दर्शाया गया है।

सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्, सुखदां वरदां मातरम्।
भावार्थ: कवि ने भारतमाता का साक्षात्कार सुखदायिनी और वरदायिनी माता के रूप में किया है। वे कहते हैं कि मेरी मातृभूमि सदा मुस्कराने वाली, मधुर वाणी वाली है, जो अपनी संतानों को सुख और आशीर्वाद प्रदान करती है। यहाँ भारत को करुणामयी माता के रूप में चित्रित किया गया है।
सप्तकोटिकण्ठ-कलकल-निनाद-कराले, द्विसप्तकोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले
भावार्थ: कवि ने इन पंक्तियों में जनशक्ति और सामूहिक एकता के दर्शन कराए हैं। देश की जनशक्ति (उस समय की जनसंख्या के आधार पर) का वर्णन है। वे कहते हैं कि करोड़ों भारतीयों की आवाज़ और उनकी भुजाओं की शक्ति से देश की एकता बनी रहेगी और इसी से भारत माता का बल प्रदर्शित होगा। करोड़ों कंठों की गर्जना और करोड़ों भुजाओं की शक्ति से युक्त यह भूमि भारत की जनशक्ति, एकता और सामूहिक बल का प्रतीक है।

तुमि विद्या, तुमि धर्म, तुमि हृदि, तुमि मर्म। त्वं हि प्राणाः शरीरे।
भावार्थ: कवि ने इन पंक्तियों के माध्यम से भारत की अध्यात्मिकता और प्राणशक्ति को अंकित किया है। राष्ट्र ही हमारी विद्या, धर्म, हृदय और जीवन की प्राणशक्ति है। कवि के अनुसार भारतमाता प्रत्येक भारतीय के ज्ञान और चेतना का आधार है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि भारत को जीवनदायिनी चेतना के रूप में स्थापित करता है।
नमामि तारिणीं रिपुदलवारिणीं, मातरम्।
भावार्थ: उद्धारक और रक्षक मातृभूमि को नमन। कवि का कहना है कि वे उस मातृभूमि को नमन करते हैं जो अपनी संतानों का उद्धार करती है और अन्याय के विरुद्ध लड़ने वालों की रक्षा करती है। भारतमाता अपने शत्रुओं के दल का नाश करने वाली और अन्याय के विरुद्ध रक्षा करने वाली है। ऐसी ऐसी कृपालु और शक्तिशाली माता को प्रणाम।
गणतंत्र दिवस 2026 की परेड और विशेष आयोजन
2026 की गणतंत्र दिवस परेड कई ऐतिहासिक विशेषताओं से युक्त होगी-
- भारतीय सेना द्वारा आधुनिक युद्ध क्षमता दर्शाती नई “बैटल एरे” संरचना
- दर्शक दीर्घाओं के नाम भारत की प्रमुख नदियों पर आधारित होंगे, जिससे VVIP संस्कृति
का अंत होगा - वंदे मातरम् की पंक्तियों पर आधारित 1923 की दुर्लभ चित्रकला का प्रदर्शन
- परेड के समापन पर “वंदे मातरम्” अंकित विशाल बैनर का अनावरण और आकाश में
गुब्बारों का विमोचन - मुख्य मंच की विषयानुकूल पुष्प-सज्जा और गीत की यात्रा पर आधारित वीडियो प्रदर्शन
- टिकट और आमंत्रण पत्रों में वंदे मातरम् से प्रेरित डिज़ाइन
19 से 26 जनवरी तक देशभर में सेना, अर्धसैनिक बलों और सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा वंदे मातरम् पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल के नैहाटी स्थित बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के जन्मस्थल पर विशेष समारोह आयोजित होंगे।
गणतंत्र दिवस का अंतरराष्ट्रीय आयाम
गणतंत्र दिवस 2026 एक ऐतिहासिक कूटनीतिक अवसर भी बनेगा। यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता- अंतोनियो कोस्टा, अध्यक्ष, यूरोपीय परिषद और उर्सुला वॉन डेर लेयेन, अध्यक्ष, यूरोपीय आयोग- मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए हैं। उनकी उपस्थिति भारत-यूरोपीय संघ संबंधों की बढ़ती मजबूती और वैश्विक सहयोग को दर्शाती है।
उपसंहार
गणतंत्र दिवस केवल एक औपचारिक पर्व नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक आत्मा का उत्सव है। वंदे मातरम् उसकी भावनात्मक और सांस्कृतिक शक्ति है। जब संविधान के मूल्य और वंदे मातरम् की भावना एक साथ मिलते हैं, तब एक सशक्त, एकजुट और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होता है। वंदे मातरम्। जय हिंद।

डॉ बी बालाजी,
प्रबंधक
हिंदी अनुभाग एवं निगम संचार
मिश्र धातु निगम लिमिटेड, हैदराबाद
