वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मुर्शिदाबाद जिले में हुई तीन मौतों ने पश्चिम बंगाल में गहरी राजनीतिक दरार और सांप्रदायिक विभाजन को उजागर कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बार-बार यह आश्वासन दिए जाने के बावजूद कि वे अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करेंगी तथा राज्य में यह अधिनियम लागू नहीं किया जाएगा, उन्हें मुस्लिम समुदाय को संतुष्ट करने में कोई खास सफलता नहीं मिली है।
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का फायदा उठाने की कोशिश
8 अप्रैल को शुरू हुई हिंसा निषेधाज्ञा और इंटरनेट सेवाओं के निलंबन के बावजूद आज भी जारी है। मुर्शिदाबाद के जंगीपुर उपखंड और कोलकाता सहित राज्य के अन्य हिस्सों से सार्वजनिक संपत्ति पर भीड़ के हमले की खबरें आई हैं। पश्चिम बंगाल पिछले कुछ समय से सांप्रदायिक तनाव सुलग रहा है।

राजनीतिक लाभ
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा दोनों ने राजनीतिक लाभ के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का फायदा उठाने की कोशिश की है। जहाँ टीएमसी ने वक्फ संशोधनों के खिलाफ मुस्लिम विरोध को चुपचाप प्रोत्साहित किया वहीं भाजपा ने पूरे राज्य में सांप्रदायिक रूप से आवेशित राम नवमी जुलूसों का समर्थन किया। हालाँकि पुलिस ने अब कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है, लेकिन मौजूदा हिंसा से पहले और उसके दौरान उनकी निष्क्रियता स्पष्ट है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तब से हस्तक्षेप करते हुए मुर्शिदाबाद में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती का आदेश दिया है।
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प्रशासन मौजूदा अशांति को रोकने में बुरी तरह से विफल
राज्य में हर बड़े धार्मिक त्यौहार से पहले तनाव बना रहता है और पुलिस व्यवस्था कमज़ोर और तेज़ी से राजनीतिक होती जा रही है। मुर्शिदाबाद में 2019 में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के विरोध के दौरान इसी तरह की हिंसा देखी गई थी, लेकिन प्रशासन मौजूदा अशांति को रोकने में बुरी तरह से विफल रहा है।

लोगो की गलत मानसिकता चरम सीमा पर
हिंसा राज्य के सबसे गरीब इलाकों में से एक में हो रही है, जहां पुरुष काम के लिए पलायन करते हैं और महिलाएं बीड़ी बनाकर जीविका कमाती हैं। रामनवमी जुलूस और वक्फ संशोधन को लेकर तनाव बढ़ने के समय राजनीतिक दलों ने शांति कायम करने के बजाय आग को हवा देना चुना है। यह मानसिकता पूरे देश में देखी जा रही एक बड़ी और परेशान करने वाली प्रवृत्ति का हिस्सा है।
निष्पक्ष तरीके से काम करने में विफल ममता सरकार
एक साल में राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टी और टीएमसी राजनीतिक लाभ के लिए सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने पर आमादा हैं। इसमें बदलाव होना चाहिए। वर्तमान सरकार का ध्यान शासन और विकास पर केंद्रित होना चाहिए। सत्ता में होने के नाते, टीएमसी सिर्फ़ भाजपा पर आरोप लगाकर अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकती। ममता बनर्जी सरकार को सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए तेजी से और निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। कानून का शासन मजबूती से स्थापित होना चाहिए और पुलिस को हिंसा को रोकना चाहिए।

अमृता श्रीवास्तव – 831 042 8570
बेंगलुरु, कर्नाटक
