हैदराबाद : साहित्य सेवा समिति की 121 वीं मासिक गोष्ठी समिति के अध्यक्ष डॉ दयाकृष्ण गोयल व साहित्य सेवा समिति की महामंत्री श्रीमती ममता जायस्वाल की उपस्थिति में संपन्न हुई। गोष्ठी दो सत्रों में आयोजित की गई। दोनों गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ दया कृष्ण गोयल ने की। डॉ दयाकृष्ण गोयल ने स्वागत शब्दों को संजोया तथा कार्यक्रम का शुभारंत्र उर्मिला पुरोहित के सरस्वती वंदना से हुआ।
तदुपरांत “हिन्दी साहित्य में महिला साहित्यकारों का वर्चस्व” का विषय पर उस्मानिया विश्व विद्यालय के प्रोफेसर संगीता व्यास ने अपने विचार व्यक्त किये। उन्होने सूर्य अंश के समान महिला साहित्यकारों का हिंदी साहित्य पर प्रभाव के विविध काव्य उदाहरण प्रस्तुत किये।
विषय की विवेचना को सारगर्भित करते हुए प्रमुख प्रवक्ता ज्योति नारायण ने विविध आयामों को छूते हुए महिला साहित्यकारों के दैनिक जीवन में कैसे प्रवेश किया इस पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसी क्रम में बी एल आच्छा, दर्शनसिंह, रचना चर्तुवेदी, सुमीता सुन्ना, ममता जायस्वाल ने अपने विचार व्यक्त किये।
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द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी में फाल्गुन की रंगीन फुहारें, नारी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों के गीत, कविताओं, ग़ज़लों, कुंडलियों, दोहों,व्यंग्य ने सभी श्रोताओं का मन मोह लिया। काव्य गोष्ठी में अर्चना पाण्डे, इंदुसिंह, रचना चर्तुवेदी, उमेश चंद यादव, दमयांकर प्रसाद, रेखा अग्रगल, सी. पी. दायमा, दर्शन सिंह, सुनीता लुल्ला, ज्योति नारायण, ममता जायसवाल, उमा देवी, मोहिनी गुप्ता, वर्षा शर्मा, दयाकृष्ण गोयल आदि ने भाग लिया। साथ ही गंगाधर वानोडे, तृप्ति मिश्रा, अभिजित पाठक, मंजू राठी, राहुल प्रताप सिंह डॉ. संगीता व्यास की उपस्थिति रही हैं।
डॉ. दयाकृष्ण गोयल के अध्यक्षीय टिप्पणी के सुनीता लुल्ला ने धन्यवाद ज्ञापित किया। महिला दिवस एवं होली की बधाई के साथ गोष्ठी संपन्न हुई। कार्यक्रम में तकनीकि सहयोग साहित्य सेवा समिति के सहसचिव उमेश चंद यादव का रहा है। गीता अग्रवाल ने मीडिया प्रभार संभाला है। दोनों सत्रों का सफल संचालन ममता जायस्वाल ने किया।
