हैदराबाद : थाईलैंड का उत्तरी प्रांत चियांग माई में मशहूर ‘टाइगर किंगडम’ के दो बड़े पार्क में 72 बाघों की मौत गई है। यह कोई साधारण घटना नहीं है, बल्कि एक बेहद संक्रामक वायरस का हमला है जो बाघों के पाचन तंत्र और इम्युनिटी पर सीधा प्रहार कर रहा है। शनिवार को आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद हड़कंप मच गया है, क्योंकि मरने वाले बाघों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय प्रशासन इस फैलते संक्रमण को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है।
तबाही का सबसे ज्यादा असर ‘टाइगर किंगडम मे टैंग’ और ‘टाइगर किंगडम मे रिम’ में देखा गया है। ये वे टूरिस्ट स्पॉट्स हैं जहां सैलानी बाघों के साथ फोटो खिंचवाने और उन्हें करीब से देखने आते थे। आंकड़ों के मुताबिक, 8 फरवरी से 19 फरवरी के बीच मे टैंग में 51 बाघों की मौत हुई, जबकि मे रिम में 21 बाघों ने दम तोड़ा है। प्रोटेक्टेड एरिया ऑफिस द्वारा जारी की गई टाइमलाइन बताती है कि वायरस इतनी तेजी से फैला कि विशेषज्ञों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अब इन दोनों ठिकानों पर बाहरी लोगों की एंट्री पूरी तरह बंद कर दी गई है।

चियांग माई के पशुधन अधिकारियों ने जब मृत बाघों के शवों का परीक्षण किया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। शुरुआती टेस्ट में ‘फेलिन पार्बोवायरस’ की पुष्टि हुई है, जिसे ‘फेलिन पैनलेुकोपेनिया’ भी कहा जाता है। इसके साथ ही लैब टेस्ट में ‘कैनाइन डिस्टेंपर वायरस’ (CDV) और ‘माइकोप्लाज्मा’ बैक्टीरिया के अंश भी मिले हैं। ये वायरस बाघों के फेफड़ों और पेट पर हमला करते हैं, जिससे उन्हें तेज बुखार, खूनी दस्त और सांस लेने में तकलीफ होती है।
थाईलैंड के पशुधन विकास विभाग के महानिदेशक सोमचुआन रतनमुंगक्लानन ने एक कड़वी सच्चाई की ओर इशारा किया है। उनका मानना है कि इन पार्क्स में बाघों के बीच होने वाली ‘इनब्रीडिंग’ (एक ही वंश में प्रजनन) की वजह से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी बेहद कमजोर हो गई थी। यही कारण है कि वायरस ने इतनी तेजी से अपना असर दिखाया।

उन्होंने यह भी कहा कि पालतू कुत्तों और बिल्लियों के मुकाबले बाघों का इलाज करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि जब तक उनके बीमार होने का पता चलता है, तब तक संक्रमण काफी बढ़ चुका होता है। इस घटना के बाद मे रिम पार्क को 14 दिनों के लिए सील कर दिया गया है। जीवित बचे सभी बाघों को सुरक्षित केंद्रों में क्वारंटीन किया गया है और उन्हें वैक्सीन लगाने की तैयारी चल रही है। थाईलैंड में इससे पहले 2004 में भी बर्ड फ्लू के कारण 147 बाघों की मौत हो गई थी, जो आज भी एक काला अध्याय माना जाता है।
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ప్రాణాంతక వైరస్, 72 పులులు మృతి
హైదరాబాద్ : అంతుచిక్కని ప్రాణాంతక వైరస్..జూలో పులులన్నింటికి ఒకేసారి సోకింది. వైరస్ వేగంగా వ్యాపించడంతో తీవ్రంగా జబ్బుపడి డజన్లకొద్ది పులులు ప్రాణాలొదిలాయి. వైద్యులు ఎంత ప్రయత్నం చేసినా పులులను రక్షించలేకపోయారు. థాయిలాండ్లోని ఓ జూలో డజన్ల కొద్దీ పులులు ఒక ప్రమాదకరమైన వైరస్ వల్ల మరణించిన ఘటన వెలుగులోకి వచ్చింది.
థాయ్ లాండ్ లోని శ్రీ రాచా టైగర్ జూలో ప్రాణాంతక వైరస్, బాక్టీరియల్ ఇన్ఫెక్షన్ తో 72 పులులు చనిపోయాయి. పులుల కళేబరాలను పరిశీలించగా కనైన్ డిస్టెంపర్ అనే అత్యంత వేగంగా విస్తరించే వైరస్ తోపాటు శ్వాసకోశ వ్యవస్థను ప్రభావితం చేసే బ్యాక్టీరియా సోకిందని తేలింది. ఈ వైరస్ సాధారణంగా కుక్కలు, పెద్ద పులులు, సింహాలు, పెద్ద పిల్లి జాతులకు సోకుతుందట. ఈ వైరస్ శ్వాసకోశ సమస్యలు, జ్వరం, నరాల సమస్యలకు కారణం అవుతుందని వెటర్నరీ డాక్టర్లు చెబుతున్నారు.
శ్రీ రాచా టైగర్ జూలో చాలా పులులకు ఈ వైరస్ సోకింది. వేగంగా విస్తరించే లక్షణంగా ఉండటంతో తక్కువ టైంలో జూలోని పులులన్నింటికి వైరస్ సోకింది. వైరస్ ను అధికారులు గుర్తించేలోపు పెద్ద సంఖ్యలో పులులు మరణించాయి. అయితే కొన్ని పులులను టీకాలు వేయడం ద్వారా జూ అధికారులు రక్షించారు. 2004లో థాయిలాండ్లో బర్డ్ ఫ్లూ కారణంగా 147 పులులు చనిపోయాయి, దీనిని ఇప్పటికీ ఒక చీకటి అధ్యాయంగా పరిగణిస్తారు.
రెండేళ్ల క్రితం మధ్యప్రదేశ్ లోని కన్హా నేషనల్ పార్క్లో ఇటువంటి ఘటనే జరిగింది. ప్రధాని మోదీ ఆఫ్రికా నుంచి ప్రత్యేకంగా తెప్పించిన 8 చిరుతలు కేవలం నాలుగు నెలల వ్యవధిలోనే మృతిచెందడం అప్పట్లో సంచలనంగా మారింది. చిరుతలు చనిపోవడానికి ఇన్ఫెక్షన్లు, అస్వస్థత ప్రధాన కారణాలుగా గుర్తించారు. (ఏజెన్సీలు)
