हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में रविवार को गूगल मीट के माध्यम से क्लब की 392वीं मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन संपन्न हुआ। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए क्लब अध्यक्ष डॉ अहिल्या मिश्र एवं कार्यकारी संयोजिका मीना मुथा ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता अवधेश कुमार सिंहा (नई दिल्ली) ने की। सास्मिता नायक द्वारा निराला रचित सरस्वती वन्दना की सुमधुर प्रस्तुति दी गई।
डॉ अहिल्या मिश्र ने पटल पर उपस्थित साहित्यकारों का शब्द कुसुमों से स्वागत करते हुए कहा कि संस्था अपने 31वें वर्ष की साहित्यिक यात्रा में सबके साथ एवं सहयोग के साहित्य की ओर निरंतर अग्रसर है। उन्होंने सभी को होली पर्व की शुभकामनाएँ दी और कहा कि होली के उपलक्ष्य में आज हम केवल काव्य गोष्ठी का आनंद लेंगे। होली के रंग में काव्य के नव रसों को घोलेंगे तथा इन रसों का आनंद लेते हुए हम सभी झूमेंगे।
डॉ इंदु सिंह, के पी अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, गीता अग्रवाल, दर्शन सिंह, शोभा देशपांडे, सुनीता लुल्ला, प्रियंका पांडे, उमा सोनी, वोनोद गिरी अनोखा, सरिता सुराणा, पुष्पा वर्मा, उषा शर्मा, शिल्पी भटनागर, आर्या झा, डॉ सुषमा देवी, सरिता दीक्षित, तृप्ति मिश्रा, निशि कुमारी, प्रतिमा सिंह, मोनिका, डॉ कृष्णा सिंह, सत्यनारायण काकड़ा, चंद्रप्रकाश दायमा, विशाखा, डॉ सुपर्णा मुखर्जी, वर्षा शर्मा, मीना मुथा एवं डॉ अहिल्या मिश्र ने काव्य पाठ में भाग लिया। डॉ मदन देवी पोकरणा ने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि क्लब से निरंतर जुड़ी रहूँगी।
यह भी पढ़ें-
अवधेश कुमार सिंहा ने अध्यक्षीय टिपण्णी में कहा कि सभी की रचनाओं में अलग अलग रस और भाव दिखे हैं। इनमें जीवन का रंग, समाज का रंग, राजनैतिक चिंताएँ, भविष्य की कामनाएँ भी थीं। भारत की होली को विश्व देखेगा यही उम्मीद करते हैं। गीत, ग़ज़ल, दोहे, कुंडलियाँ, जोगीड़ा, क्षणिकाएँ, आदि विधाओं से काव्य शास्त्र सजा रहा। भक्ति, श्रृंगार, वीर, वीभत्स, हास्य आदि रसों से सराबोर कविताएँ अंतर्मन को छू गई।
सभी का प्रयास प्रशंसनीय रहा। ‘अब होली में चलती नहीं फागुन का बयार’ कविता का अध्यक्षीय काव्य पाठ अवधेश कुमार सिन्हा ने किया। प्रवीण प्रणव और डॉ आशा मिश्रा मुक्ता ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। मीना मुथा ने कार्यक्रम का संचालन किया। चन्द्रप्रकाश दायमा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। के राजन्ना की कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति रही।
