विश्व भाषा अकादमी: सद्भावना सभा के रूप में मासिक गोष्ठी आयोजित, सरिता सुराणा के पति बिमल सुराणा को श्रद्धांजलि अर्पित

हैदराबाद : विश्व भाषा अकादमी, भारत की तेलंगाना इकाई द्वारा 27वीं मासिक गोष्ठी सद्भावना सभा के रूप में आयोजित की गई। डॉ. संगीता शर्मा ने सभी सहभागियों का हार्दिक स्वागत किया। आर्या झा की सरस्वती वन्दना से गोष्ठी प्रारम्भ हुई।

प्रथम सत्र में ‘आत्मा की अमरता और संसार की नश्वरता’ विषय पर अध्यक्ष एवं मुख्य वक्ता डॉ. सुमन लता ने बहुत ही सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी बात प्रारम्भ करते हुए कहा कि हम सबमें यह जिज्ञासा सदैव रही है कि को अहं अस्मि? अर्थात् मैं कौन हूं? आत्मा अजर अमर है, वह कभी नष्ट नहीं होती। उसे न आग जला सकती है और न ही शस्त्रों से उसका छेदन किया जा सकता है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए श्रीमद्भागवत गीता के 18 अध्यायों, वेद और उपनिषद आदि के दृष्टांतों के माध्यम से बहुत ही सुन्दर और सार्थक ढंग से विस्तारपूर्वक इस बात को समझाया। उन्होंने नचिकेता और सती सावित्री के उद्धरणों के माध्यम से आत्मा की अमरता की बात की पुष्टि की।

दर्शन सिंह ने सर्वे भवन्तु सुखिन: की बात पर बल देते हुए कहा कि आत्मा सनातन है, अमर है, एक ऊर्जा है, वह कभी नष्ट नहीं होती। गुरु नानक देव जी ने कहा है कि जग रचना सब झूठ है। उन्होंने राजा जनक और महाराजा रणजीत सिंह जी के उदाहरण देकर इस बात को समझाया कि ये लोग माया के बीच रहकर भी मोहमाया से दूर थे।

आर्या झा ने कहा कि ईश्वर सब जगह मौजूद हैं, ईश्वर का सूक्ष्म रूप हम सबमें मौजूद है। हम दृश्य की जगह अदृश्य शक्ति को ज्यादा महसूस कर सकते हैं। हर्षलता दुधोड़िया ने छन्दबद्ध रचना के माध्यम से संसार की नश्वरता और आत्मा की अमरता पर प्रकाश डाला।

डॉ. संगीता शर्मा ने भी इस विषय पर अपने विचार रखे और सभी वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रथम सत्र की समाप्ति पर संस्था अध्यक्ष सरिता सुराणा के पति दिवंगत बिमल जी सुराणा को संस्था के सदस्यों द्वारा श्रद्धांजलि देने हेतु दो मिनट का मौन रखा गया। सभी ने उनकी आत्मा की शान्ति हेतु प्रार्थना की।

द्वितीय सत्र में सभी उपस्थित सदस्यों ने इसी विषय पर अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया। डॉ. सुमन लता ने गोष्ठी की अध्यक्षता की और अपना अध्यक्षीय काव्य पाठ प्रस्तुत किया। साथ ही सभी सदस्यों की रचनाओं पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत की। सरिता सुराणा ने सभी सदस्यों के सहयोग हेतु उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया।

इस गोष्ठी में श्रीमती सुनीता लुल्ला, श्रीमती भावना पुरोहित और के राजन्ना भी उपस्थित थे। डॉ. संगीता शर्मा ने गोष्ठी का संचालन किया। आर्या झा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ गोष्ठी सम्पन्न हुई।

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