कौशांबी (उत्तर प्रदेश) : राष्ट्र संत गाडगे महाराज जी के 149वीं जयंती के अवसर पर प्रतीक्षा नायरा सदन पीपलगांव में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गाडगे महाराज जी के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. नरेंद्र दिवाकर ने धोबी समाज एवं बाबा गाडगे के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालकर की।
तदोपरांत एडवोकेट मनोज कुमार ने कहा कि हमें समाज के लोगों को शिक्षित और नशामुक्ति के लिए प्रेरित करना चाहिए। विनोद कुमार रजक ने कहा कि आप लोग समाज को प्रेरित करने वाली योजनाओं को जन-जन तक प्रसारित करिए हम आपके साथ रहेंगे। डॉ. संदीप ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए शिक्षा और सतर्कता के साथ-साथ हमारे संगठित होकर साथ चलने से ही सामाजिक परिवर्तन आयेगा। अनिल कुमार ने अपने समाज के लोगों को शिक्षित करने की मजबूत पहल की वकालत की।
साथ ही प्राध्यापक सुरेंद्र चौधरी ने शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हमें शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन की मसाल है। विनोद भास्कर ने अपने कानपुर भ्रमण का किस्सा सुनाते हुए बताया कि वहां एक नगरसेन बाबा है जिनकी सामाजिक प्रतिष्ठा खूब है इसलिए उनकी विस्तृत जानकारी इकट्ठा करने का प्रयास कर रहा हूं जो शायद अपने समाज से जुड़ा हुआ विषय है। ममता दिवाकर गाडगे बाबा के साथ-साथ चलने वाले उनके माता और पत्नी के योगदान की सराहना की और कहा कि प्रत्येक पुरुष के विकास के पीछे किसी न किसी स्त्री का हाथ होता है।
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मनीष कुमार ने समाज के लोगों को एक दूसरे से संवाद स्थापित करने की बात करते हुए कहा की हमें महापुरुषों को अपना रोल मॉडल मानना चाहिए।विराट एवं प्रत्यूष कुमार ने बाबा गाडगे की जीवन पर संक्षिप प्रकाश डाला। कार्यक्रम में नन्हें मुन्ने सिपाहियों श्रेयस और तेजस ने गाडगे बाबा के जीवन के बारे में विस्तृत प्रकाश डाला जो काफी प्रभावित करने वाला रहा। अंत में ईश्वरी प्रसाद ने निष्कर्ष रूप में कहा कि सैकड़ों और हजारों में कोई एक बोलने और साथ चलने वाला पैदा होता है। इसलिए हमेशा साथ चलने और सच कहने की आदत डालनी चाहिए जो सामाजिक उत्थान के बीज हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित सदस्य ईश्वरी प्रसाद चौधरी, महंती देवी, एडवोकेट मनोज कुमार, विनोद रजक, डॉ. संदीप दिवाकर, मनीष दिवाकर, अनिल कुमार, सुरेन्द्र चौधरी, एडवोकेट सुरेन्द्र चौधरी, आचार्य विनोद भास्कर, आरती विनोद भास्कर, ममता नरेन्द्र दिवाकर, विराट, प्रत्युष, तेजस, श्रेयस, डॉ. नरेन्द्र दिवाकर आदि।
