महाशिवरात्रि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस विशेष दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाता है। भगवान शिव को महादेव, नीलकंठ, शङ्कर, महाकाल, रुद्र, शिवाय, हर, ईश्वर, त्रिमूर्ति, भोलेनाथ, महेश्वर, गिरिजापति शिव: आदि नामों से पुकारा जाता है। भगवान शिव पूरी सृष्टि के संहार करता एवं पालक हैं। इसी दिन 12 द्वादश ज्योतिर्लिंग प्रकट हुए थे। ज्योतिर्लिंग की पूजा अर्चना के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं और शिव की पूजा आराधना करते हैं।
पौराणिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन पूरी सृष्टि को विष से भगवान शिव ने बचाया था और फिर सुंदर नृत्य किया था। वे शिव त्रिलोक के स्वामी हैं। भगवान शिव को सभी देवी देवताओं में सबसे लोकप्रिय देवता माना जाता है। यह त्योहार जीवन और दुनिया में अंधेरे और अज्ञानता पर काबू पाने की याद दिलाता है। भगवान शिव कल्याणकारी हैं और जल्दी खुश होकर अपने भक्तों के कष्टों को हर लेते हैं। महाशिवरात्रि को अति उत्साह से मनाया जाने वाला त्यौहार है। सभी भक्त इस त्यौहार को बड़े धूमधाम से मनाते हैं। शिव की महिमा अनन्त है। ऐसा प्रचलित है कि सभी मनोकामनाएं और परेशानियां भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से दूर हो जाती हैं।
यह भी मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्मा के रुद्र रुप से मध्य रात्रि को भगवान शंकर का अवतरण हुया था। इसी दिन शिव पार्वती के विवाह के गीत गाये जाते हैं। शिव के गले में सर्प की माला व भूत प्रेत उनके गण हैं। इस दिन उपवास करके शिव की पूजा अर्चना करके बेर, बिल्वपत्र , धतूरा उनको अर्पण करके पूजा करते हैं और सदैव सुख शांति की कामना करते हैं। कुछ लोग तो भांग भी चढ़ाते हैं। व्रत रखकर फलाहार का सेवन करते हैं। कहा जाता है कि इस दिन पति पत्नी एक साथ माता पार्वती और शिव की पूजा करें तो रिश्ते में मधुरता बनी रहती है। शिवरात्रि पर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। हनुमान जी शिव के ही अंशावतार माने गए हैं।
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भगवान शिव का वाहन नंदी है। उसकी पूजा अर्चना की जाती है। कहते हैं नंदी मनुष्य की प्रार्थना को भगवान शिव तक पहुंचा सकते हैं। एक कान पर हाथ रखकर दूसरे कान में अपनी मांग रखने से वह पूरी हो जाती है। महादेव शिव ने गंगा के तेज प्रवाह को अपनी जटाओं से रोककर धीरे धीरे पृथ्वी पर भेजा था। इसलिए गंगा को पवित्र माना जाता है और गंगा में स्नान करके अपने को पुण्य का भागीदार मानते हैं। शिवलिंग ज्योतिलिंग परमात्मा शिव के ज्योतिविंदु स्वरुप को ही माना जाता है।
भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने से हमारी बुराई को दूर कर देते हैं और हमें सुख व शांति से रहने की प्रेरणा देते हैं। परमात्मा शिव में स्त्री और पुरुष दोनों का भाव समाया हुआ है। इसलिए उन्हें अर्धनारीश्वर कहा गया है। नारी को उसके शक्ति स्वरुप का परिचय कराते हैं।, लक्ष्मी, दुर्गा व सरस्वती के रूप में नई सृष्टि को इन रूपों से उत्तम कार्य कराते हैं। पार्वती व सीता पुण्य आत्माएं है, जिन्होंने महिलाओं को हिम्मत दी है। शास्त्र कहते हैं जहाँ नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं।
महाशिवरात्रि पर मंदिरो में भक्त पहुंचकर शिव की पूजा अर्चना के बाद दान पुण्य करके कष्टों से छुटकारा पाने की विनती करते हैं। भोलेनाथ को जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता के रूप में जाना जाता है। अत: अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की जाती है। हमें चाहिए कि इस दिन कम से कम अपनी एक बुराई को छोड़कर दया भाव से नव निर्माण में भागीदार बनें।
शिव मंत्र
ॐ नमः शिवाय। यह सबसे प्रसिद्ध मंत्र है। इसका अर्थ है मैं भगवान शिव को नमन करता हूं। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के 108 बार जाप करने से अपनी आत्मा को सभी पापों से मुक्त किया जा सकता है। यह मंत्र शांत रहने में भी मदद करता है।
ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः इसका अर्थ है कि मैं भगवान शिव को प्रणाम करता हूं। भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए आपको इसका पाठ करना चाहिए। यह मंत्र सभी मनोकामनाओं को पूरा करने में सहायक है।
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
जिस व्यक्ति की कुंडली में अकाल मृत्य योग हो, उसे महामृत्युंजय जाप कराना चाहिए। जो भक्त इस मंत्र का जाप नियमित रूप से करता है, उसके रोग, दोष तथा सभी सकंट समाप्त हो जाते हैं। पवित्र मन से महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना करके विश्व कल्याण की भावना से उत्प्रोत रहे। विश्व कल्याण में मानव कल्याण है। हर हर महादेव।

के पी अग्रवाल, हैदराबाद
