केंद्रीय हिंदी संस्थान: 449वें ऑनलाइन नवीकरण पाठ्यक्रम का समापन समारोह, इन वक्ताओं ने दिया यह संदेश

हैदराबाद: केंद्रीय हिंदी संस्थान हैदराबाद केंद्र द्वारा तमिलनाडु के तिरुनेलवेली तथा आसपास के जिले के हिंदी प्रचारकों के लिए गूगल मीट के माध्यम से आयोजित 449वें ऑनलाइन नवीकरण पाठ्यक्रम का समापन समारोह शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो वी रा जगन्नाथन (माननीय शासी परिषद सदस्य, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा) ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो राजेश कुमार (माननीय सदस्य, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा) उपस्थित थे। डॉ गंगाधर वानोडे (क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र) इस नवीकरण पाठ्यक्रम के संयोजक हैं। सुश्री एस राधा के गणेश स्तुति से कार्यक्रम आरंभ हुआ। सुश्री राजलक्ष्मी ने सरस्वती वंदना की। संस्थान गीत के बाद सुश्री कलाराजन ने स्वागत गीत सुनाया।

डॉ गंगाधर वानोडे ने किया स्वागत एवं परिचय

डॉ गंगाधर वानोडे (क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, भुवनेश्वर केंद्र) ने अतिथियों का स्वागत किया एवं अतिथियों का परिचय दिया। क्षेत्रीय निदेशक ने नवीकरण पाठ्यक्रम में किए गए कार्य का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। तत्पश्चात प्रतिभागियों को आशीर्वचन दिया। सुश्री प्रेमा जयबाल एवं श्री जी रामरंजन ने नवीकरण पाठ्यक्रम के संबंध में प्रतिक्रिया प्रस्तुत की। श्री सेल्वराज और श्रीमती आर कर्पहम ने देशभक्ति गीत सुनाया। श्रीमती श्यामला एवं श्रीमती जी जास्मिन ने हिंदी गीत सुनाया।

अतिथि अध्यापक प्रो एम ज्ञानम ने बोले…

अतिथि अध्यापक प्रो एम ज्ञानम ने अपने आशीर्वचन में कहा कि आप रोज कम से कम एक या आधा घंटा टी वी या रेडियो में मानक हिंदी सुनें। पाठ्यपुस्तक के अलावा हर दिन एक घंटा हिंदी पुस्तक कवर-टु-कवर पढ़ें। हिंदी की कोई पुस्तक महीने बीस से पचास रुपये अपने वेतन से बचाकर साल में एक हिंदी किताब खरीदें। यदि आपके आसपास हिंदी विद्वान हैं तो हर दिन एक पेज हिंदी में कुछ लिखकर उनको दिखाकर उनसे करेक्शन करवाएँ।

डॉ श्यामसुंदर का आशीर्वचन

डॉ श्यामसुंदर ने अपने आशीर्वचन में कहा कि प्रतिभागियों ने इस नवीकरण पाठ्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। सीखे हुए इस ज्ञान को अपने छात्रों तक पहुँचाएँ। डॉ विनीता कृष्णा ने अपने आशीर्वचन में कहा कि हिंदी पढ़ाने वाले अध्यापकों की जिम्मेदारी दूसरे अध्यापकों के समान, सामान्य जिम्मेदारी नहीं होती है। उनके ऊपर अतिरिक्त जिम्मेदारी है। उन्हें अपने छात्रों को नैतिकता की भी शिक्षा दी जानी चाहिए। अपनी कक्षा में पुराणों की कथाएँ, नैतिक कथाएँ सुनाई जा सकती हैं। छात्रों के ग्रहण करने की शक्ति को देखकर उनको पढ़ाया जाना चाहिए। इससे सही मायने में आप छात्रों के व्यक्तित्व का विकास कर पाएँगे।

मुख्य अतिथि प्रो राजेश कुमार का संदेश…

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो राजेश कुमार (माननीय सदस्य, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा) ने अपने वक्तव्य में कहा कि कक्षा हमारा साम्राज्य होता है। हम इसे अच्छा भी बना सकते हैं, उसे खराब भी कर सकते हैं। कार्य का केंद्र हम नहीं हैं, वे विद्यार्थी हैं। यदि हम इस बात को ध्यान रखेंगे तो हमारा दृष्टिकोण बदल जाएगा और हम अपने आपको केंद्र में न रखते हुए छात्र के अनुरूप अपने शिक्षण और संसाधनों को इकट्ठा करके उनको दे पाएँगे। छात्रों को सुनें, उनको बोलने का समय दें। भाषा का उपयोग करने वाला व्यक्ति तभी सफल होगा जब वह उसका उपयोग करेगा। उसकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सर्वोत्तम उपलब्ध एवं अनुभव दें कि वह यादगार रहे।

विद्यार्थियों की रुचि

अब नई-नई शिक्षा पद्धतियाँ आ रही हैं। उन नई पद्धतियों को अपनाएँ। अपना काम प्रभावी एवं सफल बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों की रुचि बढ़ जाएगी। सीखने के सिद्धांत एवं पद्धतियाँ बदलती रहती हैं। इसलिए हमें पढ़ते रहना चाहिए। आप जो भाषा विद्यार्थी को सिखा रहे हैं उसे सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थी जो सीख रहे हैं, उसकी क्या उपयोगिता है, यह विद्यार्थी को बताना चाहिए।

प्रो वी रा जगन्नाथन ने कहा…

अध्यक्षीय भाषण में प्रो वी रा जगन्नाथन (माननीय शासी परिषद, सदस्य, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा) ने अपने वक्तव्य में कहा कि समय के साथ ज्ञान के विस्तार एवं विकास के कारण जो स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। उसकी जानकारी रखना दो कारणों से अध्यापक के लिए महत्वपूर्ण है। दूसरों को बता सकें कि क्या नया है और उसका उपयोग कैसे किया जा सकता है। विद्यार्थी को नई तकनीकी की जानकारी से अवगत कराना आवश्यक है। यदि अध्यापक उसे नहीं जान पाएँगे तो कभी-कभी अध्यापक उपहास के पात्र बन सकते हैं।

अध्यापक की गरिमा

अध्यापक को हमेशा अपनी गरिमा बना कर रखने की आवश्यकता है। तभी आप सही मायने में उनका मार्गदर्शन कर सकेंगे। यदि आप उनके आदर के पात्र नहीं बन पाएँगे तो आप उन्हें ज्ञान नहीं दे पाएँगे। वही सफल अध्यापक है जो समय के साथ चले। आम तौर पर अध्यापक का कार्यकाल चालीस वर्ष का होता है। उन चालीस वर्षों में यदि आप वही पुरानी बातें कहते रहें जो आप चालीस वर्षों से कर रहे हैं, तो छात्र आपका आदर नहीं कर पाएँगे। इसलिए आप हमेशा अपने छात्रों से एक कदम आगे रहने की कोशिश करें।

राजभाषा हिंदी

पद्मभूषण डॉ मोटूरि सत्यनारायण जी संस्थान को गति देनेवाले व्यक्ति थे। उन्होंने नई सोच पैदा की। उन्होंने प्रयोजनमूलक हिंदी की बात की थी। उस समय अंतरराष्ट्रीय लहर थी। हमें अपनी भाषाओं को खासकर राजभाषा हिंदी को विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के लिए संपन्न एवं समृद्ध करना था। वाणिज्य में हिंदी का प्रचार-प्रसार हो सकता था। कार्यालय में, पत्रकारिता में, कानून में हिंदी का उपयोग हो सकता था। भाषा शिक्षण के क्षेत्र में एक नयापन, एक नई सोच पैदा हुई। उस संदर्भ में संस्थान ने बहुत सारा काम किया। बहुत सारी सामग्री तैयार की। नवीकरण का उद्देय वास्तव में यह होना चाहिए कि हमें यह देखते रहना होगा कि अब क्या कुछ नया चल रहा है। नई प्रवृत्ति है। उसके अनुसार हमें नवीकरण पाठ्यक्रम आयोजित करना है।

संचालन और धन्यवाद ज्ञापन

इस ऑनलाइन नवीकरण पाठ्यक्रम में कुल 28 (महिला-25, पुरुष-3) हिंदी प्रचारकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। हिंदी प्रचारकों ने समापन समारोह में उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन तमिलनाडु की हिंदी प्रचारक सुश्री मुत्तुकुमारी द्वारा किया गया। हिंदी प्रचारक सुश्री शशिकला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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